कानपुर. राजस्थान से फैले स्वाइन फ्लू ने कानपुर में भी कहर ढाना शुरू कर दिया है। अब तक यहां स्वाइन फ्लू से एक मासूम बच्ची सहित दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, दो लोग हैलेट अस्पताल में अभी भी इस बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद कानपुर के सबसे बड़े जिला अस्पताल उर्शला में स्वाइन फ्लू के वार्ड पर ताला लटका हुआ है। साथ ही डॉक्टरों का भी कुछ अता-पता नहीं है। ऐसे में शहर में फैल रही इस गंभीर बीमारी का इलाज भगवान भरोसे है।
कानपुर के सबसे बड़े जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू वार्ड तो खोल दिया गया है, लेकिन यहां पर ताला लटका हुआ है। वहीं, डॉ, आरके कटियार ने इस बाबत बताया कि पिछले चार दिन के अंदर यहां बुखार से पीड़ित मरीजों की करीब 20 फीसदी संख्या बढ़ी है। साथ ही जो संदिग्ध मरीज हैं, उनके सैंपल लिए जा रहे हैं।
स्वाइन फ्लू से अब तक हो चुकी है दो लोगों की मौत
जिला महामारी नियंत्रक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक स्वाइन फ्लू के करीब 17 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। इनमें से दो मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी, जिनमें कानपुर के जूही लाल कॉलोनी की ढाई साल की मासूम आप्ति और कानपुर देहात की रजनी तिवारी की मौत हो गई है। वहीं, एके सिंह (58), साजरीन (2) और कंहैया (8) को हैलेट में भर्ती कराया गया है। इनमें स्वाइन फ्लू के लक्षण की पुष्टि के लिए सैंपल भेजे जा चुके हैं। हालांकि, विभाग ने अभी इनमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं की है।
स्वाइन फ्लू के मरीजों के इलाज हों अलग
वहीं, सीएमओ रामायण सिंह यादव ने शहरभर के सभी अस्पतालों को सख्त निर्देश दिया है कि स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की सूचना तुरंत दी जाए। साथ ही लक्षणों के आधार पर यदि किसी का बुखार फ्लू जैसा है, तो उनका अलग वॉर्ड में इलाज किया जाए।
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