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11वीं के तीन स्टूडेंड्स ने बनाया टैंक, जमीन-पानी-दलदल में फायर करने का दावा

5 वर्ष पहले
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गोरखपुर. नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया से प्रेरित होकर आर्मी पब्लिक स्कूल के 11वीं के तीन स्टूडेंट्स ने वेस्टेज मटेरियल से एक एंफिबिअन टैंक का माडल बनाया है। यह जमीन और पानी के साथ-साथ दलदल में भी चल सकता है। स्टूडेंट्स का दावा है कि ऐसा टैंक अभी तक विश्व के किसी देश ने नहीं बनाया गया है।
आसानी से छोड़ा जा सकता है गोला
- इस टैंक से आसानी से गोला छोड़ा जा सकता है।
- टैंक सड़क, समुद्र, नदी और दलदल में भी चल सकता है।
- टैंक दूर तक मार करने में भी सक्षम होगा.
ऐसा फायर करता है गोला
- टैंक के अगले हिस्से पर स्टूडेंट्स ने एक प्लास्टिक की बॉल को फिक्स किया।
- टैंक के मिडिल होल में कैल्शियम कार्बाइड डाला। उसपर उन्होंने पानी डाला।
- पानी और कैल्शियम कार्बाइड के रिएक्शन से बनी एसिटिलीन गैस ने गोले को फायर कर दिया।
- वह चाहते हैं कि वैज्ञानिक उनके मॉडल पर काम करें।
ये लगे हैं वेस्ट मटेरियल
- कोल्ड ड्रिंक की दो केन।
- पुराना आर्मी रंग का दो कैनवास का कपड़ा।
- प्लास्टिक के दो फैन।
- दो मोटर।
- 9 वोल्ट की एक मूविंग मोटर।
- प्लास्टिक के दो पहिए।
- बैडमिंटन कोक का खाली ड्रम।
- कुछ वायर का प्रयोग किया है।
एंफिबिअन कार देखकर आया आइडिया
स्टूडेंट्स का कहना है कि एंफिबिअन टैंक का मॉडल बनाने की प्रेरणा उन्हें मेक इन इंडिया प्रोग्राम और एंफिबिअन कार देखकर आया। उन्होंने इस टैंक को पानी के एक टब और जमीन के साथ दलदल में भी चलाकर दिखाया। उन्होंने यह भी दिखाया कि टैंक से किस तरह से गोला फायर होगा।
आर्मी में हैं स्टूडेंट्स के पिता
आर्मी पब्लिक स्कूल की टीचर्स अनीता रावत और बंदना मिश्रा ने बताया कि ये तीनों स्टूडेंट्स क्रिएटिव हैं। स्कूल में भी ये खाली समय में कुछ न कुछ करते रहते हैं। अंकित के पिता अतुल राय मणिपुर में, अक्षय के पिता पठानकोट में आर्मी बेस कैंप में हवलदार हैं जबकि तुषार के पिता वीरेंद्र कुमार जीआरडी गोरखपुर में नायब सूबेदार हैं। पठानकोट हमले के समय अक्षय के पिता बेस कैंप में ही थे। वहीं, 11वीं के स्टूडेंट्स अमित, अक्षय और तुषार ने बताया कि उन्हें इस मॉडल को बनाने में 500 रुपए खर्च किए हैं।
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