गोरखपुर. आजकल राजनितिक फिजां जातिगत सम्मेलनों की है, कहीं ब्राह्मण सम्मलेन, कहीं क्षत्रिय सम्मलेन। देखा जाये तो सम्मेलनों में चहरे जरुर बदल जा रहे हैं लेकिन कंटेंट और उद्देश्य वही है, जाति के विकास के नाम पार उस जाति के वोट बैंक पर कब्ज़ा करना । इसी क्रम में गुरुवार को यदुकुल सम्मलेन का आयोजन हुआ। यह सम्मलेन कई मायनों में अलग था। इसमें यादव समाज के जानेमाने लोगों को एकत्र करने के अलावा यदुकुल धाम और विश्व में सबसे ऊंची श्रीकृष्ण की प्रतिमा लगाने की घोषणा हुयी।
माना जा रहा है कि इस सम्मलेन के बहाने पूर्वांचल के पॉवर सेण्टर माने जाने वाले योगी आदित्यनाथ के किले में सेंध लगाने की तैयारी है। यदुकुल धाम के बहाने सपा अपने यादव वोट बैंक को तो संगठित करेगी ही और साथ ही अपने सेक्युलर चहरे को बरकरार रखते हुए यदुकुल के बहाने श्रीकृष्ण के नाम पर अन्य हिन्दू जातियों में अपनी पैठ बनाएगी। गौरतलब है कि गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ कि हिन्दू वोटों में अच्छी पकड़ है और भाजपा को यहाँ जो जनाधार मिलता है वह भी इसी कारण है।
पूरे प्रदेश में यादवों को सपा का परम्परागत वोट बैंक माना जाता है. लेकिन पूर्वांचल खासतौर पर गोरखपुर और आसपास के जिले इस मामले में अपवाद हैं। पूरे गोरखपुर मंडल में सपा का एक भी यादव विधायक नहीं हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम भी इस बात की गवाही दे रहे हैं। पूरे प्रदेश में सपा को बहुमत मिला लेकिन गोरखपुर मंडल में यह वोट बैंक बंट गया, जिससे यहाँ सपा को उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले। अगर बात केवल गोरखपुर जिले में चुनाव परिणाम की बात की जाए तो यहां पिपराइच की एक मात्र सीट सपा के खाते में गयी।
अधिकतर सीटों पर पार्टी दूसरे स्थान पर रही। इससे पहले गोरखपुर में सपा की कुल तीन सीटें थीं। बीते विधान सभा चुनाव में योगी के समर्थन से मंडल मे 3 यादव उम्मीदवार खड़े हुए थे जिनमे से गोरखपुर ग्रामीण सीट से विजय बहादुर यादव विजयी रहे। जबकि ब्रिजेश यादव कैम्पियरगंज में और विजयी यादव चिल्लूपार में दूसरे नंबर पर रहे यहाँ भी सपा के हाथ निराशा ही लगी।
गुरुवार को आयोजित यदुकुल सम्मलेन में सपा के नेताओं का ही बोलबाला रहा और सभी ने मंच से यादव समाज की एकजुटता पर बल दिया। यहाँ तक कि सम्म्लेलन में जय समाजवाद और जय अखिलेश यादव के नारे भी लगे। यहाँ तक कि एक वक्ता सन्तु प्रसादने यादव समाज की एकजुटता के लिए हुए प्रयासों की तुलना मोहम्मद गौरी के आक्रमणों से करते हुए कहा कि हम कई प्रयासों में विफल रहे है, लेकिन अब हमें एक होना होगा।
सम्मलेन में ही यादव समाज के लिए श्रीकृष्ण सम्मान की शुरुआत भी हुयी। पहला श्रीकृष्ण सम्मान पर्वतारोही एवेरेस्ट विजेता संतोष यादव और स्वर्गीय शारदानंद चंचल को दिया गया। साथ ही गोरखपुर देवरिया बाईपास पर 5 एकड़ के क्षेत्रफल में यदुकुल धाम की स्थापना करने के घोषणा की गयी। यही नहीं यहाँ विश्व में सबसे ऊंची श्रीकृष्ण की प्रतिमा लगाने की भी घोषणा की गई, जिसकी ऊंचाई 121 फीट होगी।
इसके पीछे के राजनीतिक उद्देश्य से इनकार करते हुए यदुकुल सम्मलेन के आयोजक कालीशंकर ने कहा कि पॉलिटिकल इंटरेस्ट कहाँ नहीं होता? हम तो गोरखपुर को एक धार्मिक पर्यटन स्थली के रूप में विकसित करना चाहते है। श्रीकृष्ण को लोकतंत्र का सबसे बड़ा प्रतीक बताए हुए उन्होंने कहा कि मथुरा के बाहर अगर श्रीकृष्ण की प्रातिमा विराजमान होते हैं यह उनके सभी को उनके आदर्शों और व्यक्तित्व को समझने का मौका देगी।
वहीँ योगी आदित्यनाथ से इस मसले पर जब प्रातिक्रिया ली गयी तो उन्होंने इसे सपा का पॉलिटिकल स्टंट बताया। उन्होंने कहा कि इस यदुकुल सम्मलेन से भी वही नतीजा निकलेगा जो अन्य जातियों के नाम पर पार्टियों के सम्मलेन में निकला है। उन्होंने सपा पर यादवों की अनदेखी करने का आरोप लगते हुए कहा कि यदुकुल सम्मलेन आयोजित करने से सपा द्वारा अपमानित यादव समाज का सम्मान कभी वापस नहीं आएगा।
उन्होंने बांसी में एक यादव बिरादरी की नाबालिग बच्ची से रेप की घटना का हवाला देते हुए कहा कि बच्ची को तो न्याय नहीं मिला लेकिन यादव बिरादरी 6 बेगुनाह के युवकों को पुलिस ने हत्या का मुलजिम बना दिया। जबकि बलात्कार का आरोपी भागते वक़्त हैण्डपंप पर गिर गया और उसकी मौत हो गयी थी। इससे ज्यादा एक बिरादरी के लिए अपमान की बात क्या हो सकती है। इस तरह के प्रयास पहले भी हुये हैं, उनका नतीजा जनता के सामने है।