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मुंबई के रिसर्च सेंटर से यूपी की साइंटिस्‍ट लापता, भाई को भेजे अाखिरी मेल में सीनियर्स पर लगाए बड़े आरोप

यूपी के कुशीनगर की रहने वाली साइंटिस्‍ट बबिता सिंह ने ई-मेल में अपने सीनियर ऑफिसर्स से परेशान होकर सुसाइड करने की बात कही है।

Dainik Bhaskar

Jan 25, 2017, 12:07 PM IST
हॉस्टल में लगे सीसीटीवी में बबिता आखिरी बार 23 जनवरी को दिन में 1 बजे नजर आ रही हैं। (फाइल) हॉस्टल में लगे सीसीटीवी में बबिता आखिरी बार 23 जनवरी को दिन में 1 बजे नजर आ रही हैं। (फाइल)
कुशीनगर. भाभा रिसर्च सेंटर (BARC) की एक साइंटिस्ट मुंबई से लापता हाे गई हैं। भाई को किए ईमेल में उन्होंने अफसरों पर तंग करने का आरोप लगाया है। यह भी लिखा है कि रोज-रोज मरने से अच्‍छा है कि एक बार में खत्‍म कर लिया जाए। सीसीटीवी में 23 जनवरी को दिखीं बबिता..
- BARC में साइंटिफिक ऑफिसर बबिता सिंह ने अपने भाई को 23 जनवरी को ईमेल भेजा है, जिससे इस मामले का खुलासा हुआ।
- ईमेल में उन्होंने अपने सीनियर ऑफिसर्स पर तंग करने का आरोप लगाया है।
- हॉस्टल में लगे सीसीटीवी में बबिता आखिरी बार 23 जनवरी को दिन में करीब 1 बजे दिखाई दे रही हैं।
- बबिता का मोबाइल कमरे में मिला है। उन्होंने कमरा लॉक करने के बाद चाबी वॉर्डन काे दे दी थी।
- इस मामले में नवी मुंबई के नेरुल थाने में केस दर्ज किया गया है।
मां-भाई को बताई थीं दिक्कतें
- बबिता कुछ दिन पहले अपने भाई की शादी में गांव आई थीं, तब उन्होंने सीनियर्स के परेशान करने की बात मां को भी बताई थी।
- हालांकि, मां का कहना है कि वे समझ नहीं पाईं कि बेटी कितनी तकलीफ में है।
- बबिता के पिता किसान हैं और भाई दिव्यांग है। ऐसे में, वे भी समझ नहीं पा रहे थे कि बबिता की मदद कैसे की जाए।
ईमेल में लिखा- जिंदगी नर्क हो गई
- भाई को भेजे ईमेल में बबिता ने लिखा है, "इंस्‍टीट्यूट में आए मुझे करीब 5 साल हो गए। कभी नहीं सोचा था कि मेरा सपना इस तरह खत्‍म हो जाएगा। पहले दिन से जिंदगी नर्क हो गई।"
- "हर दिन मुझे टॉर्चर किया जाता है। हर मौके पर बस अपमानित किया जाता था।"
- "मुझे बिना किसी साइंटिफिक डायरेक्‍शन और डिस्‍कशन के कई एक्‍सपेरिमेंट पर काम करने को कहा गया।"
- "मेरे रिपोर्टिंग ऑफिसर के पास इतना वक्त नहीं होता था कि वे ये देखें कि क्‍या मेरे पास एक्‍सपेरिमेंट को पूरा करने के लिए पूरी इन्‍फॉर्मेशन है या नहीं।"
- "सभी केमिकल्‍स लॉक करके रखे जाते थे या लैब को सीनियर ऑफिसर के कंट्रोल में रखा जाता था।"
- "मुझे कोई डिस्‍कशन न करने और दूसरे साइंटिस्‍ट से सलाह नहीं लेने की सख्त चेतावनी दी गई थी।"
- "सिर्फ क्रिटिसाइज और ब्लेम किया जाता रहा। मेरी पर्सनल लाइफ को भी टारगेट किया गया।"
- "जैसा प्रेशर मेरे ऊपर था, उसे शब्‍दों में बयां नहीं किया जा सकता और कोई उसे समझ भी नहीं सकता।"
- "मैंने कई बार इस मुद्दे को उठाया, लेकिन उसका कोई हल नहीं निकला। मैं अपना सेक्‍शन चेंज करना चाहती थी, लेकिन उस रास्‍ते को भी बंद कर दिया गया।"
- "मैं खुद को इस हाल में नहीं देख सकती। मैं हर तरफ से अंधेरे में हूं। मैं अपने परिवार और दोस्‍तों से माफी मांगती हूं, जिन्‍हें मैं कोई जवाब दिए बिना पीछे छोड़ रही हूं।"
- "रोज-रोज के मरने से अच्‍छा है कि एक बार में खत्‍म कर लिया जाए।"
बबिता ने पढ़ाई के दौरान हमेशा किया टॉप
- बबिता उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में कुबेरस्थान के पास खन्हवार गांव की रहने वाली हैं। पिता विजय बहादुर सिंह किसान हैं।
- बबिता को पढ़ाने में परिवारवालों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। हाईस्कूल से लेकर मास्टर डिग्री तक बबिता ने हमेशा स्कूल में टॉप किया।
- बबिता की मेहनत का ही नतीजा रहा कि उनका सिलेक्शन BARC में हुआ।
- यहां वे लो लेवल रेडिएशन रिसर्च सेक्शन के रेडिएशन बायोलॉजी एंड हेल्थ साइंस डिविजन में साइंटिफिक ऑफिसर हैं।
बबिता ने ईमेल में लिखा है- रोज-रोज के मरने से अच्‍छा है कि एक बार में खत्‍म कर लिया जाए। (फाइल) बबिता ने ईमेल में लिखा है- रोज-रोज के मरने से अच्‍छा है कि एक बार में खत्‍म कर लिया जाए। (फाइल)
बबिता मुंबई में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में साइंटिफिक ऑफिसर हैं। (फाइल)। बबिता मुंबई में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में साइंटिफिक ऑफिसर हैं। (फाइल)।
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हॉस्टल में लगे सीसीटीवी में बबिता आखिरी बार 23 जनवरी को दिन में 1 बजे नजर आ रही हैं। (फाइल)हॉस्टल में लगे सीसीटीवी में बबिता आखिरी बार 23 जनवरी को दिन में 1 बजे नजर आ रही हैं। (फाइल)
बबिता ने ईमेल में लिखा है- रोज-रोज के मरने से अच्‍छा है कि एक बार में खत्‍म कर लिया जाए। (फाइल)बबिता ने ईमेल में लिखा है- रोज-रोज के मरने से अच्‍छा है कि एक बार में खत्‍म कर लिया जाए। (फाइल)
बबिता मुंबई में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में साइंटिफिक ऑफिसर हैं। (फाइल)।बबिता मुंबई में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में साइंटिफिक ऑफिसर हैं। (फाइल)।
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