गोरखपुर: BRD मेडिकल कॉलेज में कई मरीजों की मौत, ऑक्सीजन की कमी बताई जा रही वजह / गोरखपुर: BRD मेडिकल कॉलेज में कई मरीजों की मौत, ऑक्सीजन की कमी बताई जा रही वजह

BRD मेडिकल कॉलेज में गुरुवार देर रात कई मरीजों की मौत हो गई।

dainikbhaskar.com

Aug 11, 2017, 06:21 PM IST
बच्चे की मौत के बाद बॉडी लेकर ज बच्चे की मौत के बाद बॉडी लेकर ज
गोरखपुर. यहां के बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बीते दो दिन में 30 बच्चों की मौत होने का मामला सामने आया है। फिलहाल इन मौतों का कारण इन्सेफलाइटिस माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि ऑक्सीजन सप्लाई रुकना भी बच्चों की मौत की एक वजह है। लेकिन यूपी सरकार इससे इनकार कर रही है। बता दें कि यह घटना यूपी के सीएम योगी अादित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र में हुई है। दो दिन पहले योगी ने इसी अस्पताल का दौरा किया था। Q & A में समझें मामला...
Q. कब हुई इन बच्चों की मौत?
A. 1969 में बने इस सरकारी हॉस्पिटल के चाइल्ड डिपार्टमेंट में ये मौतें बीते 36 से 48 घंटे के दौरान हुई हैं।
Q. बच्चों की मौत की क्या वजह सामने आई?
A. 7 बच्चों की मौत इन्सेफलाइटिस से हुई। इसे दिमागी बुखार भी कहा जाता है। वास्तव में ये वायरल इन्फेक्शन है। गोरखपुर और आसपास के इलाकों में यह समस्या लंबे समय से है। बच्चे इसके ज्यादा शिकार होते हैं। तेज बुखार, दर्द के साथ शरीर पर चकत्ते आ जाते हैं। 25 बच्चों की मौत दूसरी बीमारियों की वजह से होने का भी दावा किया जा रहा है।
Q. ऑक्सीजन सप्लाई रुकने का मामला क्या है?
A. समझौते के अनुसार काॅलेज 10 लाख रु. ही उधार कर सकता है। बिल देने के 15 दिन में पेमेंट जरूरी है। पुष्पा सेल्स के 83 लाख रु. बकाया हैं। कंपनी 6 महीने से पैसे मांग रही थी। कंपनी के अधिकारी दीपांकर शर्मा ने चिट्‌ठी लिख 40 लाख रु. तुरंत मांगे। नहीं मिले तो 4 अगस्त को सप्लाई बंद कर दी। मौतें होने पर एडमिनिस्ट्रेशन ने 22 लाख रु. देने का प्रॉसेस शुरू किया। इस पर कंपनी सप्लाई देने को तैयार हो गई। हालांकि यह सप्लाई शनिवार शाम या रविवार तक ही पहुंचेगी।
Q. ऑक्सीजन सप्लाई में कोताही के आरोपों की हकीकत क्या है?
A. सरकार का दावा है कि मेडिकल कॉलेज में मौतों की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं बीमारी है, लेकिन इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार शाम से ही ऑक्सीजन की कमी थी। कोई ठोस बैकअप नहीं था। गुरुवार शाम 7.30 बजे 52 सिलेंडर लगाकर सप्लाई शुरू की गई। रात 1.30 बजे फैजाबाद से 50 सिलेंडर पहुंचे। शुक्रवार सुबह 8.30 बजे फिर जरूरत पड़ी। दोपहर 1.30 बजे गोरखपुर के मोदी फार्मा से 22 सिलेंडर लाए। 4.30 बजे 36 सिलेंडर मंगवाए। फैजाबाद की एक फर्म से 100 सिलेंडर मंगवाए। शुक्रवार सुबह बच्चों को एम्बु बैग से ऑक्सीजन दी जा रही थी। सशस्त्र सुरक्षा बल से भी 10 ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाए गए थे। अस्पताल की रिपोर्ट में मौतों का भी ब्यौरा दिया गया है।
Q. यूपी सरकार क्या कह रही है?
A. यूपी सरकार ने कहा है कि कोई भी मौत ऑक्सीजन सप्लाई में कमी के चलते नहीं हुई।
- गोरखपुर के डीएम ने कहा- डॉक्टरों का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी की चलते कोई मौत नहीं हुई, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक व्यवस्था थी।
Q. ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने क्या कहा?
A. हॉस्पिटल को ऑक्सीजन सिलेंडर पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी सप्लाय करती है। इसके यूपी डीलर मनीष भंडारी ने DainikBhaskar.com से कहा, “मेडिकल कॉलेज पर हमारा 69 लाख रुपए बकाया है। आज (शुक्रवार) 22 लाख का पेमेंट मिला। कल (शनिवार को) 40 लाख और मिलेगा। राजस्थान से एक ट्रक लिक्विड ऑक्सीजन भेजा गया है। ये आज रात (शुक्रवार को) पहुंच जाएगा। मामले में कॉलेज प्रिंसिपल राजीव मिश्रा दोषी हैं। उन्होंने पेमेंट रोक रखा था।”
- “6 महीने से पेमेंट नहीं मिला था। लड़के जाते थे तो दिन भर खड़े रहते थे लेकिन प्रिंसिपल उनसे नहीं मिलते थे। 3 साल पहले कॉन्ट्रैक्ट हुआ था, लेकिन कभी पेमेंट नहीं रुका। इस बार 6 महीने से पेमेंट रुका हुआ है।''
Q. क्या योगी ने भी किया था दौरा?
A. 9 अगस्त को योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर का दौरा किया था। वे इस अस्पताल भी आए। लेकिन उन्होंने वही देखा जो प्रशासन ने दिखाया। वो सच मुख्यमंत्री नहीं देख पाए जिसे मिटाने के लिए जनता ने उन पर भरोसा किया था। वे नहीं जान पाए कि ऑक्सीजन सप्लाई का पेमेंट महीनों से बकाया है।
Q. गोरखपुर में कब से इन्सेफलाइटिस के मामले सामने आ रहे हैं?
A. गोरखपुर में इन्सेफलाइटिस का पहला मामला 1977 में सामने आया था। यह दो तरह का है। पहला जापानी इन्सेफलाइटिस या जापानी बुखार, जो मच्छरों से फैलता है। जापानी बुखार का टीका विकसित कर लिया गया है। इसकी वजह से इलाज हो पा रहा है।
- दूसरा है गंदे पानी से होने वाला इन्सेफलाइटिस (जेईएस)। इसका टीका अभी नहीं खोजा जा सका है। इसका असर जुलाई से शुरू होता है और नवंबर के आसपास कम हो जाता है। इसके वायरस शरीर में पहुंचते ही तत्काल बुखार आता है। मेंटल या फिजिकल डिसएबिलिटी का भी खतरा रहता है।
- इन्सेफलाइटिस उन्मूलन अभियान के प्रमुख डॉ. आरएन. सिंह ने बताया, ''2000 से लेकर 2200 इन्सेफलाइटिस के मरीज गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में आते हैं। इसमें 450 से 500 के बीच मरीजों की मौत हर साल हो जाती है। अब तक इस बीमारी से यूपी के गोरखपुर समेत 12 ज़िलों में एक लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। साल 2016 में इन्सेफलाइटिस से होने वाली मौतों की संख्या 15 फीसदी बढ़कर 514 हो गई। यह आंकड़ा सिर्फ गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का है।''
बेबसी की दो कहानियां...
1# मरीज: सीओ के पैर पकड़ बोली मां- साहब, बॉडी दिला दो
- मेडिकल कॉलेज में एक के बाद एक लगातार हो रहीं मौतों के बीच हर ओर बेबसी का आलम था। यहां 9 दिन के एक बच्चे की भी मौत हुई। जब पिता ने बॉडी मांगी तो कहा गया कि अधिकारियों के जाने के बाद देंगे। इसी बीच, बच्चे की मां ने सीओ रचना मिश्रा के पैर पकड़कर कहा, 'साहब, बच्चा तो मर गया। अब उसकी बॉडी तो दिला दो।' बच्चे के पिता नंदलाल ने कहा, 'ऑक्सीजन की कमी से 9 दिन के बाद मेरा बच्चा मर गया।' करीब 4 घंटे बाद सीओ के कहने पर उन्हें बॉडी मिली।
2# दोस्त डॉक्टर्स से सिलेंडर लाते रहे डॉ. कफील
- ऑक्सीजन संकट के बीच कुछ डॉक्टर भी दिन-रात जूझते रहे। रात 2.00 बजे इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी डॉ. कफील खान अस्पताल पहुंचे। सुबह 7.00 बजे तक जब किसी बड़े अधिकारी और गैस सप्लायर ने फोन नहीं उठाया तो अपनी कार लेकर निकल पड़े। प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टर दोस्तों से मदद मांगी। कार से 12 सिलेंडर लाए। फिर एक कर्मचारी की बाइक पर एसएसबी के डीआईजी के पास पहुंचे। वहां से 10 सिलेंडर लाए। सिलेंडर ढोने के लिए एसएसबी ने ट्रक भी भेजा।
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