अरबों खर्च के बाद भी एडवांस्‍ड डैम से नहीं मिल रहा किसानों को पानी, ये है वजह

6 वर्ष पहले
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झांसी. बुंदेलखंड के विकास के लिए अरबों रुपए किस तरह बर्बाद किए जा रहे हैं, इसका ताजा उदाहरण ललितपुर का कचनौदा डैम है। 4 अरब 16 करोड़ 67 लाख की लागत से बने इस डैम का मकसद किसानों की जमीनें सिंचित करने का था। लेकिन इसके बनने के एक साल बाद भी खेतों को एक बूंद भी पानी नहीं मिला है। डैम के गेट तकनीक के जरिए लखनऊ से खोले जा सकते हैं। टेक्‍नोलॉजी के मामले में इस तरह का ये यूपी का पहला डैम है। डैम बन गया है पर्यटन स्‍थल...
- किसानों ने कहा कि डैम का निर्माण पास ही बने बजाज पॉवर प्लांट के लिए किया गया है। पूरा पानी वहीं जाता है।
- डैम के लिए भूमि देने वाले किसानों को पानी तो नहीं मिल सका, लेकिन सरकार ने शहर से करीब 20 किमी दूर बने इस डैम को पर्यटन स्थल के रूप में जरूर विकसित कर दिया।
- यहां बोटिंग की व्यवस्था है, कृत्रिम पहाड़ बनाए गए हैं, झूले-बेंच लगाई गई हैं।
पार्क में गायें खाती हैं महंगी घास
- डैम की उपयोगिता समझने पहुंची dainikbhaskar.com की टीम को पार्क में दर्जन भर गायें घूमते दिखी। वे यहां घास चर रही थीं।
- बता दें, कई हेक्टेयर में फैले पार्क में कई ट्रक भरकर घास मंगवाकर लगाई गई है। एक ट्रक घास की कीमत 65 हजार रुपए थी।
- यहां बच्चों के लिए झूले लगे हैं। एक ट्वॉय ट्रेन भी स्थापित की गई है। पार्क में एंट्री के लिए 30 रुपए टिकट है।
- डैम के पास रहने वाले संजय यादव कहते हैं कि इतने बड़े पार्क में 30 से 40 लोग ही घूमने आते हैं। पार्क में गायें महंगी घासें खाती हैं।
- राजवारा गांव के आशीष दीक्षित कहते हैं कि बुंदेलखंड में जहां किसानों के पास चारा तक खिलाने को जानवरों को खिलाने को नहीं हैं, उसी बुंदेलखंड में गाय 65 हजार रुपए प्रति ट्रक मंगाई गई घास खा रही है।
ये है डैम बनने की कहानी
- दरअसल, डैम बनाने के लिए केंद्र सरकार के त्वरित सिंचाई प्रबंधन कार्यक्रम (एआईबीपी) के तहत करोड़ों रुपए का अनुदान भी लिया गया।
- जानकार बताते हैं कि एआईबीपी तभी पूर्ण अनुदान देता है, जब निर्माण समय पर पूरा हो।
- अगर ऐसा नहीं होता है तो अनुदान ऋण में बदल जाता है।
- डैम का निर्माण समय पर पूरा नहीं हो सका। ऐसे में विपरीत परिस्थिति से बचने के लिए सिंचाई निर्माण खंड (तृतीय) ने बांध का निर्माण पूरे होने की झूठी रिपोर्ट शासन को भेज दी।
- गौर करने वाली बात ये है कि नहर का निर्माण हुआ है या नहीं, इसकी जांच किए बिना ही केंद्र ने डैम को हरी झंडी दे दी।
- डैम से किसानों को पानी देने के लिए नहर अब तक नहीं बनाई जा सकी है।
- जबकि पिछले साल सपा सरकार के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने इसका उद्घाटन भी कर दिया।
- बता दें, डैम ललितपुर से करीब 20 किमी दूर कचनौदा में सजनाम नदी पर बना है।
- 2010 से बनना शुरू हुए इस डैम को मार्च 2012 तक बनाया जाना था, लेकिन इसे बढ़ाकर 2014 कर दिया गया।
- इसे 2015 में बना लिया गया, लेकिन किसानों के फायदे के लिहाज से ये अधूरा ही रह गया।
इतनी जमीन को फायदा पहुंचाने का था लक्ष्य
- डैम से एक हजार हेक्टेयर से ज्‍यादा भूमि को सिंचाई उपलब्ध कराने का लक्ष्य था।
- इसके लिए 4 किमी लंबी नहर बनानी थी, जो अब तक नहीं बन पाई। अभी कच्ची नहर ही बनी है।
- इसके लिए भी किसानों की जमीन अधिग्रहित कर ली गई। नहर के लिए जमीन अधिग्रहित उद्घाटन के बाद की गई।
- बता दें, डैम के लिए 10 गांवों 2, 371 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई।
- सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जिन्हें मुआवजा नहीं मिल पाया है।
पॉवर प्लांट को जाता है पानी
- डैम के पास ही बजाज पॉवर प्लांट बना है। शर्त के मुताबिक, पॉवर प्लांट को डैम में आने वाला 40 फीसदी पानी सप्लाई करना होता है।
- इसके लिए सिंचाई विभाग और पॉवर प्लांट के बीच एग्रीमेंट है, जबकि 60 फीसदी पानी किसानों के लिए है।
- किसान बताते हैं कि उन्हें तो अब तक 30 फीसदी भी फायदा नहीं मिला है।
- ललितपुर के जैलवारा गांव के इंद्रपाल के मुताबिक, अक्टूबर 2015 में डैम को भरा गया।
- इसी महीने में पानी रहने के कारण डूब क्षेत्र वाले किसानों की खरीफ की फसल बोई ही नहीं जा सकी।
- किसानों को उम्मीद थी कि कुछ महीने में रबी की फसल आते-आते बांध का पानी इस्‍तेमाल में आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
- गांव के मनोज तिवारी कहते हैं कि रबी की फसल आने तक बांध का पूरा पानी पॉवर प्लांट कंपनी को उपलब्ध करा दिया गया।
- किसान अपनी जमीन की सिंचाई का पानी लुटते देखते रहे, फसल सूख गई।
- मुआवजे को लेकर आंदोलन कर रहे रविंद्र परमार बताते हैं कि डैम से किसानों को नुकसान ही हुआ है।
- केवल पार्क को सजा दिया गया, घास लगा दी गई है। लेकिन बांध जिस काम के लिए है, वो उद्देश्य पूरा ही नहीं हुआ।
- अब तक जितना भी पानी आया, पूरा प्लांट को ही दे दिया गया।
क्‍या कहना है डीएम का?
- ललितपुर के डीएम डॉ. रूपेश कुमार के मुताबिक, अभी इस संबंध में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं है।
- शासन से जैसे ही पैसा आएगा, किसानों को दे दिया जाएगा।
- पानी पॉवर प्लांट को देने को लेकर कहते हैं कि मामले में उनसे कुछ किसानों ने शिकायत की थी।
- इसके बाद उन्‍होंने पावर प्लांट से भी बात की।
- पॉवर प्लांट को उतना ही पानी दिया गया, जितना उन्हें जरूरत है।
- भारतीय किसान यूनियन के बुंदेलखंड प्रभारी शिवनारायण सिंह परिहार बताते हैं कि सेंट्रल वाटर कमीशन के बुंदेलखंड रीजन के निदेशक कहते हैं कि सिंचाई विभाग ने जल्द ही नहर बनाने को कहा है।
- वहीं सिंचाई विभाग के मंडलीय अधीक्षण अभियंता कहते हैं कि नहर बनाई जा रही है, लेकिन किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है, न ही होता दिख रहा है। नेता विकास की बातें करते हैं।
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