फोटो: तपेश्वरी माता मंदिर।
कानपुर. इन दिनों शहर में नवरात्रि की धूम है। बिराहना रोड स्थित तपेश्वरी मंदिर का भी अपना इतिहास है। मान्यता है कि इस मंदिर में माता सीता ने अपने बेटों लव-कुश का मुंडन कराया था। साथ ही देसी घी के 101 दीये जलाए थे। जब माता सीता इस मंदिर में आई थीं, तब वहां तीन बहनें तपस्या कर रही थीं। ऐसे में वह कुछ दिन यहां रुक गईं और तपस्या कर रही बहनों की सेवा करने लगीं। तब से इस मंदिर को तपेश्वरी मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।
नवरात्रि के समय यहां बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। दूरदराज से श्रद्धालु यहां देवी मां के दर्शन के लिए आते हैं। नौ दिनों तक मंदिर परिसर में देसी घी के 101 दीये लगातार जलते रहते हैं। यहां प्रसाद चढ़ाने के बाद महिला भक्त उसे मां के आशीर्वाद स्वरूप अपने आंचल में समेट लेती हैं। हालांकि, सफाई के लिहाज से पिछले 10 साल से यहां मुंडन करने का काम बंद हो गया।
आस्था का केंद्र बारा देवी मंदिर
यहां का बारा देवी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां स्थापित देवी मां की मूर्ति काफी प्राचीन है। ऐसे में दूरदराज की महिलाएं यहां देवी मां के दर्शन-पूजन के लिए आती हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में घंटों भजन-कीर्तन होता है। यहां बारा देवी से मन्नत मांगने के बाद दरवाजे के पास एक ताला लगाने का रिवाज है। ऐसा माना जाता है कि ताला लगाने से देवी मां मनोकामनाओं को जल्द ही पूरा करती हैं।
आगे पढ़िए, बारा देवी मंदिर में स्थापित है 1700 साल पुरानी प्रतिमा...