लखनऊ. राजधानी में आए दिन सड़क हादसे होने के बावजूद प्रशासन सबक नहीं ले रहा है। शहर में करीब 250 चौराहे ऐसे हैं, जहां ट्रैफिक पुलिस का एक भी जवान तैनात नहीं रहता है। इसके अलावा 411 में से केवल 161 चौराहों पर ही ट्रैफिक जवानों को नियुक्त किया गया है। वहीं, इन चौराहों कार्यरत पुलिस को धरना प्रदर्शन और वीआईपी मूवमेंट में लगा दिया जाता है। ऐसे में पर्याप्त पुलिस नहीं होने के कारण पूरी ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है।
शहर में ट्रैफिक पुलिस के पास जवानों की काफी कमी है। यदि आंकड़ों पर नजर डाले तो इस समय यहां तीन ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 80 हेड कांस्टेबल और 391 कांस्टेबल हैं। हालांकि, नियम के अनुसार यहां चार ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 100 हेड कांस्टेबल और 600 कांस्टेबल होना चाहिए। ऐसे में जवानों की कमी के चलते यहां की ट्रैफिक व्यवस्था की हालत बदतर हो चुकी है।
वीआईपी ड्यूटी में लगाए जाते हैं होमगार्ड
जानकारी के मुताबिक, शहर के प्वाइंट पर जिन जवानों की तैनाती होती है, उन्हें ही वहां से हटाकर वीआईपी ड्यूटी के लिए लगा दिया जाता है। बताया जा रहा है कि आए दिन करीब 18 ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर, तीन हेड कांस्टेबल और 52 कास्टेंबल को वीआईपी और वीआईआईपी ड्यूटी में लगाया जाता है। वहीं, होमगार्डों से भी यह सेवा ली जाती है। एक ट्रैफिक पुलिस ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जवानों की कमी की वजह से उनसे ज्यादा काम कराया जाता है। इसके अलावा किसी भी मौसम में उन्हें प्रशासन से कोई मदद नहीं मिलती है। वहीं, आए दिन रसूखवालों से नियमों का पालन नहीं करने को लेकर झगड़ा होता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए हर चौराहे पर कम से कम छह जवान तैनात करना होता है।
कई दिनों से नहीं हुई है भर्ती प्रक्रिया
वहीं, ट्रैफिक पुलिस के अधीक्षक ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि पुलिस के जवानों के कमी की समस्या भर्ती का नहीं होना है। यहां बहुत दिनों से जवानों की भर्ती प्रक्रिया नहीं हुई है। ऐसे में यदि पर्याप्त जवान मिल जाए, तो ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने में मदद मिल सकती है।
फोटोः ट्रैफिक पुलिस।