हर तरफ मची चीख पुकार: 9 साल के बेटे को ढूंढती फिर रही है मां, किसी को तलाश है पापा की / हर तरफ मची चीख पुकार: 9 साल के बेटे को ढूंढती फिर रही है मां, किसी को तलाश है पापा की

dainikbhaskar.com

Nov 20, 2016, 10:03 AM IST

पुखरायां के पास रविवार सुबह करीब 3.15 बजे इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन डिरेल हो गई।

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कानपुर. इंदौर-पटना रेल हादसे में कई परिवार बिखर गए। किसी के अपने की जान गई तो, किसी के सामने बैठा हंसता-खेलता शख्स हादसे में जान गंवा बैठा। एक शख्स ने कहा कि उज्जैन से बैठी तीन साल की बच्ची हंस-खेल रही थी। हादसे के बाद बच्ची के शरीर के दो टुकड़े हो गए। इसी तरह एक बोगी काटकर दो बच्चों को जिंदा बचा लिया गया, लेकिन बुरी तरह फंसी एक महिला की बॉडी को नहीं निकाला जा सका। माना जा रहा है कि ये महिला बच्चों की मां थी। चश्मदीदों ने dainikbhaskar.com को बताई आंखों देखी...
- एक शख्स ने बताया, "उज्जैन से अपने परिवार के साथ ट्रेन में 3 साल की बच्ची बैठी थी, वो काफी हंस-खेल रही थी।'
- "वो मेरे ही सामने बैठी हुई थी, पूरे रास्ते मस्ती करती हुई आ रही थी।'
- "हादसे के बाद सुबह देखा तो उसका शरीर दो टुकड़ों में हो गया था। उसके मां-बाप का पता नहीं चल पाया है।'
- अजय शर्मा नाम के शख्स ने फोन पर बताया कि उसके भाई अरुण शर्मा फैमिली के साथ भोपाल से पटना शादी में जाने के लिए निकले थे।
- "पूरा परिवार हादसे का शिकार हो गया। S1 बोगी में अरुण, उनकी पत्नी नूपुर, बेटा दिव्यांश (11) और श्रेयांश (9) बैठे थे।'
- अजय ने बताया कि भाई अरुण की हालत क्रिटिकल है। भाभी नूपुर से फोन पर बात की तो पता चला कि वो बोगी में ही हैं।
मलबे में दबे थे दो बच्चे
- NDRF कमांडेंट एके सिंह ने बताया," 6 और 7 साल के बच्चे बोगी में बुरी तरह फंसे हुए थे, जिन्हें बोगी काटकर रेस्क्यू कर लिया गया।
- "पास ही एक महिला की बॉडी भी बोगी में फंसी थी, जिसे अभी निकाला नहीं जा सका है।'
- "मलबे में दबे लोगों को ढूंढा जा रहा है और उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।'
दो बच्चियों को बचाने की कोशिश जारी
- NDRF कमांडेंट ने कहा, "रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पास ही की बोगी में दो बच्चियां भी फंसी हुई मिली हैं।'
- बच्चियों को अभी निकाला नहीं जा सका है, लेिकन NDRF टीम ने कहा कि बच्चियां सुरक्षित हैं और उन्हें जल्द ही निकाल लिया जाएगा।
- रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म करने से पहले एक सर्च ऑपरेशन भी चलाया जाएगा, ताकि मलबे में दबी बॉडीज को निकाल लिया जाए।
- NDRF अफसरों का कहना है कि सबसे बड़ी प्रॉब्लम भीड़ को कंट्रोल करने में आ रही है।

9 साल के बेटे को ढूंढ रही है मां
- अजय ने कहा, "भाभी नूपुर एक बेटे दिव्यांश के साथ अपने 9 साल के बेटे श्रेयांस को तलाश कर रही हैं, लेकिन उनका पता नहीं चल पा रहा है।
- कानपुर में नौकरी कर रहे शक्ति पाठक रोते-रोते बताया कि पिता राम कृष्‍ण पाठक भोपाल से लखनऊ के लिए निकले थे, उनके कुछ दोस्‍त भी थे। मैं सब जगह उनको ढूंढ चुका हूंं, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है।'
टुकड़े-टुकड़े हो गया था डिब्बा
- एक चश्मदीद के मुताबिक, "ट्रेन तेज स्पीड से चल रही थी, एकदम से पलट गई। S1 में बैठा हुआ था। डिब्बे के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे।"
- "जब संभले तो देखा कि सबकुछ बर्बाद हो गया था। हमारे 5 लोग लापता हैं, हम उन्हीं को ढूंढ रहे हैं।"
केवल चीख-पुकार सुनाई दे रही थी
- एक चश्मदीद ने कहा, "हादसे के वक्त गहरा अंधेरा था, कुछ नजर नहीं आ रहा था, केवल चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।"
- "हादसे के वक्त ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो, अचानक बर्थ पर सो रहे लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे।"
अफसरों ने नहीं दिया ध्यान
- एक दूसरे चश्मदीद ने कहा, "झांसी से जब ट्रेन चली तो एक बोगी के डिब्बे ज्यादा आवाज कर रहे थे। शिकायत की पर रेल अधिकारियों ने सुना नहीं। एक बोगी पुखरायां के पास बुरी तरह लड़खड़ा गई।"
- एक शख्स ने कहा, "बोगी के डिब्बे के आवाज करने की वजह से ट्रेन को दो बार रोका भी गया, लेकिन उसके बाद फिर ट्रेन को चला दिया गया।"
मलबे से निकलने की कोशिश कर रहे थे लोग
- एक शख्स ने कहा कि, " कुछ लोग मलबे से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन निकल नहीं पा रहे थे। तब तक कुछ गांव वाले भी आ गए थे, जिन्होंने मदद की।"
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