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जब तक सूरज चांद रहेगा, महंत अवैद्यनाथ का नाम रहेगा

7 वर्ष पहले
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महंत अवैद्यनाथ के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब (तस्वीर में)
  • शिष्यों ने रुद्राक्ष की माला चढ़ाकर लिया अंतिम आदेश
  • वृद्ध महिला ने सबसे पहले ब्रह्मलीन महंत को अर्पित किए श्रद्धा सुमन
गोरखपुर. श्रद्धा और प्रेम ने महंत अवैद्यनाथ को अमर बना दिया। ब्रह्मलीन महंत के आखिरी दर्शन के लिए उमड़े लोगों की जुबान पर एक ही नारा था। 'जब तक सूरज चांद रहेगा, महंत अवैद्यनाथ का नाम रहेगा'। अवैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का हुजूम अपने महंत को कुछ इसी अंदाज में आखिरी विदाई दे रहा था। श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था का संचालन स्वंय गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ करते रहे और योगी जी खुद फूल उठाकर श्रद्धालुओं को देते और बीच-बीच में ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज के लिए बनाए जा रहे समाधि स्थल का भी निरीक्षण करते रहे।

नाथ पंथ की परंपरा के अनुसार ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ के शांत शरीर के अंतिम दर्शन के दौरान भगवत गीता का पाठ चलता रहा। प्रातः काल शरीर शुद्धिकरण की प्रक्रिया और पूजा-अर्चना के बाद ब्रह्मलीन महंत जी के शरीर को अंतिम आदेश के लिए गुरु गोरखनाथ मंदिर ले जाया गया। यहां रुद्राक्ष की माला उनके सिर पर चढ़ाकर शिष्यों ने अंतिम आदेश प्राप्त किए।

शिष्यों ने रुद्राक्ष की माला चढ़ाकर लिया अंतिम आदेश

ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर के शान्त शरीर पर गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ, योगी शिवनाथ, समेत सैकड़ों संतों ने रूद्राक्ष की माला के साथ पुष्प अर्पित कर अंतिम आदेश प्राप्त किए। ब्रह्मलीन महंत के शान्त शरीर को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए गोरखनाथ मंदिर के सामने चबूतरे पर रखा गया। जहां हजारों महिलाएं, बच्चे और पुरूषों ने दर्शन किए।
आगे पढ़िए, वृद्ध महिला ने सबसे पहले ब्रह्मलीन महंत को अर्पित किए श्रद्धा सुमन...