सीएम अखिलेश यादव की फाइल फोटो
लखनऊ. नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही बजट सत्र में नदियों को बचाने के लिए नमामि गंगे परियोजना की घोषणा की थी। इस परियोजना का खाका खीचने में मोदी सरकार को लगभग दो महीने का समय लग गया। वहीं, अखिलेश सरकार ने इस योजना पर काम भी करना शुरू कर दिया है। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रदूषण फ़ैलाने वाली फैक्ट्रियों पर नजर रखने के लिए फैक्ट्रियों में रियल टाइम मॉनिटर इक्विपमेंट लगाने का आदेश दिया है।
बताते चलें कि मोदी सरकार नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा की साफ़-सफाई की योजना बना रही है। इसमें नए खाके के अनुसार, 18 साल का वक्त लगना है, जबकि अखिलेश सरकार ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। बढ़ते औद्योगिकीकरण की वजह से लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे हवा में तो जहर घुल ही रहा है नदियां भी बड़े स्तर पर प्रदूषित हो रही हैं। ऐसे में इससे निपटने के लिए अखिलेश सरकार ने फैक्ट्रियों में रियल टाइम इक्विपमेंट लगाने का फैसला किया है।
ऑनलाइन होगा यह इक्विपमेंट
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव जेएस यादव के अनुसार, फैक्ट्रियों में लगने वाला रियल टाइम इक्विपमेंट ऑनलाइन होगा। फैक्ट्रियों में जहां से प्रदूषित पानी निकलता है उस स्थान पर सरकार के निर्देशानुसार यह इक्विपमेंट लगाना होगा। इससे पता चल सकेगा कि सीवरेज ट्रीटमेंट के बाद भी कितना प्रदूषित पानी फैक्ट्री से निकलकर नदियों में जा रहा है। यह मशीन ऑनलाइन रहेगी, जोकि हर समय का डाटा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपलब्ध कराएगी। इसका डिसप्ले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में होगा।
2015 तक तय की गई है समय-सीमा
सचिव जेएस यादव के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अभी सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर शिकंजा कस रहा है। इसके लिए इन फैक्ट्रियों को अल्टीमेटम दिया गया है कि ऑनलाइन रियल टाइम इक्विपमेंट वर्ष-2015 तक लगा दिए जाएं। आदेश का पालन नहीं करने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
आगे पढ़िए कौन-कौन सी फैक्ट्रियों के लिए जारी हुआ है आदेश…