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इस पुलिसवाले की कहानी सुन आप भी कह उठेंगे- वर्दी वाला हो तो ऐसा

झांसी के डीआईजी ऑफिस में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव अपने खाली समय में सोशलवर्क करते हैं।

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2017, 09:00 PM IST
झांसी में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव अपने खाली समय में सोशलवर्क करते हैं। झांसी में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव अपने खाली समय में सोशलवर्क करते हैं।
झांसी. यहां डीआईजी ऑफिस में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव अपने खाली समय में सोशलवर्क करते हैं। इस कारण एरि‍या में लोग उन्‍हें पुलि‍स वाले से ज्‍यादा सोशल वर्कर के रूप में जानते हैं। उनके वि‍चारों से इन्‍स्‍पायर होकर कुछ युवा उनसे जुड़ गए हैं और एक टीम बनाई है। इस टीम के लोग हर दि‍न 40-50 बच्चों को फ्री ट्यूशन देते हैं। साथ ही समय-समय पर जरूरतमंदों की हेल्‍प करते हैं। बचपन में जि‍तेंद्र की हरकतों से परेशान थे माता-पि‍ता...
-जितेंद्र के बचपन के दोस्त राजेंद्र बताते हैं कि बचपन से आईएएस बनने का सपना देखने वाले जितेंद्र यादव महज 20 साल की उम्र में पुलिस डिपार्टमेंट में भर्ती हो गए। उनकी नौकरी के 10 साल बीत गए हैं।
-बचपन में जितेंद्र यादव कभी घर का बिस्तर दान कर देता था तो कभी लोगों की मदद के लिए घर से दो-तीन दिन तक बाहर रहता था। इससे उसके माता-पि‍ता परेशान रहते थे।
-सि‍पाही बनने के समय वह बीएससी फर्स्‍ट ईयर के स्टूडेंट थे।
-जितेंद्र शादीशुदा होने के साथ दो बच्चों के पिता भी हैं।
-वे ड्यूटी के बाद लावारिश और गरीबों की मदद करने के लिए निकल पड़ते हैं।
-अपने साथियों और पुलिस अधिकारियों से चंदा इकट्ठा करके गरीबों की मदद करते हैं।
एक सपने ने बदल दी जिंदगी
-जितेंद्र बताते हैं, ‘एक बार मैं अपने घर में सो रहा था तभी मुझे लगा कि भगवान मेरे सपने में दर्शन देने के लिए आए हैं।’
-‘उस दिन से मुझे भगवान के प्रति पूरी आस्था हो गई है। इसी लिए अपनी ड्यूटी के बाद गरीबों के बीच जाकर उनकी मदद करने लगा।’
-'मुझे लगता है हर गरीब के अंदर भगवान हैं। जबतक जिंदा रहूंगा इसी तरह बेसहारा लोगों की मदद करता रहूंगा।'

पिता की रजाई कर दी थी दान
-जितेंद्र के पिता देव सिंह यादव भी पुलिस विभाग में थे। फिलहाल अब वह रिटायर हो चुके है और घर पर ही रहते हैं।
-देव सिंह यादव बताते है, 'जितेंद्र के अंदर बचपन से ही समाज सेवा करने की भावना थी।'
-'मैं और मेरी पत्नी हमेशा जितेंद्र से परेशान रहते थे। हमारे जितेंद्र के अलावा पांच बच्चे और हैं।'
-‘पुलिस की नौकरी में छह बच्चों का पेट पालना मुश्किल होता है उसमें जितेंद्र की अजीब हरकतें थी।’
-‘एक बार जब मैं ड्यूटी से लौटकर आया और अपना बिस्तर बिछाने लगा, तो देखा कि घर में मेरी रजाई नहीं है।’
-‘जब मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि मेरी रजाई कहां गई तो उसने बताया कि जितेंद्र ने एक बाबा को दान कर दी है।’
-‘मैने जितेंद्र की बहुत डांट लगाई लेकिन उसकी ऐसी आदतें कम नहीं हुई। कभी घर में रखा आटा, नमक यहां तक कि माचिस की डिब्बी भी किसी न किसी को दे आता था।’
-‘अब जब यह नौकरी करने लगा है तो अपना आधा वेतन ही दान कर देता है।’
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़ें जितेंद्र से इंस्पायर हुए कई यूथ...
उनके काम से कई युवा इन्‍स्‍पायर होकर उनसे जुड़ चुके हैं। उनके काम से कई युवा इन्‍स्‍पायर होकर उनसे जुड़ चुके हैं।
जितेंद्र से इंस्पायर हुए कई यूथ
-निहाली वर्मा(18) बताती हैं, ‘मैं महारानी वीरांगना लक्ष्मीबाई कॉलेज में बीएससी फर्स्‍ट ईयर की स्‍टूडेंट हूं। मैं एक प्राइवेट स्कूल में टीचिंग कर रही थी।’
-‘एक बार जब मैं प्रदर्शनी मैदान से निकल रही थी तो देखा कि कुछ मलिन बस्ती के बच्चों को वर्दी पहने एक सिपाही पढ़ा रहा है।’
-‘यह देख मुझसे रहा नहीं गया और मैं जितेंद्र के पास आई और उनके बारे में पूछने लगी।'
-'जितेंद्र की बातें सुनकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ।’
-‘उस दिन से पांचवें दिन मैंने अपना जॉब छोड़ दिया और दोबारा उसी स्थान पर गई और जितेंद्र से उनकी टीम में शामिल करने के लिए कहा।’
-'मेरे बाद मेरी सहेली तान्या सेठ ने भी अपना जॉब छोड़ दिया और इन बच्चों को म्यूजिक सिखाने लगी।'
 
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़ें बुजुर्ग की कैसे मदद की...
 
जि‍तेंद्र जरूरतमंदों की हेल्‍प करते हैं। जि‍तेंद्र जरूरतमंदों की हेल्‍प करते हैं।
बुजुर्ग की ऐसे की मदद
-जि‍तेंद्र को जानने वाले कहते हैं कि‍ करीब एक महीने पहले शहर के गोंदू कंपाउंड पार्क में एक थका-हारा बुजुर्ग अपने जीवन के अंतिम लम्हें बिताने के लिए पहुंचा।
-दिन धूप में बैठकर बिताता था और रात में अपने झोले से फटे-पुराने कपड़े निकालकर उनका बि‍स्तर बनाकर खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर था।
-जब उस बुजुर्ग के बारे में जितेंद्र यादव को पता चला तो वह अपने कुछ सहयोगियों के साथ वहां पहुंचे और उस बुजुर्ग से उसके गांव का पता पूछा लेकिन उम्र के साथ-साथ उसकी याददाश्त भी उसका साथ छोड़ चुकी थी और वह अपने बारे में कुछ नहीं बता पाया।
-इसके बाद जितेंद्र ने कई लोगों से जानकारी की तब कहीं जाकर पता चला कि बुजुर्ग का नाम पूरन पाल है और वह एमपी का रहने वाला है।
-बुजुर्ग की अपनी कोई औलाद नहीं थी, भतीजों के पास रहता था।
-भतीजे लालची थे। उन्होंने पूरन की पूरी खेती अपने नाम करवा ली और उसे वृंदावन के लिए ट्रेन पर बैठा दिया था।
-ट्रेन में बैठे पूरन पाल वृंदावन नहीं जाकर झांसी स्टेशन पर उतर गए और कई दिनों से यहां भटक रहे थे।
-पूरी कहानी सुन सिपाही जितेंद्र यादव ने उन्हें 11 दिसंबर को वृद्धाश्रम भेज दिया।
 
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़ें गैर के लिए निभाया बेटे का फर्ज...
 
एक बुजुर्ग की मौत के बाद जि‍तेंद्र ने उनका अंति‍म संस्‍कार कि‍या। एक बुजुर्ग की मौत के बाद जि‍तेंद्र ने उनका अंति‍म संस्‍कार कि‍या।
गैर के लिए निभाया बेटे का फर्ज
-पूरन पाल जब वृद्धाश्रम पहुंचे तो उनकी देखभाल तो अच्छी तरह से हो रही थी लेकिन उनकी तबियत लगातार बिगड़ती गई।
-जितेंद्र ने इस बीच कई बार उनका इलाज भी करवाया लेकिन 17 जनवरी को पूरन पाल ने अपने जीवन की अंतिम सांस ली।
-पूरन पाल की मौत की सूचना जब जितेंद्र को मिली तो उन्होंने हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार एक बेटे का फर्ज अदा करते हुए मुखाग्नि दी।
-29 जनवरी को जितेंद्र ने अपने साथियों के सहयोग से उस बुजुर्ग की त्रयोदशी मनाई जिसमें करीब 200 लोगों को खाना खिलाया।
 
 
आगे की स्‍लाइड्स में पढ़ें स्ट्रीट चिल्ड्रेंस को दे रहे फ्री एजुकेशन...
 
गरीब बच्‍चों की मदद के लि‍ए हमेशा आगे रहते हैं। गरीब बच्‍चों की मदद के लि‍ए हमेशा आगे रहते हैं।
स्ट्रीट चिल्ड्रेंस को दे रहे फ्री एजुकेशन
-सिपाही जितेंद्र यादव और उनकी पूरी टीम झांसी के प्रदर्शनी मैदान में 40-50 बच्चों को रोज फ्री ट्यूशन देते है।
-जितेंद्र की टीम की सदस्य नेहाली वर्मी और तान्या सेठ पढ़ाने के अलावा बच्चों को संगीत सिखाती हैं।
-आपको बतादें कि जिन बच्चों को जितेंद्र यादव फ्री ट्यूशन दे रहे हैं उन सभी बच्चों के माता-पिता भीख मांगकर अपना भरण पोषण करते हैं।
 
गरीब बच्चों के साथ मनाया था रिपब्लिक-डे
-एक ओर सभी पुलिसकर्मी रिपब्लिक-डे के मौके पर पुलिस लाइन में परेड का आनंद ले रहे थे वहीं जितेंद्र यादव गरीब बच्चों के साथ झंडा फहरा रहे थे।
-जितेंद्र यादव ने बच्चों को देशभक्ति गीत भी गाकर सुनाए।
-सिपाही के साथियों ने बच्चों को मिठाईयां और बिस्किट बांटे।
 
 
आगे की स्‍लाइड्स में देखें फोटोज...  
 
जि‍तेंद्र की टीम के लोग हर दि‍न 40-50 बच्‍चों को फ्री में एजुकेशन देते हैं। जि‍तेंद्र की टीम के लोग हर दि‍न 40-50 बच्‍चों को फ्री में एजुकेशन देते हैं।
बच्‍चों को पढ़ाते टीम के मेंबर। बच्‍चों को पढ़ाते टीम के मेंबर।
बच्‍चों को फ्री एजुकेशन दी जाती है। बच्‍चों को फ्री एजुकेशन दी जाती है।
अपनी टीम के साथ जि‍तेंद्र। अपनी टीम के साथ जि‍तेंद्र।
जि‍तेंद्र की टीम के मेंबर। जि‍तेंद्र की टीम के मेंबर।
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झांसी में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव अपने खाली समय में सोशलवर्क करते हैं।झांसी में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव अपने खाली समय में सोशलवर्क करते हैं।
उनके काम से कई युवा इन्‍स्‍पायर होकर उनसे जुड़ चुके हैं।उनके काम से कई युवा इन्‍स्‍पायर होकर उनसे जुड़ चुके हैं।
जि‍तेंद्र जरूरतमंदों की हेल्‍प करते हैं।जि‍तेंद्र जरूरतमंदों की हेल्‍प करते हैं।
एक बुजुर्ग की मौत के बाद जि‍तेंद्र ने उनका अंति‍म संस्‍कार कि‍या।एक बुजुर्ग की मौत के बाद जि‍तेंद्र ने उनका अंति‍म संस्‍कार कि‍या।
गरीब बच्‍चों की मदद के लि‍ए हमेशा आगे रहते हैं।गरीब बच्‍चों की मदद के लि‍ए हमेशा आगे रहते हैं।
जि‍तेंद्र की टीम के लोग हर दि‍न 40-50 बच्‍चों को फ्री में एजुकेशन देते हैं।जि‍तेंद्र की टीम के लोग हर दि‍न 40-50 बच्‍चों को फ्री में एजुकेशन देते हैं।
बच्‍चों को पढ़ाते टीम के मेंबर।बच्‍चों को पढ़ाते टीम के मेंबर।
बच्‍चों को फ्री एजुकेशन दी जाती है।बच्‍चों को फ्री एजुकेशन दी जाती है।
अपनी टीम के साथ जि‍तेंद्र।अपनी टीम के साथ जि‍तेंद्र।
जि‍तेंद्र की टीम के मेंबर।जि‍तेंद्र की टीम के मेंबर।
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