साल 1994 में गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी बनाए गए योगी आदित्यनाथ की फाइल फोटो।
गोरखपुर. बीजेपी के फायर ब्रांड नेता और गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ के महंत बन गए। रविवार को उनका राजतिलक किया गया। नाथ पंथ संप्रदाय के पांच महंतों ने विधिवत उनका अभिषेक किया। राजतिलक के बाद आदित्यनाथ के नाम के आगे 'महंत' जुड़ गया। इसके पहले साल 1994 में गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में अजय सिंह विष्ट उर्फ आदित्यनाथ का राजतिलक हुआ था। उत्तराधिकारी बनने के बाद उनके गुरु ने उनका नाम योगी आदित्यनाथ रख दिया।
महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने 1998 में सबसे कम उम्र का सांसद बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने 'हिंदू युवा वाहिनी' का गठन किया, जो हिंदू युवाओं को धार्मिक बनने के लिए प्रेरणा देती है। महंत अवैद्यनाथ का गोरखपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में काफी प्रभाव था। चार बार सांसद रहे अवैद्यनाथ ने 1998 में योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक वारिस बनाया था। योगी तब से गोरखपुर का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।
कौन बनता है महंत
गुरु गोरखनाथ जी के प्रतिनिधि के रूप में सम्मानित संत को महंत की उपाधि से विभूषित किया जाता है। इस मंदिर के प्रथम महंत श्री वरद्नाथ जी महाराज कहे जाते हैं, जो गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य थे। वर्तमान समय में महंत श्री अवैद्यनाथ जी महाराज गोरक्ष पीठाधीश्वर के पद पर आसीन हैं।
जानिए कैसे दी गई महंत अवैद्यनाथ को समाधि
11:12:- गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी नाथ पंथ के संतो के नेतृत्व में ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंद अवैद्यनाथ के शांत शरीर तक पहुंचे।
11:15:- नाथ पंथ सहित सभी पंथों के गुरूमुखी संतों की पूजा-अर्चना के बाद बह्मलीन पीठाधीश्वर की समाधि यात्रा शुरू हुई। हजारों की संख्या में चल रहे भक्त ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, बाबा जी का नाम रहेगा’, 'पूज्य महंतजी अमर रहे' का जयघोष कर रहे थे।
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