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सोनिया की फटकार के बाद पार्टी की मीटिंग में जमा हुए कांग्रेस नेता

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. यूपी में कांग्रेस की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी धरातल में पहुंच गई है। इसके बावजूद पार्टी के नेताओं के तेवर में कमी नहीं आ रही है। हालांकि, रविवार को यूपी प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री की अध्यक्षता में आयोजित पदाधिकारियों की मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी की फटकार का असर दिखा। पार्टी के कई बड़े दिग्गज नेता रविवार को बैठक में पहुंचे।

बताते चलें कि बीते महीने पर जिला कांग्रेस और शहर कांग्रेस कमिटियों के अध्यक्षों की मीटिंग थी। इस मीटिंग में पार्टी का कोई बड़ा नेता शामिल नहीं हुआ था। इसके बाद यूथ कांग्रेस का दिल्ली में धरना-प्रदर्शन था। वहां पर भी कोई पार्टी का नेता कांग्रेस को सपोर्ट करने नहीं पहुंचा था। कांग्रेस सूत्रों की माने तो यूपी प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने इसकी शिकायत सोनिया गांधी से की थी।

इसके बाद सोनिया ने यूपी के कांग्रेस नेताओं को जमकर फटकार लगाई थी। इसका नतीजा रविवार को लखनऊ कांग्रेस कमिटी में देखने को मिला। रविवार को आयोजित बैठक में लगभग सभी बड़े नेता पहुंचे। ये नेता जितिन प्रसाद, प्रमोद तिवारी, प्रदीप जैन, रीता बहुगुणा थे लेकिन बेनी प्रसाद वर्मा मीटिंग में नहीं पहुंचे। मीटिंग खत्म होने के बाद यूपी प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि जो बड़े नेता मीटिंग में नहीं आए हैं, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपनी मजबूरी बता दी थी। साथ ही अब पार्टी के कार्यकर्ता जनता के बीच में जाकर केंद्र और राज्य सरकार के गलत कामों को रखेंगे।
यह मीटिंग जिला अध्यक्ष और शहर कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद बाकी पदाधिकारियों की नियुक्ति पर चर्चा के लिए रखी गई थी। लोकसभा चुनाव में हुई हार के बाद पार्टी में कार्यकर्ताओं के साथ-साथ बड़े नेताओं का मनोबल गिरा है। यही वजह है कि अब कांग्रेस के बड़े कार्यक्रमों में भी प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री के अलावा कोई बड़ा नेता नजर नहीं आता है। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष को छोड़कर अन्य सभी पदाधिकारियों को लोकसभा चुनाव के बाद हटा दिया था।

यही बात कांग्रेस के कद्दावर नेताओं को खटक रही थी। लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद राहुल गांधी ने छह बड़े नेताओं को 12-12 जिलों में संगठन को मजबूत करने के इरादे से प्रभारी बनाया था, लेकिन बाद में उन्हें भी हटा दिया था। इन नेताओं में हर मंत्री को 12 जिले दिए गए थे। इसमें सलमान खुर्शीद, बेनी प्रसाद वर्मा, प्रदीप जैन, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, श्रीप्रकाश जायसवाल, सलमान खुर्शीद शामिल थे।
फोटो: लखनऊ स्थित कांग्रेस का दफ्तर।