तस्वीर में: ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, जहां हुई थी प्रबंधक पुत्र की हत्या।
गोरखपुर. झंगहा इलाके के जंगल रसूलपुर नंबर-दो में विद्यालय प्रबंधक के पुत्र की हत्या मामले में पुलिस सुराग मिलने का दावा करती है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित के पास धमकी भरे फोन भी आते हैं। वहीं, वारदात को किन बदमाशों ने अंजाम दिया ये स्थानीय थाने की पुलिस से लेकर जिले के आला अधिकारियों तक को पता है। इसके बावजूद उक्त बदमाशों की गिरेबां तक उनके हाथ नहीं पहुंच पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से एक बदमाश सत्ता पक्ष से जुड़े जिला स्तर के एक नेता का भांजा है, इसलिए पुलिस अनजान बनी हुई है। दूसरी ओर, पुलिस प्रबंधक के स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका मां-बेटी को हिरासत में लेकर पूछताछ के बहाने मामले को खींचती जा रही है।
बताते चलें कि ब्रह्मापुर कस्बा निवासी जीउत बंधन कुशवाहा का जंगल रसूलपुर में आक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल के नाम से विद्यालय है। बीते रविवार यानि 21 सितंबर को वह विद्यालय में साफ-सफाई करने पहुंचे थे। चौरीचौरा स्थित सेंट्रल एकेडमी में दसवीं में दसवीं में पढ़ने वाला उनका चौदह वर्षीय बेटा विपिन सुबह करीब नौ बजे के विद्यालय पहुंचा और उनको खाना खाने के लिए घर भेजकर खुद वहीं रुक गया। भोजन कर कुछ देर बाद जब प्रबंधक अपनी पत्नी के साथ विद्यालय पहुंचे तो प्रथम तल के एक कमरे में बेटे की लाश मिली। सिर में गोली मारकर उसकी हत्या की गई थी।
प्रबंधक पुत्र की हत्या में इलाके के जिस दंबग का नाम आ रहा है। संदीप तिवारी उसका करीबी मित्र है। बताते हैं कि कुछ लोगों ने दबंग युवक को प्रबंधक के बेटे को गोली मारकर भागते समय देखा था, लेकिन उसका आतंक इतना अधिक है कि कोई उसका नाम लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। स्थानीय पुलिस भी दबंग को बचाते हुए ही छानबीन कर रही है। इसकी वजह उसका सपा के एक प्रभावशाली नेता का करीबी रिश्तेदार होना बताया रहा है।
कब और कैसे शुरू हुई रंगदारी मांगने की शुरुआत
जीउत बंधन कुशवाहा के मुताबिक, 31 दिसंबर 2013 की शाम छह बजे का वक्त था। वे पत्नी रीता कुशवाहा और बच्चों विपिन और सचिन के साथ स्कूल की पहली मंजिल पर बने कमरे में बैठे थे। एक मोटरसाइकिल पर सवार दो लोग आए और स्कूल गेट पर पिस्टल से फायर कर चले गए। तकरीबन 20 मिनट बाद
मोबाइल पर फ़ोन आया कि तीन लाख रुपए रंगदारी दे दो, वरना अंजाम बुरा होगा।
दूसरे दिन वे स्कूल के टीचर संदीप प्रजापति के साथ नई बाजार चौकी और झंगहा थाने जाकर शिकायत की। थानेदार आरके सिंह ने तहरीर ले ली, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद हर 20 दिन अथवा एक माह में रंगदारी देने के लिए फ़ोन आता था। वह व्यक्ति अपना नाम संदीप तिवारी बताता था। कई बार फोन आया, लेकिन लगा कि आवाज बदलकर कोई अन्य व्यक्ति भी उनसे संदीप तिवारी के नाम पर रंगदारी मांग रहा है। ये सिलसिला चलता रहा।
आगे पढ़िए रंगदारी की रकम तीन लाख से बढ़ाकर कर दी गई पांच लाख रुपए…