होली के 5वें दिन क्रांतिवीरों की याद में कानपुर में यूं दिखता है नजारा, देखें PHOTOS / होली के 5वें दिन क्रांतिवीरों की याद में कानपुर में यूं दिखता है नजारा, देखें PHOTOS

यहां के सरसैया घाट पर गंगा मेला लगता है और जमकर होली खेली जाती है। ये नजारा सोमवार को पूरे कानपुर में देखने को मिलेगा।

dainikbhaskar.com

Mar 27, 2016, 01:46 PM IST
गंगा मेला के दिन यहां भीषण होली होती है। ठेले पर होली का जुलूस निकाला जाता है। गंगा मेला के दिन यहां भीषण होली होती है। ठेले पर होली का जुलूस निकाला जाता है।
कानपुर. होली के पांचवें दिन कानपुर के लोगों में जबरदस्‍त उत्‍साह देखने को मिलता है। यहां के सरसैया घाट पर गंगा मेला लगता है और जमकर होली खेली जाती है। ये होली क्रांतिकारियों की याद में खेली जाती है। ये नजारा सोमवार को पूरे कानपुर में देखने को मिलेगा। आगे पढ़िए इसके पीछे क्‍या है पूरा इतिहास
-हटिया बाजार के कैलाश नाथ के अनुसार, हटिया गंगा मेला की नींव साल 1942 में पड़ी थी।
-होली के दिन हटिया बाजारर में मौजूद रज्जन बाबू पार्क में यहां के नौजवानों ने अंग्रेजी हुकूमत की परवाह किए बगैर तिरंगा फहराकर गुलाल उड़ाकर नाच गा रहे थे।
-तभी इसकी भनक अंग्रेजी हुक्मरानों को लग गई। इसके बाद करीब एक दर्जन से भी ज्यादा अंग्रेज सिपाही घोड़े पर सवार होकर आए और झंडा उतारने लगे।
नौजवानों ने किया झंडा उतारने को विरोध
इस पर होली खेल रहे नौजवानों विरोध किया। अंग्रेज सिपाहियों ने उन नौजवानों को इस पार्क में घेरकर बुरी तरह से पीटा। तिरंगा फहराने और होली मनाने के विरोध में उन दिनों गुलाब चंद्र सेठ, बुद्धूलाल मेहरोत्रा, नवीन शर्मा, विश्वनाथ टंडन, हमीद खान और गिरिधर शर्मा सहित करीब 45 लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद बंद हो गया था बाजार
-अंग्रेजों का ये कदम उनके लिए गले की हड्डी बन गई। गिरफ्तारी के विरोध में कानपुर का पूरा बाजार बंद हो गया।
-कानपुर के मजदूर, साहित्यकार, व्यापारी और आम जनता ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया।
-समूचा कानपुर का बाजार बंद हो गया। मजदूरों ने फैक्ट्री में जाने से मना कर दिया।
-ट्रांस्पोटरों ने चक्का जाम कर दिया। सरकारी कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया।
- शहर के एक-एक दूकान में कारोबारियों ने ताला जड़ दिया। इतना ही नहीं, उस समय लोगों ने अपने-अपने चहरे के रंग नहीं उतारे।
-लोगों के इस आंदोलन को देख अंग्रेज हुक्मरानों की नींद उड़ गई।
-इस आंदोलन में गणेश शंकर विद्यार्थी, दयाराम मुंशी, हशरत मोहानी जैसे क्रांतिकारी अगुवाई करने लगे।
-ऐसे में पंडित जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी ने भी कानपुर के आंदोलन का पूरा समर्थन किया।
गिरफ्तार नवयुवकों को पांचवें दिन छोड़ा था अंग्रेजों ने
-हटिया बाजारर के रहने वाले पारस शर्मा के मुताबिक, हड़ताल के चौथे दिन अंग्रेज का एक वरिष्‍ठ अफसर ने यहां आकर लोगों से बात की।
-इसके बाद होली के पांचवें दिन अनुराधा नक्षत्र के दिन सभी पकड़े गए युवकों को रिहा किया गया।
-अनुराधा नक्षत्र के दिन जब नौजवानों को जेल से रिहा किया जा रहा था, तब पूरा शहर उनके लेने के लिए जेल के बाहर इकठ्ठा हो गए थे।
-जेल से रिहा हुए क्रांतिवीरों के चहरे पर रंग लगे हुए थे। रिहा होने के बाद जुलूस पूरा शहर घूमते हुए हटिया बाजार में आकर खत्म हुआ। इनके रिहाई को लेकर यहां जमकर होली खेली गई।
-इसके बाद यहां होली के दिन से अनुराधा नक्षत्र तक लगातार पांच दिनों तक होली मनाये जाने की परंपरा बरकरार रही।
ठेले पर निकाला जाता है होली का जुलूस
-गंगा मेला के दिन यहां भीषण होली होती है। ठेले पर होली का जुलूस निकाला जाता है।
-ये जुलूस हटिया बाजार से शुरू होकर नयागंज, चौक सर्राफा सहित कानपुर के करीब एक दर्जन पुराने मोहल्ले से होकर गुजरता है।
-इसके बाद दोपहर 2 बजे तक हटिया के रज्जन बाबू पार्क में आकर जुलूस समाप्‍त होता है।
-शाम को सरसैया घाट पर गंगा मेला का आयोजन किया जाता है। यहां शहर भर से लोग एकत्र होते हैं और एक-दूसरे को होली की बधाइयां देते हैं।
-हर मोहल्ले में होरियारों का स्वागत घर की छतों से महिलाएं रंगों की बौछार करके करती है।
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जुलूस कानपुर के करीब एक दर्जन पुराने मोहल्ले से होकर गुजरता है। जुलूस कानपुर के करीब एक दर्जन पुराने मोहल्ले से होकर गुजरता है।
हर मोहल्ले में होरियारों का स्वागत घर की छतों से महिलाएं रंगों की बौछार करके करती है। हर मोहल्ले में होरियारों का स्वागत घर की छतों से महिलाएं रंगों की बौछार करके करती है।
शाम को सरसैया घाट पर गंगा मेला का आयोजन किया जाता है। शाम को सरसैया घाट पर गंगा मेला का आयोजन किया जाता है।
ये होली क्रांतिकारियों की याद में खेली जाती है। ये होली क्रांतिकारियों की याद में खेली जाती है।
एक-दूसरे के गले मिलकर बांटते हैं खुशी। एक-दूसरे के गले मिलकर बांटते हैं खुशी।
खूब उड़ते हैं रंग-गुलाल। खूब उड़ते हैं रंग-गुलाल।
रज्जन बाबू पार्क, जहां आकर होली होती है खत्‍म। रज्जन बाबू पार्क, जहां आकर होली होती है खत्‍म।
रज्जन बाबू पार्क। रज्जन बाबू पार्क।
होली के पहले लोगों से शांति बनाए रखने की अपील। होली के पहले लोगों से शांति बनाए रखने की अपील।
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गंगा मेला के दिन यहां भीषण होली होती है। ठेले पर होली का जुलूस निकाला जाता है।गंगा मेला के दिन यहां भीषण होली होती है। ठेले पर होली का जुलूस निकाला जाता है।
जुलूस कानपुर के करीब एक दर्जन पुराने मोहल्ले से होकर गुजरता है।जुलूस कानपुर के करीब एक दर्जन पुराने मोहल्ले से होकर गुजरता है।
हर मोहल्ले में होरियारों का स्वागत घर की छतों से महिलाएं रंगों की बौछार करके करती है।हर मोहल्ले में होरियारों का स्वागत घर की छतों से महिलाएं रंगों की बौछार करके करती है।
शाम को सरसैया घाट पर गंगा मेला का आयोजन किया जाता है।शाम को सरसैया घाट पर गंगा मेला का आयोजन किया जाता है।
ये होली क्रांतिकारियों की याद में खेली जाती है।ये होली क्रांतिकारियों की याद में खेली जाती है।
एक-दूसरे के गले मिलकर बांटते हैं खुशी।एक-दूसरे के गले मिलकर बांटते हैं खुशी।
खूब उड़ते हैं रंग-गुलाल।खूब उड़ते हैं रंग-गुलाल।
रज्जन बाबू पार्क, जहां आकर होली होती है खत्‍म।रज्जन बाबू पार्क, जहां आकर होली होती है खत्‍म।
रज्जन बाबू पार्क।रज्जन बाबू पार्क।
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