फोटो: कार्यक्रम के दौरान बॉलीवुड के गाने गाते इजराइली स्टूडेंट।
गोरखपुर. हिंदी की हिन्दुस्तान में स्थिति जानने और समझने के लिए इजराइली स्टूडेंट्स गोरखपुर पहुंचे। यहां उन्होंने बॉलीवुड के हिंदी गानों को सुनाकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में बैठे लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 'बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी, तो सीधी-साधी छोरी शराबी हो गई" जैसे गानों को सुनकर ऐसा लगा कि ये इजराइली नहीं बल्कि भारतीय हैं।
विश्वविद्यालय के संवाद भवन में हिंदी विभाग और शोध पत्रिका आवर्तन के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को सेमीनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में इजराइली छात्रों ने मंचासीन सुरेंद्र दूबे, प्रोफेसर गेनाडी, प्रोफेसर जनार्दन, प्रोफेसर आरडी राय, डॉ. शफीक अहमद और खचाखच छात्र-छात्राओं से भरे हाल में सुनाकर लोगों को हिंदी के प्रति आकर्षित किया। इजराइली छात्रों का कहना था कि बॉलीवुड के गानों को उन्होंने विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर इजराइल में होने वाले कार्यक्रम के लिए सीखा था।
हिंदी के दीवाने हैं ये युवा
इजराइल के तेल अवीव विश्वविद्यालय की छात्र आलेक्जांड्रा, अदी फीरोर, ताल गोरसकी, मातान मेसीका, याकीर दाहारी और ओफीर मिजाख्री को हिंदी बोलने, पढ़ने और लिखने में दूसरी भाषाओं से ज्यादा मजा आता है। इनका कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हिंदी का इस्तेमाल खूब हो रहा है।
टेक्नोलॉजी का है आज का युग: हिंदी प्रशिक्षक डाण्गेनेडी श्लोमपेर
इजराइल के तेल अवीव विश्वविद्यालय के हिंदी प्रशिक्षक रूसी मूल के डाण्गेनेडी श्लोमपेर का कहना है कि आज का युग टेक्नोलॉजी का है। हमारे सोच विचार, कार्य व्यवहार आदि बहुत कुछ तकनीक से जुड़ रहे हैं। ऐसे में अगर किसी भाषा को सफल होना है, तो उसे तकनीक की भाषा बननी होगी। इसी से वह भाषा रोजगार देने में सहायक होगी, जो युवाओं की अपेक्षा है। हिंदी के विकास के लिए भी जरूरी है कि उसे तकनीक की भाषा बनाई जाए।
भारत में जारी अंग्रेजी बनाम हिंदी के बहस से नाराज गेनेडी कहते हैं कि कोई भी भाषा कभी भी तोड़ने का काम नहीं करती। हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है, इसे बढ़ावा मिलना चाहिए। अंग्रेजी की अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, जिसका ज्ञान सभी के लिए जरूरी है।
आगे पढ़िए, कई भाषाओं के जानकार हैं गेनेडी...