गोरखपुर. गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी के नाम से हर साल छात्रों को विशिष्ट छात्रवृत्ति देंगे। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में उन्होंने अवैद्यनाथ जी के जीवन संघर्ष के बारे में लोगों को बताया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मलीन महंत के बचपन में ही उनके माता-पिता और आठ साल की उम्र में दादी का निधन हो गया था। इसके बाद वे सांसारिकता से विरत हो गए। इस दौरान उनका संपर्क साधना में सिद्ध सन्यासी निवृत्तिनाथ जी और दर्शन के विद्वान योगी शांतिनाथ जी से हुआ। इस कारण पूज्य महंत जी के विराट व्यक्तित्व में योग साधना और दार्शनिकता का अद्भुत समावेश था।
आदित्यनाथ ने एक पुरानी कहानी को याद करते हुए बताया कि एक बार सामान्य जांच से लौटते समय महंत जी उनके साथ दिल्ली में एक भक्त के घर गए। वहां पर वे थोड़ी देर के लिए बेहोश हो गए। आदित्यनाथ ने महंत जी को उठाकर कुर्सी पर बिठा दिया। सामान्य होने पर उन्होंने आदित्यनाथ से वजन पूछा तो उन्होंने बताया 70-71 किलो। तब उन्होंने बड़ी आत्मीयता से उत्तर दिया कि उनका वजन तो 80 किलो है। अब लगता है कि तुम मेरा वजन उठा सकते हो।
मेदांता अस्पताल की बताई बात
मेदांता अस्पताल की एक बताते हुए उन्हें बताया कि डाक्टरों द्वारा याददाश्त परीक्षण के दौरान उनसे पूछा गया कि आपका सबसे विश्वासपात्र कौन है? तो उन्होंने आंखों-आंखों में उन्हें खोजा और डाक्टरों से बोला कि यही मेरा सबसे विश्वासपात्र है। अब जो पूछना हो इसी से पूछना।
ये थे उपस्थित
श्रद्धांजलि सभा को दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेशदास जी, गोरखधाम आश्रम मुंबई के महंत गुलाबनाथ जी, जुनागढ़ के महंत शेरनाथ जी, 12 के महंत किशननाथ जी, 18 के महंत सोमवारनाथ जी, मेंगलूर कर्नाटक के महंत राजा संध्यानाथ जी, जालौर के महंत पीर गंगानाथ जी, कटक के महंत शिवनाथ जी, हरिद्वार के महंत शांतिनाथ जी, पुष्कर के महंत डॉ. स्वामी रामेश्वरानंद हरि जी, महंत रूपनाथ जी, कच्छ के महंत देवनाथ जी, महंत अनंतनाथ जी महाराज, महंत प्रबोधानन्द गिरी जी समेत अन्य संतो ने संबोधित किया।
तस्वीर में: महंत आदित्यनाथ।