फोटो: गोरक्षनाथ मंदिर में पूजा करते हुए महंत आदित्यनाथ।
गोरखपुर. नाथ संप्रदाय का विश्व प्रसिद्ध मंदिर गोरक्षनाथ गोरखपुर में स्थित है। शिव अवतारी महायोगी गुरु गोरक्षनाथ द्वारा त्रेता युग में यहां जलाई गई अखंड ज्योति से निकला काजल बच्चों को असीम ऊर्जा देता है। यहां अखंड धूने से निकली राख (भभूत) को शरीर के करीब रखने मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
यह मंदिर हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है तो देश की राजनीति भी यहीं से तय होती है। पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां मनसरोवर पोखरा जैसे छह सौ साल से अधिक पुराने अनेक रमणीक स्थल हैं जिनका सदियों पुराना इतिहास है।
हिंदू धर्म, दर्शन, अध्यात्म और साधना के अंतर्गत विभिन्न संप्रदायों और मत-मतांतरों में नाथ संप्रदाय का प्रमुख स्थान है। भारत वर्ष का कोई ऐसा प्रांत, अंचल और जिला नहीं है जिसे नाथ संप्रदाय के सिद्धों या योगियों ने अपनी चरण-रज, साधना और तत्व ज्ञान की महिमा से प्रवित्र नहीं किया हो।
आदिनाथ भगवान शिव से हुई है नाथ संप्रदाय की उत्पत्ति
नाथ संप्रदाय की उत्पत्ति आदिनाथ भगवान शिव के द्वारा मानी जाती है। लोक कल्याण के लिए नवनाथों कविनारायण ने मत्स्येंद्र नाथ, करभांजन नारायण ने गहनिनाथ, अंतरिक्षनारायण ने जालंधरनाथ, प्रबुद्धनारायण ने कानीफानाथ, आविहोत्ररनारायण ने नागनाथ, पिपंलायननारायण ने चर्पटनाथ, चमसनारायण ने रेवणनाथ, हरिनारायण ने भर्तृहरिनाथ, द्रमिलनारायण ने गोपीचंद नाथ नाम से इसे समय-समय पर इसे फैलाया। आदिनाथ से जो तत्वज्ञान मत्येंद्रनाथ ने प्राप्त किया उसे ही शिष्य बनकर शिवावतार महागुरु गुरु गोरक्षनाथ ने ग्रहण किया। इसके बाद नाथपंथ और साधना के प्रतिष्ठापक परमाचार्य के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की।
आगे पढ़िए अयोनिज अमरकाय सिद्ध महापुरुष हैं गुरु गोरक्षनाथ...