कानपुर. कानपुर पुलिस की छवि सुधारने और वारदात की हर पहलू को समझने के लिए कानपुर जोन के आईजी आशुतोष पांडेय ने करीब एक महीने पहले शुरू किया था। उसी को लेकर रविवार को आईजी ने बर्रा थाने में एसओ सहित सभी दरोगाओं की क्लास ली। आईजी के क्लास में एसओ सहित सभी दारोगा फेल होते नजर आए।
कानपुर बर्रा थाने में तैनात एसओ और दरोगाओं की कार्यशैली को देखने के लिए रविवार को आईजी ने क्लास लगाई। इस दौरान आईजी ने वहां मौजूद करीब एक दर्जन से ज्यादा पीड़ित आम जनता से मिले। इस क्लास में जो भी मामले आए वो चोरी के ज्यादा थे। जिसे देख आईजी आग बबूला हो गए।
आईजी के सामने एक वादी रमेश ने बताया कि, उसकी मोटर साइकिल चार महीने पहले चोरी हो गई थी। जिसे बाद में बरामद कर ली गई थी। आईजी ने इस चोरी के संबंध में जब उस घटना की विवेचना करने वाले दरोगा से उन चोरों के बारे में पूछा तो उनका कहना था, वो चोर उन्नाव के गंगा गंज के रहने वाले थे। जिनको जेल भेज दिया गया है। मगर वो कानपुर के बर्रा इलाके में कैसे आए, ये उनकी पहली वारदात थी। इसके पहले भी वो इस इलाके में चोरी के वारदात को अंजाम दे चुके हैं, उनका कॉल डिटेल क्या है? इस पर दरोगा ने चुप्पी साध ली।
इसके बाद आईजी आशुतोष के सामने एक महिला को पेश किया गया। उस महिला शबाना के मुताबिक, शादी के दस साल बाद उसकी बेटी को उसके ससुराल वालों ने जहर देकर मार डाला। इसके अलावा उसे जमकर मारा पीटा गया था। इस पर आईजी ने जब उस केस की विवेचना कर रहे दूसरे दरोगा से उस केस की पूरी कागजात देखने के बाद आईजी ने पूछा इस केस में क्या हुआ। दरोगा ने कहा कि उसमे पांच लोगो को जेल में हत्या करने के जुर्म में जेल भेज दिया गया है। इसपर आईजी ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में ये साफ लिखा है कि उस युवती की मौत कैसे हुई इसका कारण स्पष्ट नहीं है।
मजे की बात ये रही कि आईजी वहा मौजूद एसओ से हत्या, लूट, छेड़छाड़ और चेनस्नैचिंग जुडी घटनाओं का रजिस्टर मांगते रहे। अंत तक दरोगा और एसओ ने उनको वारदातों की फाइल नहीं दी। इस दौरान आईजी ने कहा किसी भी हत्या की घटना की जांच उसके पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर शुरू की जाती है। मगर पुलिस मेडिकल रिपोर्ट देखने के बजाय वादी पब्लिक के कहे अनुसार अपनी रिपोर्ट तैयार करके उस केस से अपना पल्ला झाड़ लेती है। आईजी के मुताबिक, पुलिस के अंदर संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है।
फोटो: लोगों की शिकायतें सुनते हुए आईजी आशुतोष पांडेय।