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देश-विदेश में यूपी का नाम रोशन करने वाली हस्तियों को मिलता है यश भारती सम्‍मान

सोमवार को यूपी सरकार ने कला, साहित्य, खेल सहित क्षेत्रों में प्रदेश का नाम देश-विदेश में रोशन करने वाली 56 हस्तियों को यश भारती सम्मान से नवाजा।

Dainik Bhaskar

Feb 10, 2015, 01:18 AM IST
(बाएं से) अलका तोमर, जिमी शेरगिल, कैलाश खेर और नवाजुद्दीन सिद्दकी को यश भारती अवार्ड देते सीएम अखिलेश यादव। (बाएं से) अलका तोमर, जिमी शेरगिल, कैलाश खेर और नवाजुद्दीन सिद्दकी को यश भारती अवार्ड देते सीएम अखिलेश यादव।
लखनऊ. सोमवार को यूपी सरकार ने कला, साहित्य, खेल सहित क्षेत्रों में यूपी का नाम देश-विदेश में रोशन करने वाली 56 हस्तियों को यश भारती सम्मान से नवाजा। लोहिया पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में मुलायम सिंह यादव और सीएम अखिलेश ने सभी हस्तियों को सम्मानित किया। इन हस्तियों ने अपने जीवन में संघर्ष कर अपनी विधा में महारत हासिल की है। इनमें से कई हस्तियों के साथ कई कहानियां भी जुडी हैं। पढ़िए इन हस्तियों को आखिर क्यों यूपी सरकार ने इस सम्मान के लिए चुना।

हामिदुल्लाह (हामिद हिंदी)

नवम्बर 1924 में जन्मे उर्दू और हिंदी के शायर हमीदुल्लाह ‘हामिद हिंदी’ के नाम से जाने जाते हैं। वे साथ के दशक से ही समाजवादी विचारधारा से जुड़े और इसका प्रचार जनता के बीच करते रहे। वे समाजवादी नेताओं चौधरी चरण सिंह और राजनारायण के संपर्क में आने के बाद लगतार उनके कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने लगे। वे इन नेताओं के विचारों के प्रचार-प्रसार में भी लगे रहे। हमीदुल्लाह समाजवादियों के बीच समाजवाद के लिविंग लीजेंड के नाम से जाने जाते हैं। हामिदुल्लाह की पहचान हिंदी, उर्दू और लोक भाषाओं में गीत, गजल, कविता और शेरो-शायरी के लिए जानी जाती है। वे 91 वर्ष की उम्र में भी उर्जावान हैं और समारोहों में उनकी आवाज सुनने के लिए लोग बेकरार रहते हैं।

प्रो. रीता गांगुली

लखनऊ के हाइली एजुकेटेड परिवार में पली-बढ़ी और बेगम अख्तर की शागिर्द रह चुकीं प्रो. रीता गांगुली ने संगीत की शिक्षा-दीक्षा ध्रुपद गायन के लिए प्रसिद्द विष्णुपुर घराने के गोपेश्वर बंदोपाध्याय द्वारा शांतिनिकेतन यूनिवर्सिटी में हुई। रीता गांगुली को तीन बार कथकली और भारतनाट्यम के लिए नेशनल स्कालरशिप मिल चुकी है। गांगुली ठुमरी गायन के लिए मशहूर रानी सिद्धेश्वरी की पहली ‘गंडाबंद शागिर्द’ बनीं थीं। रीता गांगुली ने गजल गायकी बारीकियों को बेगम अख्तर से सीखा था। गजल गायकी को सम्मान दिलाने के लिए इन्होंने बेगम अख्तर अकैडमी ऑफ गजल्स की स्थापना की थी। प्रो. गांगुली 2003 में पद्मश्री सम्मान से भी नवाजी जा चुकी है।

भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’

साल 2014-15 के लिए यश भारती सम्मान पाने वाले वाराणसी के भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’ अपने चाहने वालों के बीच बीपीटी के नाम से जाने जाते हैं। वे योग और संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान हैं। वे संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी के इंडोलॉजिकल रिसर्च इंस्‍टीट्यूट के डायरेक्टर रह चुके हैं। करीब 30 साल तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को अपनी सेवा देने वाले आचार्य वागीश शास्त्री को 1982 में ही काशी पंडित परिषद की ओर से महामहोपाध्याय की पदवी दी गई थी। उन्होंने 40 से अधिक किताबें लिखीं हैं और 300 से ज्यादा पांडुलिपियों का संपादन किया है। काशी परंपरा के संस्कृत के विद्वान डॉ. वागीश शास्त्री को साल 2013 में संस्कृत साहित्य में योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्हें राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से उन्हें बाणभट्ट पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। वागीश शास्त्री ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की पत्रिका ‘सरस्वती सुषमा’ का लगभग 30 सालों तक संपादन किया था।

आगे ​पढ़ि​ए दर्शन सिंह यादव...
यश भारती अवार्ड लेते अवनीश कुमार। यश भारती अवार्ड लेते अवनीश कुमार।
दर्शन सिंह यादव

सपा सुप्रीमो के गांव सैफई के प्रधान दर्शन सिंह यादव के नामा अनोखा रिकॉर्ड है। वे 1971 से लगातार सैफई के निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने जा रहे हैं। कुश्ती और पहलवानी के शौकीन दर्शन सिंह यादव सैफई के इलाके में होने वाले ग्रामीण दंगल प्रतियोगिताओं में कई नामी गिरामी पहलवानों को पछाड़ चुके हैं। कृषि में उच्च तकनीक के पक्षधर दर्शन सिंह खेती और बागवानी के शौकीन है। इसके चलते उन्होंने अपने क्षेत्र के उसर और बंजर जमीन पर हरियाली फैलाने में कामयाबी भी पाई है। साल 2009 में लगतार 25 सालों तक ग्राम प्रधान चुने जाने के चलते तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने दिल्ली के विज्ञान भवन में इनका सम्मान भी किया था।
 
प्रो. हकीम सैयद जिल्लुर्र्हमान

एक जुलाई 1940 को भोपाल में जन्मे प्रो. हकीम सैयद जिल्लुर्र्हमान ने अपनी पढ़ाई यूपी के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पूरी की है। प्रो. जिल्लुर्र्हमान को करीब खत्म हो चुकी चिकित्सा की पद्धति यूनानी को जिलाए रखने में काफी मदद की है। प्रो. जिल्लुर्र्हमान ने यूनानी चिकत्सा से संबंधित 38 किताबें, दो मोनोग्राफ और 150 से अधिक रिसर्च पेपर्स लिखे हैं। इन्होने 1981 में आजमगढ़ में इब्न सिना तिब्बिया कॉलेज की नींव रखी थी। इसके बाद साल 2000 में अलिग्रह में इब्न सिना अकैडमी ऑफ मेडिवल मेडिसिन साइंसेज की नींव रखी थी। इस अकेडमी की लाइब्रेरी में यूनानी चिकित्सा से संबंधित ऐतिहासिक 15 हजार किताबें और 500 पांडुलिपियां रखी हैं। इस लाइब्रेरी में अरबी, उर्दू, पर्सियन और संस्कृत भाषाओं की कई किताबें भी मौजूद हैं। प्रो. जिल्लुर्र्हमान को साल 2006 में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से और फारसी भाषा में बहुमूल्य योगदान के लिए साल 1995 में सम्मानित किया था।

आगे ​पढ़ि​ए प्रो. जयकृष्‍ण अग्रवाल...
यश भारती अवार्ड लेते भागीरथ त्रिपाठी। यश भारती अवार्ड लेते भागीरथ त्रिपाठी।
प्रो. जयकृष्ण अग्रवाल

यूपी के अमरोहा में एक जुलाई 1941 को जन्मे प्रो. जयकृष्ण अग्रवाल की शिक्षा-दीक्षा आर्किटेक्चर के फील्ड में हुई थी। कला में रुचि होने के चलते उन्होंने इस हुनर को कला की सेवा के लिए प्रयोग किया। उन्होंने उस समय छापा चित्रकला में विशेषज्ञता हासिल की, जिस समय भारत में इस विधा की शुरुआत ही हुई थी। उन्होंने यूपी में छापा चित्रकला की पहली वर्कशॉप स्थापित की और उन्हें इसका पहला लेक्चरर बनने का सौभाग्य भी मिला। प्रो. अग्रवाल ने 1972-73 में लंदन यूनिवर्सिटी के स्लेड स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स में ट्रेनिंग ली, इस ट्रेनिंग के लिए उन्हें स्कालरशिप भी मिली। प्रो. जयकृष्णा ने देश-विदेश में अपनी कला की प्रदर्शनियों का आयोजन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।

विनोद मेहता

आजादी से पहले 31 मई 1942 को पश्चिमी पंजाब के रावलपिंडी में जन्मे मशहूर पत्रकार विनोद मेहता ने अपनी एजुकेशन लखनऊ यूनिवर्सिटी से पूरी की। इसके बाद वे पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। साल 1974 में जब वे बोल्ड तस्वीरें और लेख प्रकाशित करने वाली मैगजीन ‘डेबोनियर’ से जुड़े तो उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने कई मैगजींस और अखबारों का संपादन किया। उन्होंने फिल्म एक्ट्रेस मीना कुमारी और कांग्रेसी नेता संजय गांधी की जीवनी पर किताबें भी लिखी हैं। बीबीसी रेडियो पर उनका कार्यक्रम लैटर फ्रॉम इंडिया काफी चर्चित रहा है। आजकल वे न्यूज चैनलों पर चर्चा के लिए पैनलिस्ट के रूप में नजर आते हैं।

आगे ​पढ़ि​ए उर्मिल कुमार थपलियाल...
यश भारती अवार्ड लेते बुद्धि प्रकाश। यश भारती अवार्ड लेते बुद्धि प्रकाश।
उर्मिल कुमार थपलियाल

अवध की नौटंकी को विशेष पहचान दिलाने वाले उर्मिल कुमार थपलियाल का जन्म दो जून 1943 को पौड़ी गढ़वाल के ढोढ़मासों गांव में हुआ था। वे 1965 में आल इंडिया रेडियो में न्यूजरीडर नियुक्त हुए थे। उन्होंने 1999 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से ‘गढ़वाल की अभिव्यक्ति और रामलीला’ सब्जेक्ट पर रिसर्च किया था। उर्मिल कुमार थपलियाल ने यूपी सरकार द्वारा आयोजित सांस्कृतिक यात्राओं में यूपी को रिप्रेजेंट किया है। वे लखनऊ की मशहूर नाट्य कला अकेडमी से संबद्ध हैं। उनके कई न्यूजपेपर में नाट्य विधा से संबंधित व्यंग्य कॉलम के कॉलम रेगुलर छपते हैं।
 
रविंद्र कुमार जैन

बचपन से ही देखने की शक्ति से मरहूम मशहूर फिल्म संगीतकार रविंद्र जैन का जन्म 28 फरवरी 1944 को अलीगढ़ में हुआ था। उनके छह भाई और एक बहन हैं। बचपन से ही न देखने के बाद भी रविंद्र जैन ने संगीत के जरिए दुनिया को जाना और समझा है। उनके संगीत के क्षेत्र में आने के पीछे का भी दिलचस्प किस है। रविंद्र जैन की आंखें जन्म से ही बंद थीं। जब उन्हें डॉक्टरों को दिखाया गया तो उनके पिता पंडित इंद्रानी जैन के दोस्त डॉ. मोहनलाल ने सर्जरी के जरिए से खोला था। सर्जरी की बाद ही उन्होंने हिदायत भी दी कि उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे बढ़ सकती है, लेकिन उन्हें ऐसा कोई काम नहीं करना होगा जिससे उनकी आंखों पर कोई जोर पड़े। इसके चलते उन्हें संगीत के क्षेत्र को चुना। आंखों से न देख पाने के कारण उनकी याददाश्त बहुत तेज थी, वे जो सुनते थे उसे याद कर लेते थे। अपनी इसी क्षमता के चलते उन्होंने बचपन में कई भजन याद कर लिए। वे बचपन में पड़ोस के मंदिर मां जाकर भजन गाते थे, इसके बदले उनके पिता रोज एक रुपए देते थे। उन्होंने पाने फिल्मी जीवन की शुरुआत फिल्म सौदागर से की थी। रविंद्र जैन को साल 1985 में फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' के लिए फिल्मफ़ेयर की बेस्ट म्यूजिक कंपोजर का अवार्ड मिला था। 

आगे ​पढ़ि​ए योगेश गौड़ के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते दर्शन सिंह। यश भारती अवार्ड लेते दर्शन सिंह।
योगेश गौड़

फिल्म गीतकार योगेश गौड़ का जन्म 19 मार्च, 1944 को लखनऊ में हुआ था। पिता की मौत के बाद वे नौकरी की तलाश में मुंबई चले गए। वहां उन दिनों मशहूर गीतकार गुलजार बहुत व्यस्त थे, इसके चलते संगीतकार सलिल चौधरी को एक अच्छे गीतकार की तलाश थी। उनके फुफेरे भाई ब्रजेंद्र गौड़ उन दिनों फिल्मों में स्क्रीनप्ले लिखते थे। उन्होंने इनके नाम से गौड़ सरनेम हटा दिया। इसके बाद वे संगीतकार सलिल से मिले। उन्होंने पहला गाना फिल्म 'सखी रॉबिन' के 'तुम जो आओ तो प्यार आ जाए, जिंदगी में बहार आ जाए।' इसके बाद योगेश ने अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना की फिल्म 'आनंद' के लिए हिट गाने 'जिंदगी कैसी है पहले हाय...' और 'कहीं दूर दिन ढल जाए...' लिखा। उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों और 200 से अधिक सीरियल के लिए गीत लिखे हैं। गीतकार योगेश को उनके गीतों के लिए 200 से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं।
 
टीपी त्रिवेदी

टीपी त्रिवेदी की कहानी एक इंजीनियर से ज्योतिष शास्त्र का विद्वान बनने की है। टीपी त्रिवेदी पिछले 40 सालों से ज्योतिष पर लगतार रिसर्च कर रहे हैं। त्रिवेदी ने बीएचयू से बीएससी करने के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे यूपी एल्क्ट्रिसिटी बोर्ड में सिविल इंजिनियर बन गए। शुरू से ही उन्हें अध्यात्मिक और मंत्रशास्त्र के अध्ययन का शौक था। ज्योतिष में विश्वास रखने वाले कई लोग उनसे ज्योतिषीय सलाह लेकर अपनी जिंदगी में पॉजिटिव बदलाव ला चुके हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले 40 सालों में वे 460 से अधिक रिसर्च पेपर लिख चुके हैं। उनके रिसर्च आज 95 किताबों के रूप में ज्योतिष शास्त्र के स्टूडेंट्स के लिए गाइड का काम कर रहे हैं। ज्योतिषीय विज्ञान में उनके इस योगदान के लिए उन्हें ज्योतिष परासर, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष वेदव्यास और ज्योतिष मार्तंड जैसी तमाम उपाधियों से नवाजा जा चुका है।

आगे ​पढ़ि​ए गिरधर लाल मिश्र के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते डॉ. ज्ञान चर्तुवेदी। यश भारती अवार्ड लेते डॉ. ज्ञान चर्तुवेदी।
गिरधर लाल मिश्र (जगद्गुरु रामानंदाचर्या, स्वामी रामभद्राचार्य)

स्वामी रामभद्राचार्य के नाम से प्रसिद्द गिरधर लाल मिश्र का जन्म 14 जनवरी 1950 को जौनपुर में हुआ था। उनके दादा पंडित सूर्यबली मिश्र की चचेरी बहन मीराबाई की बहुत बड़ी भक्त थीं और मीरा बाई अपने काव्यों में श्रीकृष्ण को गिरिधर नाम से पुकारती थी, इसलिए उन्होंने जन्म के बाद इनका नाम गिरिधर रख दिया। गिरिधर की नेत्रदृष्टि दो मास की अल्पायु में नष्ट हो गई। बचपन में उनकी आंखों में रोहे हो गए थे। गांव में कोई डॉक्टर नहीं था। इसके चलते उन्हें एक वृद्ध महिला चिकित्सक के पास ले जाया गया जो इलाके में रोहे के इलाज के के लिए जानी जाती थी। उसने गिरिधर की आंखों में रोहे के दानों को फोड़ने के लिए गरम लिक्विड डाला, इससे आंखों का इलाज तो नहीं हुआ बल्कि आंखों से खून बहने लगा। ज्यादा खून बह जाने के कारण गिरिधर के दोनों आंखों की रोशनी चली गई। उनकी आंखों के इलाज के लिए परिवार के लोग उन्हें उन्हें सीतापुर, लखनऊ और मुंबई स्थित विभिन्न आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक और एलोपैथिक के एक्सपर्ट्स को दिखाया। इसके बाद भी गिरिधर के आंखों की रौशनी वापस नहीं आई। वे न तो पढ़ सकते हैं, न लिख सकते हैं और न ही ब्रेल लिपि का प्रयोग करते हैं। वे केवल सुनकर सीखते हैं और बोलकर दूसरों की मदद से अपनी रचनाएं लिखवाते हैं। उन्होंने अपनी जीवन की कठिनाईयों से प्रेरणा लेकर अमोदवन, चित्रकूट में तुलसी प्रज्ञाचक्षु और मूकबधिर विद्यालय की स्थपाना की। यहां दृष्टिहीन और मूकबधिर बच्चे पढ़ते हैं।
 
राजकुमार वर्मा

कभी घड़ी की मरम्मत का काम करने वाले राजकुमार वर्मा की आंखों पर चढ़े लेंस ने ऐसी प्रेरणा दी कि वे 1975 से घड़ीसाजी से हटकर माइक्रोपेंटिंग करने लगे। उन्होंने माइक्रो पेंटिंग में हनुमान चालीसा लिखी। यह हनुमान चालीसा किताब 45 पेज की है, जिसमें 22 विभिन्न आकृतियों में हनुमानजी के चित्र बने हैं। माइक्रोपेंटिंग में उन्होंने ऐसी दक्षता हासिल की है, जिससे वे अब बिना चश्मे या लेंस के माइक्रोपेंटिंग करते हैं। वे 800 चावल के दानों पर नक्काशी उकेर कर इंडिया का नक्शा भी बना चुके है। उन्होंने चावल के दानों पर हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, उर्दू और फारसी में वंदे मातरम् लिखा है। उन्होंने एक तिल के दाने पर इंडिया 31 बार 155 अक्षरों में लिखा है।

आगे ​पढ़ि​ए डॉ. ज्ञान चर्तुवेदी के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते डॉ. उर्मिल कुमार। यश भारती अवार्ड लेते डॉ. उर्मिल कुमार।
डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी

डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी का जन्म 2 अगस्त, 1952 को झांसी के मऊरानीपुर में हुआ था। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई कर पब्लिक सेक्टर की कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, भोपाल के सात सौ बेड वाले अस्पताल में ह्रदय रोग विशेषज्ञ के रूप नौकरी ज्वाइन की और वहीं से रिटायर हुए। साहित्य में रूचि के चलते वे व्यंग्यकार बन गए। साल 2002 में अपने उपन्यास बारामासी के लिए उन्हें यूके कथा सम्मान से सम्मानित किया गया था।
 
योगाचार्य बुद्धि प्रकाश

योग के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामजिक सुधार की अलख जलाने वाले बुद्धि प्रकाश का जन्म एटा जिले के बढ़ावली में 2 जनवरी 1953 को हुआ था। हिंदी और फिलोसफी में पोस्ट ग्रेजुएट करने क़ा बाद इन्होने 1987 में महेश योगी से योग की शिक्षा ली। इसके बाद वे 1990 से 1996 तक महेश मिशन संस्था से बतौर योग शिक्षक जुड़े रहे। उन्होंने योग शिक्षा के क्षेत्र में यूपी का नाम देश विदेश में रोशन किया है।

आगे ​पढ़ि​ए विष्‍णु यादव के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते डॉ. गीतांजलि शर्मा। यश भारती अवार्ड लेते डॉ. गीतांजलि शर्मा।
विष्णु यादव

वाराणसी के सिगरा इलाके के छोटी गैबी के इलाके में जन्में विष्णु यादव के पिता स्व. राम सकल कहिल्फा भी जाने माने बिरहा गायक थे। विष्णु यादव के गाए हुए लोकगीत पूर्वांचल सहित एनी राज्यों में बहुत प्रचलित हैं। वे वाराणसी के लाला बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार और दूरसंचार मंडल के नामित सदस्य रहे हैं। विष्णु यादव ने अखिल भारतीय विविध विधा लोक उत्थान सेवा संस्थान की है। इस संस्थान के जरिए वे राष्ट्रीय बिरहा महोत्सव का आयोजन करते हैं। इस महोत्सव में वे कलाकारों को मौका देकर उनका हौसला बढ़ाते हैं।

डॉ कुमकुम धर

लखनऊ स्थित भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय में कथक की विभागाध्यक्ष और लखनऊ घराने की प्रख्यात कथक नृत्यांगना डॉ. कुमकुम धर का जन्म चार फरवरी, 1956 को हुआ था। उन्होंने प्रख्यात कथक नृत्य गुरु स्व. लच्छू महाराज के मार्गदर्शन में कथक केंद्र लखनऊ से शिक्षा प्राप्त की है। वे प्रसिद्द नाट्य संस्था दर्पण से नृत्य निर्देशक के रूप में जुड़ी हुई है। वे आर्ट मैगजीन और न्यूजपेपर में कला से संबंधित कॉलम लिखती रही हैं। डॉ. कुमकुम धर 1982 से लगातार कथक के प्रचार प्रसार के लिए कनाडा, यूके, यूएसए, कुवैत, इजिप्ट, दुबई, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मैक्सिको और लंदन में कथक के शो करती रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें इस्लामिक देशों में केवल दरबारी नृत्य पेश करने की सलाह दी गई थी। उन्होंने पारंपरिक रूप बरकरार रखते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में भी शिववंदना, रामवंदना के बाद पारंपरिक लखनवी कथक पेश किया।

आगे ​पढ़ि​ए डॉ. विष्‍ण्‍ाु सक्‍सेना के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते हकीम सैयद। यश भारती अवार्ड लेते हकीम सैयद।
डॉ. विष्णु सक्सेना

कवि डॉ. विष्णु सक्सेना का जन्म अलीगढ़ के तहसील-सिकंदराराऊ के गांव सहादतपुर में 12 जनवरी को हुआ था। पेशे से डॉक्टर विष्णु सक्सेना की बचपन से ही साहित्य लेखन में रूचि रही है। वे देश की प्रतिष्ठित मैगजीन और न्यूजपेपर और मैगजीन में लिटरेचर और मेडिकल संबंधी आर्टिकल लिखते हैं। उन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन के राष्ट्रीय प्रसारणों में अनेक बार कविता पाठ किया है। विष्णु सक्सेना की कविताएं कैसेट 'शंख और दीप', 'प्रेम कविता' और 'तुम्हारे लिए' सीडी के रूप में मार्केट में आ चुकी है। इन्होंने कविता पाठ के लिए देश-विदेश की अनेक यात्राएं की हैं।

शुभा मुदगल 

शुभा मुदगल का जन्म 23 जून 1959 को इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता स्व. स्कंद गुप्त इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। इनका पैतृक गांव बुलंदशहर जिले के अनूप शहर में है। इन्होंने इलाहबाद यूनिवर्सिटी से एमए तक की शिक्षा ली है। प्राइमरी से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा इलाहाबाद के मशहूर सेंट मैरीज गर्ल्स कॉलेज में हुई थी। शुभा मुदगल ने 1978 में शास्त्रीय गायक पण्डित रामाश्रय झा ने इलाहाबाद में तालीम ली थी। शुभा मुदगल ने संगीतज्ञ पंडित कुमार गंधर्व से भी संगीत की बारीकियां सीखीं। शुबहा मुदगल के गाए गीतों के दर्जनों कैसेट्स और सीडी आ चुकी हैं। उन्होंने देश-विदेश में सैकड़ों कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने संगीत में परंपरा और प्रयोगशीलता के मेल को नया आयाम दिया है। शुभा मुदगल ने कई फिल्मों में संगीत भी दिया है।

आगे ​पढ़ि​ए कृष्‍णा तन्‍हाई के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते हमीदुल्‍लाह। यश भारती अवार्ड लेते हमीदुल्‍लाह।
कृष्णा कन्हाई और गोविंद कन्हाई

मथुरा के रहने वाले और फिल्मों में गुरुदत्त के साथ कला निदेशक के रूप में काम करने वाले चित्रकार कन्हाई के दोनों बेटों कृष्णा कन्हाई और गोविंद कन्हाई  ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया है। कन्हाई ने मुंबई में फिल्मों के लिए काम करते वक्‍त सोचा कि उनकी कलात्मकता और सृजनात्मकता भगवान कृष्ण को समर्पित की जानी चाहिए। ऐसे में वे फिल्मों की दुनिया छोड़कर वृंदावन में बस गए और भगवान कृष्ण की कलाओं पर चित्र बनाने लगे। उन्ही की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कृष्णा कन्हाई और गोविंद कन्हाई ने भी पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए कृष्णभक्ति की चित्रकला को ही अपना जीवन बनाया। दोनों ही भाई अपनी पेंटिंग्स में सोने के वर्क और रत्नों का प्रयोग करते हैं। इन दोनो को साल 1999 में अचीवर ऑफ मिलेनियम अवार्ड मिल चुका है। कृष्ण कन्हाई को 2004 में पद्मश्री पुरुस्कार से नवाजा गया है। हरिवंश राय बच्चन और अमिताभ बच्चन के अलावा पिता-पुत्र की यह दूसरी जोड़ी है जिसे पद्मश्री सम्मान मिला है।
 
डॉ सीएस यादव

दिल्ली में एम्स के ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सीएस यादव के नाम एक अनोखा कीर्तिमान है। उनकी अगुवाई में नौ डॉक्टरों की टीम ने पांच मई 2013 को लद्दाख पहुंचकर तीन दिन में सात मरीजों का घुटना और दो मरीजों का कूल्हा बदला था। डॉ. सीएस यादव ने अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के बावजूद इस कठिन सर्जरी को बखूबी अंजाम दिया था। ऐसे माहौल में ऑक्सीजन की कमी के कारण दिमाग में सूजन हो जाती है, जिससे सिर दर्द, उल्टी आदि की समस्या होने लगती है। इसे ध्यान में रखते हुए डॉ. यादव की टीम ने मरीजों को एसिटाजोलामाइड दवा दी। यह दवा हाई एल्टीट्यूड सीकनेस के लिए दी जाती है। इस ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम के एक सदस्य को खुद ऑक्सीजन लेनी पड़ी। डॉ. सीएस यादव ने लद्दाख में ही मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा दी, जिससे इससे मरीजों के पैसे और समय दोनों की बचत हुई।

अागे ​पढ़ि​ए राजकुमार पहलवान के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते इफ्तिकार नदीम। यश भारती अवार्ड लेते इफ्तिकार नदीम।
राजकुमार पहलवान

गाजियाबाद जिले के मेवला भट्ठी के राजकुमार पहलवान को कुश्ती में उनके योगदान के लिए 'ध्यानचंद अवार्ड' से नवाजा जा चुका है। उनका जन्म पांच जनवरी 1966 को हुआ था। उन्होंने 1989 में तीसरी कॉमनवेल्थ कुश्ती प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था। वे सेफ खेलों बतौर कुश्ती के रेफरी भारत का प्रतिनिधत्‍व कर चुके हैं।
 
डॉ. आरपी सिंह

पूर्वांचल के देवरिया में 25 दिसंबर, 1966 को जन्मे आरपी सिंह ने हॉकी दुनिया में यूपी का परचम लहराया है। वे अजलान शाह, एशियन गेम्स, इंटरनेशनल हॉकी चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने फैजाबाद की डॉ. राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी से एमए और पीएचडी की उपाधि ली है। हॉकी के अलावा वे फुटबाल के शौकीन हैं। वर्तमान में वे यूपी के स्पोर्ट्स डायरेक्टर हैं।

आगे ​पढ़ि​ए डॉ. रोकश यादव के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते जय कृष्‍णा अग्रवाल। यश भारती अवार्ड लेते जय कृष्‍णा अग्रवाल।
डॉ. राकेश यादव

यूपी बोर्ड के हाई स्कूल बोर्ड एग्जाम में मेरिट होल्डर रहे डॉ. राकेश यादव ने साल 1995 में आगरा यूनिवर्सिटी से एमडी मेडिसिन में गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। इसके बाद एम्स दिल्ली से डीएम कॉर्डियोलॉजी में 1998 में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। डॉ. राकेश यादव एम्स के कॉर्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में तैनात हैं। वे देश की कई राजनीतिक हस्तियों के दिल के रोग का इलाज कर चुके हैं। उन्हें मेडिकल फील्ड में अपने योगदान के लिए 2013 में राष्ट्र गौरव पुरस्कार से नवाज गया था।
 
डॉ. इफ्तिखार नदीम खान

वाराणसी में पैदा हुए काष्ठ शिल्प में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने वाले डॉ. इफ्तिखार नदीम खान ने अपनी किताब 'ब्लैक ताज महल: द एंपरर्स मिसिंग टूम' में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर यह बताने की कोशिश की थी कि सफेद संगमरमर का ताजमहल बनवाने के साथ-साथ मुगल बादशाह शाहजहां यमुना किनारे माहताब बाग में काला ताजमहल बनवाना चाहता था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका। इस किताब का सऊदी अरब की सरकार अरबी भाषा में करवा रही है। डॉ. इफ्तिखार खान ने ब्लैक ताजमाहक का मिनिएचर भी बनाया है।

आगे ​पढ़ि​ए जसजीत सिंह सहगल के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते खुशबीर सिंह। यश भारती अवार्ड लेते खुशबीर सिंह।
जसजीत सिंह सहगल ‘जिम्मी सहगल’

गुलजार निर्देशित फिल्म ‘माचिस’ से सुर्खियों में आने वाले जिम्मी शेरगिल का जन्म तीन दिसम्बर, 1970 को गोरखपुर में हुआ था। जिम्मी शेरगिल प्रख्यात चित्रकार अमरतिया शेरगिल के भतीजे हैं। जिम्मी की प्राइमरी एजुकेशन लखनऊ में हुई जिसके बाद वे अपने पुरखों की जमीन पंजाब लौट गए। जिम्मी को अपनी एक्टिंग के लिए देश-विदेश में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
 
कैलाश खेर

मेरठ शहर में सात जुलाई 1973 को कैलाश खेर का जन्म हुआ था। हिन्दी फिल्मों में सूफी गानों की परंपरा पुरानी रही है। एक जामाना था जब सूफी गायकी की बात छिड़ती थी तो पडोसी मुल्क पाकिस्तान के गायकों का चेहरा आंखों के सामने तैर जाता था, लेकिन आज सूफी गायकी की चर्चा करते ही जेहन में कैलाश खेर का भी नाम कौंधता है। कैलाश खेर ने भारतीय परिप्रेक्ष्य में सूफी गायकी को एक नया आयाम दिया है। इसे कैलाश खेर की खनकती आवाज का जादू ही कहें कि आज उनकी गिनती भारतीय सिनेमा के बेहतरीन गायकों में होती है। मेरठ में जन्मे कैलाश खेर को संगीत विरासत में मिला है। उनके पिता पंडिम मेहर सिंह खेर पुजारी थे और अक्सर घरों में होने वाले इवेंट में ट्रेडिशनल फोक गाया करते थे। वह एक एमेच्योर म्यूजिशियन थे। कैलाश खेर ने बचपन में अपने पिता से ही संगीत की शिक्षा ली और यहीं से उनका पूरा फोकस म्यूजिक पर हो गया। 'तेरी दीवानी...,' 'रब्बा इश्क न होवे' और 'अल्ला के बंदे हंस दे..' गीत से फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने वाले कैलाश खेर ने बहुत कम समय में ही अपना मुकाम बना लिया, लेकिन अपने व्यवसाय में बड़ा नुकसान झेलने के बाद एक वक्त ऐसा भी आया था जब कैलाश खेर ने आत्महत्या करने का मन बना लिया था। यह बात खुद कैलाश खेर ने एक इंटरव्यू के दौरान बताई थी।

आगे ​पढ़ि​ए राहत अली खान साबरी के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते कृष्‍णा और गोविंद कन्‍हैया। यश भारती अवार्ड लेते कृष्‍णा और गोविंद कन्‍हैया।
राहत अली खान साबरी

राहत अली खां साबरी मशहूर शास्त्रीय संगीत कलाकार फजल हक के बेटे है। इन्होंने गजल गायन की शिक्षा उस्ताद विलायत अली खां, उस्ताद युसूफ याकूब और उस्ताद गुलाम अली से ली है। इन्होंने देश में ही नहीं विदेशों में भी अपने गजल गायन से लोगों को मंत्रमुग्ध किया है। इन्हें विभिन्न संस्थाओं के जरिए अब तक 25 सम्मान मिल चुके हैं।
 
नवाजुद्दीन सिद्दीकी

बॉलीवुड एक्टर का जन्म 19 मई, 1974 को मुजफ्फरनगर में हुआ था। गुरुकुल कांगड़ी से उन्होंने बीएससी की है। इसके बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ड्रामा दिल्ली से एक्टिंग में ट्रेनिंग ली। 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' जैसी फिल्म में अपने अभिनय के जरिए सुर्खियां बटोरने वाले इस एक्टर ने कभी बड़ौदा की एक फैक्ट्री में चीफ कैमिस्ट थे। थिएटर में उनकी गहरी दिलचस्पी थी, जिसकी खातिर उन्होंने चौकीदार की नौकरी भी की। कोई आश्चर्य नहीं कि यह अभिनेता आज भी खुद को 'कॉमन मैन' मानता है।

आगे ​पढ़ि​ए अवनीश कुमार यादव के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेतीं कुमकुम धर। यश भारती अवार्ड लेतीं कुमकुम धर।
अवनीश कुमार यादव

वॉलीबॉल के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी अवनीश कुमार यादव का जन्म 25 मई, 1979 को हुआ था। इन्होंने ग्वालियर से फिजिकल एजुकेशन में डिग्री ली है। अवनीश ने देश-विदेश में कई वॉलीबॉल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर यूपी का नाम रोशन किया है। इन्हें यूपी सरकार ने साल 1997-98 में लक्ष्मण पुरस्कार से और भारत सरकार ने साल 2006-07 में अहिल्याबाई होलकर पुरस्कार से नवाजा था।

अलका तोमर

महिला कुश्ती पहलवान अलका तोमर का जन्म यूपी के मेरठ जिले के सिसोली गांव में हुआ था। फैमिली के सभी सदस्य पहलवानी करते थे। साल 1998 से अलका भी देश के लिए कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने लगी। साल 2006 में दोहा में हुए एशियाई खेलों में अलका ने 55 किग्रा. वर्ग में देश के लिए ब्रोंज मेडल जीता था। इसके बाद चीन में हुई सीनियर कुश्ती प्रतियोगिता में भी उन्होंने एक ब्रोंज मैडल अपने नाम किया। उनकी उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने साल 2007 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। 

आगे ​पढ़ि​ए पूनम यादव के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेतीं पूनम यादव। यश भारती अवार्ड लेतीं पूनम यादव।
पूनम यादव

काशी की बेटी पूनम यादव ने पिछले साल स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग में ब्रोंज मेडल जीत देश का झंडा ऊंचा किया था। साल 2011 में जब पूनम ने खेलना शुरू किया था। धीरे-धीरे वह जिला, मंडल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने लगी। पूनम के पिता ने उनकी कॉमनवेल्थ की तैयारी के लिए दो भैसों को बेच दिया गया। परिवार ने भूखे रहकर पूनम को मौका दिया। पूनम यादव ने थाईलैंड के बैंगसाइन में हुई एशियन जूनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में तीन ब्रोंज मेडल जीते थे।
 
गीतांजलि शर्मा

ब्रज के लोकनृत्य में कृष्ण लीलाओं के जरिए से देश-विदेश में मंच पर उतारने वाली गीतांजलि शर्मा बचपन से ही लोक नृत्य के क्षेत्र में महारथ हासिल कर चुकी थी। उन्हें संगीत नाटक अकादमी से उस्ताद बिसमिल्लाह खान और नेशनल यूथ स्कॉलरशिप अवार्ड भी मिल चुका है। गीतांजलि शर्मा ने यूएस, चीन, मैक्सिको, लंदन और सिंगापुर कई देशों में ब्रज लोकनृत्य का प्रदर्शन कर देश का नाम ऊंचा किया है। वे देश में खुजराहो महोत्सव, ताज महोत्सव, झांसी महोत्सव, बनारस के गंगा महोत्सव, लोकतरंग समारोह और राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन और पीएम हाउस में भी पानी कला का प्रदर्शन किया है।

आगे ​पढ़ि​ए खुशबीर सिंह के बारे में...
यश भारती अवार्ड लेते आरपी सिंह। यश भारती अवार्ड लेते आरपी सिंह।
खुशबीर सिंह ‘शाद’

शाद के बारे में कहा जाता है कि लखनऊ का जिक्र हो और शाद का नाम न आए। शाद ने हिंदी ओर उर्दू में शायरी की सात किताबें लिखीं हैं। इसके अलावा महेश भट्ट ने उनसे फिल्म 'धोखा' के गाने भी लिखवाए थे। शाद को साल 2008 में अमरीका की 'अंजुमने तरागुई ए उर्दू' नाम की संस्था ने साल के सर्वश्रेष्ठ शायर का सम्मान दिया था। शाद का जन्म सीतापुर में हुआ था।

आगे देखें यश भारती सम्‍मान पाने लोगों से जुड़ी अन्‍य तस्‍वीरें...
यश भारती अवार्ड लेते राहत अली खान। यश भारती अवार्ड लेते राहत अली खान।
यश भारती अवार्ड लेते राज कुमार वर्मा। यश भारती अवार्ड लेते राज कुमार वर्मा।
यश भारती अवार्ड लेते राजकुमार। यश भारती अवार्ड लेते राजकुमार।
यश भारती अवार्ड लेतीं रीता गांगुली। यश भारती अवार्ड लेतीं रीता गांगुली।
यश भारती अवार्ड लेतीं शोभा मुद्गल। यश भारती अवार्ड लेतीं शोभा मुद्गल।
यश भारती अवार्ड लेते सुद्धि प्रकाश। यश भारती अवार्ड लेते सुद्धि प्रकाश।
यश भारती अवार्ड लेते स्‍वामी रामभद्राचार्य। यश भारती अवार्ड लेते स्‍वामी रामभद्राचार्य।
यश भारती अवार्ड लेते टीपी त्रिवेदी। यश भारती अवार्ड लेते टीपी त्रिवेदी।
यश भारती अवार्ड लेतीं विनोद मेहता की पत्‍नी। यश भारती अवार्ड लेतीं विनोद मेहता की पत्‍नी।
यश भारती अवार्ड लेते विष्‍णु सक्‍सेना। यश भारती अवार्ड लेते विष्‍णु सक्‍सेना।
यश भारती अवार्ड लेते योगेश गौड़। यश भारती अवार्ड लेते योगेश गौड़।
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(बाएं से) अलका तोमर, जिमी शेरगिल, कैलाश खेर और नवाजुद्दीन सिद्दकी को यश भारती अवार्ड देते सीएम अखिलेश यादव।(बाएं से) अलका तोमर, जिमी शेरगिल, कैलाश खेर और नवाजुद्दीन सिद्दकी को यश भारती अवार्ड देते सीएम अखिलेश यादव।
यश भारती अवार्ड लेते अवनीश कुमार।यश भारती अवार्ड लेते अवनीश कुमार।
यश भारती अवार्ड लेते भागीरथ त्रिपाठी।यश भारती अवार्ड लेते भागीरथ त्रिपाठी।
यश भारती अवार्ड लेते बुद्धि प्रकाश।यश भारती अवार्ड लेते बुद्धि प्रकाश।
यश भारती अवार्ड लेते दर्शन सिंह।यश भारती अवार्ड लेते दर्शन सिंह।
यश भारती अवार्ड लेते डॉ. ज्ञान चर्तुवेदी।यश भारती अवार्ड लेते डॉ. ज्ञान चर्तुवेदी।
यश भारती अवार्ड लेते डॉ. उर्मिल कुमार।यश भारती अवार्ड लेते डॉ. उर्मिल कुमार।
यश भारती अवार्ड लेते डॉ. गीतांजलि शर्मा।यश भारती अवार्ड लेते डॉ. गीतांजलि शर्मा।
यश भारती अवार्ड लेते हकीम सैयद।यश भारती अवार्ड लेते हकीम सैयद।
यश भारती अवार्ड लेते हमीदुल्‍लाह।यश भारती अवार्ड लेते हमीदुल्‍लाह।
यश भारती अवार्ड लेते इफ्तिकार नदीम।यश भारती अवार्ड लेते इफ्तिकार नदीम।
यश भारती अवार्ड लेते जय कृष्‍णा अग्रवाल।यश भारती अवार्ड लेते जय कृष्‍णा अग्रवाल।
यश भारती अवार्ड लेते खुशबीर सिंह।यश भारती अवार्ड लेते खुशबीर सिंह।
यश भारती अवार्ड लेते कृष्‍णा और गोविंद कन्‍हैया।यश भारती अवार्ड लेते कृष्‍णा और गोविंद कन्‍हैया।
यश भारती अवार्ड लेतीं कुमकुम धर।यश भारती अवार्ड लेतीं कुमकुम धर।
यश भारती अवार्ड लेतीं पूनम यादव।यश भारती अवार्ड लेतीं पूनम यादव।
यश भारती अवार्ड लेते आरपी सिंह।यश भारती अवार्ड लेते आरपी सिंह।
यश भारती अवार्ड लेते राहत अली खान।यश भारती अवार्ड लेते राहत अली खान।
यश भारती अवार्ड लेते राज कुमार वर्मा।यश भारती अवार्ड लेते राज कुमार वर्मा।
यश भारती अवार्ड लेते राजकुमार।यश भारती अवार्ड लेते राजकुमार।
यश भारती अवार्ड लेतीं रीता गांगुली।यश भारती अवार्ड लेतीं रीता गांगुली।
यश भारती अवार्ड लेतीं शोभा मुद्गल।यश भारती अवार्ड लेतीं शोभा मुद्गल।
यश भारती अवार्ड लेते सुद्धि प्रकाश।यश भारती अवार्ड लेते सुद्धि प्रकाश।
यश भारती अवार्ड लेते स्‍वामी रामभद्राचार्य।यश भारती अवार्ड लेते स्‍वामी रामभद्राचार्य।
यश भारती अवार्ड लेते टीपी त्रिवेदी।यश भारती अवार्ड लेते टीपी त्रिवेदी।
यश भारती अवार्ड लेतीं विनोद मेहता की पत्‍नी।यश भारती अवार्ड लेतीं विनोद मेहता की पत्‍नी।
यश भारती अवार्ड लेते विष्‍णु सक्‍सेना।यश भारती अवार्ड लेते विष्‍णु सक्‍सेना।
यश भारती अवार्ड लेते योगेश गौड़।यश भारती अवार्ड लेते योगेश गौड़।
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