गोरखपुर. गोरक्षपीठाधीश्वर और गोरखपुर के सांसद महंत योगी आदित्यनाथ ने जेएनयू मामले में शुक्रवार को तीखी प्रतिक्रया दी। उन्होंने कहा कि देश की प्रतिष्ठित कही जाने वाली यूनिवर्सिटी जेएनयू में अफजल के समर्थन में स्टूडेंट यूनियन के नेतृत्व में जो घटना घटित हुई, वह निंदनीय ही नहीं, शर्मनाक है। केंद्र सरकार के अनुदान पर पलने वाले किसी भी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान में होने वाली इस प्रकार घटना न केवल चिंताजनक है, बल्कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अफजल था देश का गुनाहगार, उचति थी उसकी फांसी…
अफजल के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले तत्व न केवल देशद्रोह का कार्य कर रहे हैं, बल्कि प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद का समर्थन कर रहे हैं। इस प्रकार दुष्प्रवृत्ति को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार का दुस्साहस जब भारत सरकार के अनुदान पर पलने वाले किसी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान में होता है तो न केवल राष्ट्रीय चिंता का विषय होता है, बल्कि देश के अंदर सेकुलरिज्म के अवधारणा पर यह गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
जेएनयू पर योगी ने उठाए सवाल?
-योगी ने कहा कि क्या जेएनयू इसलिए प्रसिद्ध है, क्योंकि वह भारत विरोधी गतिविधियों का अड्डा है?
-आखिर कौन लोग जेएनयू में हैं, जो अफजल की जयंती के नाम पर भारत विरोधी नारे लगाते हैं?
-ये कौन लोग हैं जो पाकिस्तान का समर्थन करते हैं और कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश का हिस्सा बनते हैं?
-आखिर जेएनयू में ही क्यों हिंदू आस्था के प्रतीक गौ-माता के मांस को परोसने की दावत दी जाती है?
-इस शिक्षण संस्थान में कौन वे तत्व हैं, जो महिषासुर की जयंती मनाने की बात करते हैं? इनकी मानसिकता को स्वयं समझा जा सकता है।
भारत की जनता ने कभी गोहत्या की मान्यता नहीं दी
-भारतीय जनमानस ने कभी भी गोहत्या और गोमांस भक्षण की मान्यता नहीं दी है। रावण, कंस, महिषासुर और हिरण्याकश्यप के प्रति आस्था व्यक्त करने वाले तत्वों को भी कभी मान्यता नहीं दी। इसके बावजूद प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान कहे जाने वाले जेएनयू में यह सब कृत्य होना अत्यंत शर्मनाक है। शिक्षण संस्थान में राष्ट्र के योग्य और राष्ट्रभक्त नागरिक पैदा होना चाहिए। कहीं न कहीं भारत में हिंदू विरोधी और सेकुलरिज्म राजनीति इसकी गढ़ है।
भारत विरोधी तत्वों को बेनकाब करना जरूरी
योगी ने कहा कि इशरतजहां के बारे में हेडली के द्वारा दिया गया बयान देश की सेकुलर राजनीति को नंगा करके रख देता है और उनके देशद्रोही गतिविधियों को उजागिर करता है। अब समय आ गया है जब सेकुलरिज्म के नाम पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी तत्वों के बेनकाब किए जाने की आवश्यकता है। साथ ही जेएनयू जैसे संस्थान में हुए इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।