लखनऊ. भाजपा के फायर ब्रांड लीडर वरुण गांधी की मुश्किलें बढती नजर आ रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने आज साफ किया है कि वरुण के बरी होने के मामले में जिलाधिकारी की तरफ से अपील की जाएगी। आईजी क्राइम आशीष गुप्ता ने बताया कि वरुण को सीजेएम कोर्ट ने दो अलग अलग मामलों में 27 फरवरी और 5 मार्च को बरी किया था। इनमें अभी सरकार के पास अपील का समय है। 27 फरवरी वाले मामले में 25 मई तक का समय अपील के लिए है, जबकि 5 मार्च के आदेशो पर हम 3 जून तक अपील कर सकते हैं। इस संबंध में कानूनी राय ली जा रही है और समय रहते ही अपील की जाएगी। इसके अलावा सेशन कोर्ट से 3 मई को वरुण गांधी बरी हुए हैं, इसें हमारे पास अभी अपील का समय है और जल्द ही हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
बताते चलें कि भाजपा के फायर ब्रांड लीडर वरुण गांधी इन दिनों सुलतानपुर में रैली की तैयारियों लगे हुए हैं। 16 मई को होने वाली इस रैली को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी में सुगबुगाहट है कि 2014 के आम चुनावों में वरुण सुलतानपुर से चुनाव लड़ सकते हैं। अब वरुण यहां से चुनाव लड़ेंगे या नहीं ये तो समय ही बताएगा लेकिन 2009 के आम चुनाव में जिस भड़काऊ भाषण के आरोप के कारण वरुण गांधी को जेल की हवा खानी पड़ी, उसके बारे में पता चला है कि पीलीभीत में न तो उन्होंने ऐसा कोई भाषण दिया, न ही वहां कोई सभा ही हुई।
चौंकाने वाली बात तो यह कि जिन अधिकारियों ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया, केस की शुरुआती जांच की, वो अदालत में ही मुकर गए। लिहाजा चार साल बाद वरुण गांधी आखिरकार अदालत से बाइज्जत बरी हो गए। चूंकि मामला में सभी गवाह सरकारी नौकर हैं, लिहाजा यूपी सरकार पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या ये वरुण गांधी पर मेहरबानी का नतीजा है कि वह संगीन आरोपों से बरी हो गए।
वैसे समाजवादी पार्टी ने सत्ता में आते ही भाजपा सांसद वरुण गांधी के खिलाफ पीलीभीत में दर्ज मामले वापस लेने की तैयारी कर ली थी, लेकिन कवायद शुरु होते ही मामला मीडिया में उछल गया, जिस कारण उसे अपने कदम वापस खींचने पड़े। उस समय पूछे जाने पर वरुण गांधी ने खुद साफ किया था कि ऐसा नहीं है। न तो उनके खिलाफ दर्ज कोई मामला यूपी सरकार ने वापस लिया है न ही उन्होंने प्रदेश सरकार से ऐसा कोई आग्रह किया है।
वरुण के अनुसार बसपा सरकार में उनके खिलाफ जो भी मुकदमें दर्ज हुए थे, वह राजनीति से प्रेरित थे। उन्होंने कभी कोई गैर कानूनी कृत्य नहीं किया और न ही कानून तोड़ा। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। तीन मुकदमें अब तक जीत चुके हैं और शेष अन्य मुकदमों में भी उन्हें यकीन है कि सत्य की जीत होगी, इसलिए उन्हें सरकार के जरिए अपने मुकदमें वापस कराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
वरुण गांधी के अनुसार जिस भाषण को भड़काऊ मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, उसकी सीडी की जांच हैदराबाद की लैब में हुई। जांच में पाया गया कि सीडी से छेड़छाड़ हुई है। उसमें 26 कट्स पाए गए हैं। उसमें दो आवाजें हैं, एक आवाज उनकी है। जिसे आपत्तिजनक हिस्सा बताया जा रहा है, वह उनकी आवाज में है ही नहीं।
2009 में पीलीभीत के डालचंद मोहल्ले में वरुण गांधी ने जो भाषण दिया, उस पर पीलीभीत पुलिस ने तत्कालीन डीएम महेंद्र अग्रवाल को रिपोर्ट सौंपी कि भाजपा नेता वरुण गांधी ने अपने भाषण में एक सम्प्रदाय के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। मामले में भाषण की सीडी भी तैयार कर ली गई है। इसके बाद तत्कालीन डीएम महेंद्र अग्रवाल ने बतौर जिला निर्वाचन अधिकारी पीलीभीत कोतवाली में वरुण गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। मुकदमा दर्ज होते ही माया सरकार ने वरुण गांधी को गिरफ्तार कर रासुका की कार्रवाई भी की।
चार साल इस मुकदमे की सुनवाई के बाद पीलीभीत के सीजेएम अब्दुल कयूम ने आदेश दिया कि उपरोक्त विवेचना के आधार पर मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि अभियुक्त वरुण गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभियोजन पक्ष साबित कर पाने में असफल रहा, लिहाजा आरोपी दोषमुक्त किए जाने योग्य हैं। पता चला कि केस में वादी डीएम महेंद्र अग्रवाल और गवाह पीलीभीत के तत्कालीन एडीएम जमीर आलम और 13 पुलिसकर्मी, सभी अपने बयान से ही मुकर गए।
डीएम महेंद्र अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने वरुण गांधी के खिलाफ कोई मुकदमा लिखवाया ही नहीं था। वहीं एडीएम जमीर आलम ने कहा कि उन्होंने न तो वरुण गांधी की कोई सभा सुनी, देखी और न ही उनसे इस संबंध कोई शिकायत की गई। अदालत के आदेश के अनुसार अभियोजन के तथ्य के सभी साक्षी पक्षद्रोही घोषित हुए और सभी ने ये कहा है कि मोहल्ला डालचंद में दिनांक 7 मार्च 2009 को कोई चुनावी सभा नहीं हुई थी, न ही उन लोगों ने वरुण गांधी का कोई भाषण ही सुना था। अभियोजन को इनसे जिरह का अवसर भी दिया गया और अभियोजन ने जिरह भी की लेकिन अभियोजन कोई ऐसा तथ्य नहीं पेश कर पाया, जिससे वरुण गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध होते हों। अदालत ने ये भी कहा कि मामले में अभियोजन ने कोई सीडी प्रस्तुत नहीं की और न ही पत्रावली पर कोई एलआईयू की रिपोर्ट ही मौजूद है।
आगे पढिए...दयावान अखिलेश- संजय, अमर, आजम और अब वरुण गांधी
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