पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Buffaloes Number More Than People Mulayam Singh Yadav Mianpuri Uttar Pradesh

लालू की बेटी के ससुराल में दूध बेचने वाले का हुक्का-पानी हो जाता है बंद

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
फाइल फोटो: अपने दामाद तेज प्रताप के साथ लालू यादव।
कानपुर/मैनपुरी. राजद सुप्रीमो लालू यादव के होने वाले छोटे दामाद तेज प्रताप सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र के अंजनी गांव में लोगों से ज्यादा गाय-भैंस की संख्या है। यहां की कुल जनसंख्या तीन हजार है, जबकि गाय-भैंस की संख्या पांच हजार से ज्यादा है। यहां हर घर में बाल्टी भर-भरकर दूध होता है। खपत से ज्यादा दूध होने पर भी ग्रामीण इसे बेच नहीं सकते हैं। दूध बेचने पर उनका हुक्का-पानी बंद करते हुए उन्हें गांव से निकाल दिया जाता है।
लालू यादव की सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी की शादी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के पोते तेज प्रताप सिंह से तय हुई है। वे मैनपुरी से सांसद हैं। उनके संसदीय क्षेत्र का अंजनी गांव जिला मुख्यालय से पांच किमी दूरी पर है। पिछले कई वर्षों से इसकी पहचान फौजियों के गांव के रूप में है। तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में यादवों की संख्या सबसे ज्यादा है। यहां के ज्यादातर युवा फौज और पुलिस की नौकरी में हैं। वहीं, गांव में रहने वाले युवा खेती करते हैं। खपत से ज्यादा दूध होने पर भी उसे बेचने की बात कोई नहीं करता। हालांकि, कुछ लोगों ने इसकी शुरुआत भी करनी चाही तो उन्हें फायदे की जगह नुकसान ही हुआ।
पूत के समान दूध का दर्जा
गांव में लोगों की राजनीतिक सोच भले ही अलग हो, लेकिन पूत के समान दूध पर सभी एकमत हैं। यहां घर में होने वाले दूध की बिक्री कोई भी नहीं करता है। इस गांव की सोच है कि यदि किसी ने अपनी गाय-भैंस का दूध बेचा तो नुकसान हो जाएगा। गांव की पुष्पा कहती हैं कि उनकी पड़ोसन ने कुछ दिन पहले चोरी-छिपे दूध बेचा था तो उसकी भैंस बीमार पड़ गई। उन्होंने बताया कि उनकी सास ने भी मरते समय कहा था कि दूध नहीं बेचना, नहीं तो भैंस मर जाएगी।
भैंस की थनों से निकलने लगा था खून
प्रीतम कहते हैं कि उनके बाबा ने बताया था कि गांव में करीब तीन सौ साल पहले एक व्यक्ति ने दूध बेचा था। इसके बाद उसकी भैंस के थनों से खून निकलने लगा था। इस पर गांव के लोगों ने एक बैठक की। कुछ बुजुर्गों ने सुझाव दिया कि दूध को पूत के समान दर्जा दिया जाएगा। इसके बाद गमा देवी मंदिर में दूध नहीं बेचने का संकल्प लिया गया। तभी से दूध नहीं बेचने की परंपरा चली आ रही है।
आगे पढ़िए दूध बेचने पर हुक्का-पानी बंद...