मिशाइल लगने के बाद भी 8 दोस्‍तों की जान बचाए थे शहीद गौतम, जानें पूरी कहानी

5 वर्ष पहले
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गोरखपुर. कारगिल में 4 अगस्त 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों से मुठभेड़ के दौरान एक मिशाइल शहीद लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग के दोस्त शिव के बंकर में जा घुसी। ऐसे में दोस्त को बंकर से निकालते समय दुश्मनों की एक और मिशाइल ले. गौतम गुरुंग के कमर के हिस्से पर जा लगी। खून से लहूलुहान होने के बावजूद वह अपने दोस्त और 8 अन्य साथियों को बचाने में सफल रहे। गौतम गुरुंग को बेस कैंप ले जाया गया। यहां 5 अगस्त की सुबह उनकी मौत हो गहई। घर के इकलौते चिराग थे ले. गौतम गुरुंग...


-शहीद गौतम गुरुंग के पिता रिटायर्ड ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग हैं।
-वीरमाता पुष्पलता गुरुंग के एकलौते बेटे और छोटी बहन मीनाक्षी त्यागी के इकलौते भाई थे।
-यह परिवार मूलरूप से नेपाल का रहने वाला है।
-पूरा परिवार करीब 100 वर्षों से भारत के देहरादून में ही रहता है।
-23 अगस्त 1973 में शहीद लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग का जन्म देहरादून में ही हुआ था।
-सेना में कमीशन प्राप्त करने के बाद पहली पोस्टिंग जम्मू में ही हुई थी।

शहीद गौतम गुरुंग ट्रस्ट से संवारा कइयों का जीवन

-शहीद ले. गौतम गुरुंग के ब्रिगेडियर पिता ने देहरादून में शहीद गौतम गुरुंग ट्रस्ट की स्थापना की है।
-गौतम के शहीद होने पर जो भी पैसा सरकार से मिला या फिर पेंशन की रकम मिली, उससे इस परिवार ने शहीद ले. गौतम गुरुंग के नाम से एक बॉक्सिंग क्लब देहरादून में संचालित किया।
-इस क्लब से प्रशिक्षण प्राप्त कर 25 युवक-युवतियां गवर्नमेंट जॉब में हैं।

आज भी रखी है भाई की राखी

-छोटी बहन ले. रजत त्यागी की पत्नी और गौतम गुरुंग की छोटी बहन मीनाक्षी आज भी उस राखी को संजो कर राखी है।
-जिस दिन कारगिल में भाई को मिशाइल लगी, उसी शाम भाई को भेजने के लिए राखी खरीदा था।
-वह अगले दिन 5 अगस्त को इसे पोस्ट करने वालीं थीं।
-तभी भाई के शहादत की खबर आ गई।

शहीद के पुष्पांजलि कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
ले. गौतम गुरुंग को 5 अगस्त उनकी शहादत दिवस पर गोरखपुर के कूड़ाघाट जीआरडी चौराहे पर स्थापित प्रतिमा पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में पूर्व पार्षद कूड़ाघाट संध्या पाण्डेय, शहीद ले. गौतम गुरुंग के पिता ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग, ब्रिगेडियर प्रभारी जीआरडी डिप्टी कमांडेंट कर्नल अनिल कुमार पुनिया, कमांडिंग ऑफिसर बीके वर्मा, 3/4 GR चिन्दिस रांची के सूबेदार मोहन गुरुंग, कर्नल वीके वर्मा, सूबेदार मेजर जस बहादुर गुरुंग, रिटायर्ड मेजर जनरल शिव जसवल और अन्य बटालियनों के सैन्य अधिकारी और जवान मौजूद रहे।
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