यूपी टेक्निकल यूनिवर्सिटी की फाइल फोटो
लखनऊ. सूबे के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में प्रवेश को लेकर कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (सीमैट) 2014-15 के प्रस्ताव को परीक्षा में लागू करने को लेकर गुरुवार को यूपी टेक्निकल यूनिवर्सिटी की केंद्रीय प्रवेश समिति ने खारिज कर दिया है। कमिटी का कहना है कि अभी 20 फीसदी दाखिले सीमैट के जरिए होने के बावजूद सीटें खाली रहती हैं। ऐसे में इसको पूर्ण रूप से लागू कर देना यूनिवर्सिटी के हित में नहीं है।
विवि के कुलपति प्रो. आरके खांडल की अध्यक्षता में गुरुवार को कुछ कोर्ट केस को लेकर केंद्रीय प्रवेश समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें सीमैट को प्रभावी बनाने के संदर्भ में शासन की तरफ से जारी पत्र को लेकर चर्चा की गई। पत्र में सत्र 2014-15 से प्रवेश परीक्षा में सीमैट को प्रभावी बनाने का उल्लेख था। बैठक के दौरान इस मसले पर चर्चा के दौरान सदस्यों का कहना था कि अभी इस साल जो एडमिशन हुए हैं, उसमें सीमैट के जरिए केवल चार छात्रों ने ही प्रवेश लिया है, जबकि विवि की तरफ से 20 फीसदी कोटा आरक्षित है। इसके लिए काउंसिलिंग भी अलग से कराई जाती है। उसके बाद भी प्रवेश की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है।
ऐसे में सत्र 2015-16 में इसको प्रवेश परीक्षा में प्रभावी रूप से लागू करना न तो छात्रों के हित में है और न ही विश्वविद्यालय के हित में है। इसलिए सर्वसम्मित से प्रवेश समिति ने इसे खारिज कर दिया। बैठक में अगले सत्र में दाखिले को लेकर हर वर्ष आयोजित होने वाली यूपी स्टेट एंट्रेंस एग्जाम (एसईई) की प्रवेश परीक्षा के बारे में निर्णय लिया गया कि अगले सत्र के लिए इस प्रवेश परीक्षा का आयोजन फरवरी माह में ही करा लिए जाएं। बैठक में शामिल सदस्यों का कहना था कि फरवरी माह में होने से बोर्ड परीक्षाओं पर इसका कोई असर नहीं होगा। वहीं, काउंसिलिंग परिणाम आने के बाद कराई जाए जिससे समय पर काउंसिलिंग भी समाप्त हो जाएगी।
एडमिशन नहीं लेने वाले छात्रों की फीस होगी जब्त
बैठक में इस साल काउंसिलिंग के माध्यम से प्रवेश लेने वाले छात्रों द्वारा सीट आवंटन के लिए जमा कराए गए 15 हजार रुपए वापस करने के बारे में अलग निर्णय लिया गया है। जिन छात्रों ने आवंटन के बाद भी दूसरे कॉलेजों में प्रवेश लिया है उनकी और आवंटन वाले कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की फीस ट्रांसफर कर दी जाएगी। साथ ही ऐसे छात्र जो काउंसिलिंग में शामिल होने के बावजूद किसी कॉलेज में प्रवेश नहीं लेने पर उनकी फीस जब्त कर ली जाएगी। वहीं, काउंसिलिंग होने के बावजूद कॉलेज आवंटन नहीं होने वाले छात्रों के मसले पर कुलपति को विशेषाधिकार से निर्णय लेने पर कमेटी ने छोड़ दिया है।
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