तस्वीर में: मंच पर नृत्य प्रस्तुत करती लखनऊ की कलाकार।
लखनऊ. घुंघरुओं की छन-छन करती आवाज। सुदंर परिधानों में झलकती भारत की संस्कृति। नृत्य ऐसा कि देखने वाला बस देखता ही रह जाए। ओणम पर्व पर बच्चों के आर्कषक और मन को मोहने वाले नृत्य ने वहां बैठे हर किसी को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। इनके नृत्य को देख कर ऐसा लग रहा था कि मानों पूरा केरल ही मंच उतर आया हो। इस दौरान भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां भी देखने को मिली। साथ ही रंग-बिरंगी फूलों की रंगोली देखते ही बन रही थी।
हर कोई ओणम पर्व की रौनक में रंगा हुआ था। हर चेहरे पर खुशी के भाव साफ देखे जा सकते थे। हर कोई बस एकटक देखता ही रह गया। ऐसे भाव से परिपूर्ण नृत्य को दर्शक अपनी जेहन में कैद कर लेना चाहते थे। आखिर हो भी क्यों ना उनके राजा महाबली धरती पर जो आए हैं। इस दौरान कलाकारों ने नृत्य के जरिए देश में खुशहाली और शांति की प्रार्थना की।
केरल के प्रसिद्ध त्योहारों में ओणम का नाम सबसे पहले आता है। ओणम पर्व की मान्यता महाबली असुर राजा से है। वह न्याय का प्रतीक माना जाता था। लोग उसे भगवान की तरह पूजते थे। केरल वासियों की यह धारणा है कि इस पर्व पर महाबली धरती पर आते हैं। लोग उनका स्वागत घर में करते हैं और इस पर्व को धूम-धाम से मनाते हैं।
आगे तस्वीरों में देखिए कैसे मंच बिखरी ओणम की छटा....