गोखपुर ट्रेजडी मामले में चौथी गिरफ्तारी, पुलिस ने क्लर्क सुधीर को किया अरेस्ट

4 वर्ष पहले
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गोरखपुर. बीआरडी मेडिकल कॉलेज मामले में पुलिस ने चौथी गिरफ्तारी की है। आरोपी क्लर्क सुधीर पांडेय को गोरखपुर पुलिस ने शुक्रवार देर रात को गिरफ्तार किया। इससे पहले तीन मुख्य आरोपियों को यूपी एसटीएफ की टीम गिरफ्तार कर चुकी है। बता दें, अगस्त में बीआरडी में 30 बच्चों समेत 60 से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई थी। 
 
 
आरोपी को कोर्ट में पेश करेगी पुलिस 
- इस मामले में विवेचना कर रहे सीओ कैंट, एसटीएफ व क्राइम ब्रांच लगातार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। शुक्रवार की रात सीओ कैंट अभिषेक सिंह को सूचना मिली कि सीएमएस कार्यालय में कार्यरत रहा क्लर्क सुधीर पांडेय खजांची चौक के पास एक मित्र से मिलने पहुंचा है। 
- इसके बाद सीओ की टीम ने घेराबंदी कर चौथे आरोपी क्लर्क सुधीर पांडेय को खजांची चौक से गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश क‍िया, जहां से सुधीर को जेल भेज दिया गया। वहीं, डॉ. सतीश समेत चार अन्य आरोपियों की तलाश में एसटीएफ व क्राइम ब्रांच छापेमारी कर रही है। 
- एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी चल रही है। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी भी कर ली जाएगी। 
 
सुधीर पर क्या है आरोप?  
- सुधीर पर अवैध ढंग से आर्थिक लाभ उठाने की नीयत से प्रिंसिपल से मिलिभगत कर ऑक्सीजन कंपनी का पेमेंट रोकने का आरोप है। 
- इसके साथ ही पूरे मामले में लापरवाही बरतने और इस मामले को किसी से साझा करने के आरोप हैं। 
- ऐसे ही आरोप कनिष्ठ सहायक लिपिक लेखा अनुभाग उदय प्रताप शर्मा, सहायक लिपिक लेखा संजय कुमार त्रिपाठी, चीफ फार्मासिस्ट गजानंद जायसवाल पर भी है। 
 
अब तक 4 लोग हुए अरेस्ट 
1. पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्र
2. प्रिंसिपल की पत्नी पूर्णिमा शुक्ला
3. डॉ. कफील खान
4. क्लर्क सुधीर पाण्डेय 
 
9 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ है केस
- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत के मामले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित की गई थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्र, उनकी पत्‍‌नी और इंसेफलाइटिस वार्ड के इंचार्ज डॉ. कफील खान समेत 9 लोगों के खिलाफ केस मुकदमा दर्ज हुआ।
 
चीफ सेक्रेटरी ने सीएम को सौंपी थी रिपोर्ट
- गोरखपुर ट्रेजडी मामले पर चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार ने 23 अगस्त को सीएम योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में बच्चों की मौत के लिए मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा, एचओडी एनेस्थीसिया (बाल रोग विभाग) डॉ. सतीश और डॉ. कफील खान समेत 9 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने की सिफारिश की गई थी।
 
किस पर क्या है आरोप?
 
# ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी मनीष भंडारी:
- कंपनी ने लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति के दायित्व को पूरा नहीं किया। ये काम क्रिमिनल एक्ट की कैटेगरी में आता है। 3 अगस्त को जानकारी दिए जाने के बाद भी इन्होंने ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी।
 
# बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सस्पेंड प्र‍िंसिपल डॉ. राजीव मिश्र:
- घूस की लालच में इन्होंने 2016-17 के ढाई करोड़ रुपए लैप्स करा दिए और अगस्त में बजट होने के बावजूद घूस के लिए पुस्पा सेल्स का भुगतान रोका। ये भी आरोप है कि ऑक्सीजन की कमी होने के बावजूद वे 10 अगस्त को सीनियर अफसरों को सूचना दिए बगैर मेडिकल कॉलेज से चले गए, जो क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी की कैटेगरी में आता है।
 
# बीआरडी के एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. सतीश:
- ऑक्सीजन रुकने की जानकारी के बावजूद डॉ. सतीश डिपार्टमेंट और मुख्यालय छोड़कर चले गए। उन्होंने बच्चों की जान बचाने की कोशिश नहीं की, जबकि इन्हें पता था कि ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत हो सकती है।
 
# डॉ. कफील खान:
- डॉ. कफील एमसीआई में रजिस्ट्रेशन न होने के बाद भी पत्नी के नर्सिंग होम में अनुचित लाभ के लिए प्रैक्टिस करते रहे। मरीजों के इलाज में जो कोशिश इन्हें करनी चाहिए थी, वो नहीं की। सरकारी डॉक्टर होते हुए भी उन्होंने संचार माध्यमों के जरिए लोगों और जनता को धोखा देने की कोशिश की। सरकारी नियमों का दुरुपयोग किया।
 
# डॉ. पूर्णिमा शुक्लाः
- पति राजीव मिश्र से भ्रष्ट व्यवहार कराने में इनका महत्वपूर्ण योगदान था। वे लेखा विभाग के वर्कर्स को फोन करके कमीशन और अवैध रूप से पैसे वसूलती थीं।
 
# गजानंद जायसवालः
- डॉ. पूर्णिमा शुक्ला से मिलकर कमीशन के लिए फर्मों का भुगतान करते थे।
 
# र्क्लकल अकाउंटेंट उदय प्रताप शर्मा, असिस्टेंट क्लर्क संजय त्रिपाठी, सुधीर पांडेय:
- एफआईआर में इन लोगों को घूस की लालच में लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कंपनी का भुगतान रोकने का दोषी ठहराया गया है।
 
क्या है गोरखपुर ट्रेजडी?
- बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज में 7 अगस्त से लेकर 12 अगस्त तक 30 बच्चों समेत 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी। आरोप है कि ये मौतें हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने की वजह से हुईं। कहा गया कि पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी ने पेमेंट बकाया होने की वजह से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई रोक दी थी। कंपनी ने कहा कि हमने 14 रिमांडर भेजे, लेकिन इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोई एक्शन नहीं लिया।
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