कानपुर. उत्तर मध्य रेलवे अपने कर्मचारियों का पास कंप्यूटराइज्ड करने जा रहा है। ऐसे में अब रेलवे कर्मचारी पास बनवाते समय धांधली नहीं कर सकेंगे। बुधवार को इलाहाबाद मंडल के डीआरएम ने टीएम शेड के एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में पहले कंप्यूटर सेंटर का उद्घाटन किया। इस दौरान यहां कई अधिकारी भी मौजूद थे। अभी तक रेल कर्मचारी का पास मैन्युअल बनाया जाता था। कर्मचारी अपने बच्चों की उम्र गलत बताकर लंबे समय तक पास का लाभ उठाते थे। वहीं, इसी क्रम में डीआरएम की पत्नी ने बच्चों के लिए किड्स फ्रेंडली जोन का भी उद्घाटन किया है।
कंप्यूटराइज्ड सेंटर का उद्घाटन पूरे विधि-विधान के साथ किया गया। इसके बाद डीआरएम वीके त्रिपाठी ने पूरे सिस्टम को बारिकी से समझा। उन्होंने कहा कि अभी तक कर्मचारियों को जो पास दिया जाता था, उसमें कई खामियां होती थी। इसके अलावा साल में एक बार कर्मचारी को अपना और पूरे परिवार का विवरण देना होता है। इसमें बच्चों की उम्र की पुष्टि के लिए स्कूल का सर्टिफिकेट देना होता है। इसी दौरान लोग हेराफेरी कर बच्चों की उम्र कम बताकर पास का लाभ उठाते रहते हैं। नियम के अनुसार लड़कों को 21 साल तक और लड़कियों को उनकी शादी होने से पहले तक ही पास का लाभ मिलता है।
कंप्यूटर में डाटा खुद हो जाएगा अपग्रेड
डीआरएम के मुताबिक, अब कानपुर जोन के सभी रेल कर्मचारियों के विवरण का डाटा कंप्यूटर में फीड कर दिया जाएगा। इसमें उनका नाम, पता, घर में सदस्यों की संख्या और उम्र का सही विवरण देना होगा। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी अपने बच्चे के उम्र को कम बताता है, तो वह पकड़ा जाएगा। इसकी वजह यह है कि अब बच्चों की उम्र डाटा के हिसाब खुद ही अपग्रेड हो जाएगा। वहीं, जल्दी ही इस प्रणाली को पूरे इलाहाबाद मंडल में लागू किया जाएगा।
रेलवे में काम करने वाली महिलाओं के लिए हैं फायदेमंद
वहीं, डीआरएम की पत्नी मीना त्रिपाठी ने टीएम शेड में बच्चों के लिए किड्स फ्रेंडली जोन का उद्घाटन किया। कानपुर जोन में रेलवे की तरफ से बच्चों के देखभाल के लिए पहला सेंटर खोला गया है। मीना त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे में काम करने वाली के लिए यह काफी फायदेमंद है। वे काम करने के दौरान अपने पांच साल की उम्र तक के बच्चों को यहां छोड़ सकती हैं। इस सेंटर में एक महिला केयर टेकर को रखा जाएगा। वह इन बच्चों की देखभाल करेगी। साथ ही यहां बच्चों के लिए खिलौने भी रखे जाएंगे।
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