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इन पेड़ों से साफ होगा सीवेज का पानी और बचेगी बिजली

8 वर्ष पहले
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गोरखपुर. ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने 'पेपरबार्क ट्री' नाम के पेड़ के जरिए सीवेज के प्रदूषित जल को संशोधित करने का दावा किया है जो लोगों के लिए हानिकारक नहीं होगा। उन्होंने इस संबंध में एक रिसर्च पेपर भी प्रस्तुत किया है।
अगर आंकड़ों पर ध्यान दें तो सबसे ज्यादा बीमारियां जल जनित होती हैं। विश्व भर में 80 फीसदी से अधिक बीमारियों में प्रदूषित पानी का ही हाथ होता है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रति वर्ष 7 लाख बच्चों की मौत केवल डायरिया के कारण हो जाती है।
भारत में जल प्रदूषण पर्यावरण के लिए सबसे गंभीर खतरा बनकर उभरा है। इसका सबसे बड़े स्रोत शहरों से निकलने वाला सीवेज और इंडस्ट्रियल वेस्ट है जो बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदियों में प्रवाहित कर दिये जाते हैं। यही प्रदूषण जमीन के अन्दर के पानी को भी जहरीला बनाता है।
पूर्वांचल में भी इन्सेफेलाइटिस का सबसे बड़ा कारण है प्रदूषित जल। लाख प्रयासों के बावजूद भी इस प्रदूषण से निजात नहीं पाया जा सका है। इन्सेफेलाइटिस से मरने वाले बच्चों का आंकड़ा साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आए वैज्ञानिकों के एक दल ने गोरखपुर और आस पास के क्षेत्र को जल प्रदूषण से छुटकारा पाने का एक प्राकृतिक उपाय बताया।
आगे की स्लाइडों में जानिए...ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों का क्या है दावाः