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राम मंदिर के लिए सिंघल ने किया था अनशन, अटल के आदेश पर हुई थी फोर्स फीडिंग

6 वर्ष पहले
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लखनऊ. विश्व हिंदू परिषद (VHP) के संस्थापक सदस्यों में से एक अशोक सिंघल अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर चलाए गए कई आंदोलनों में शामिल रहे थे। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान वे अयोध्या में राम मंदिर की मांग को लेकर आमरण अनशन पर भी बैठे थे। यहीं नहीं, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आदेश पर सिंघल की फोर्स फीडिंग कराई गई थी। अटल जी ने उस समय सदन में एक सवाल के जवाब में कहा था, "हमें उनके स्वास्थ्य की चिंता थी। डॉक्टरों की सलाह पर हमने फोर्स फीडिंग करने का आदेश दिया।"
ऐसे खराब हुए अशोक सिंघल और अटल बिहारी के रिश्ते
जबरन अनशन तुड़वा दिए जाने के बाद अशोक सिंघल को अंदर से बड़ा झटका लगा। उन्हें लगा कि एनडीए की सरकार में बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री हैं, लेकिन इसके बाद भी राम मंदिर बनाने की दिशा में सरकार कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही। सिंघल ने उस समय कहा था, "एनडीए की सरकार भले ही दूसरे दलों के समर्थन से चल रही हो, लेकिन लोगों ने बीजेपी को वोट तो राम मंदिर के मुद्दे पर ही दिया था। इसलिए अटल जी को मंदिर निर्माण के लिए पहल करनी चाहिए।" हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में सिंघल और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच संबंधों में खटास आ गई। दोनों के बीच बातचीत भी बंद हो गई। इस संवादहीनता की बात को अशोक सिंघल खुद स्वीकार कर चुके हैं।
आश्रम के नाम से जाना जाता है सिंघल का घर
इलाहाबाद स्थित अशोक सिंघल के घर को विहिप के लोग आश्रम के नाम से जानते हैं। ये घर राम जन्मभूमि आंदोलन का केंद्र रहा है। जब विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री थे और मुलायम सिंह उत्तर प्रदेश के पहली बार मुख्यमंत्री बने, उस समय राम जन्मभूमि आंदोलन ने रफ्तार पकड़ी थी। सिंघल ने इस आंदोलन में काफी अग्रणी भूमिका निभाई थी। उस समय जो भी लोग राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े थे, उन्हें ढूंढ-ढूंढ कर पुलिस गिरफ्तार कर रही थी। आंदोलनकारियों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा भी चलाया गया था। पुलिस राम सेवकों को जेल में डाल रही थी, ताकि वे लोग अयोध्या न पहुंच सकें। हालांकि, अशोक सिंघल पुलिस को चकमा देकर अयोध्या पहुंच गए थे।
भड़काऊ नारों से हिंदू क्रोध को किया जाहिर
अशोक सिंघल राम जन्मभूमि आंदोलन के समय काफी भड़काऊ भाषण और नारे के लिए भी जाने जाते हैं। साल 1989 के बाद से जहां कहीं भी सभा होती थी, वहां उनके भाषण में हिंदू राष्ट्र और हिंदू हित की बात जरूर शामिल रहती थी। जैसे "जो हिंदू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा। अयोध्या तो बस झांकी है, काशी मथुरा बाकी है।" इन सब नारों के साथ सिंघल ने जनता के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया था।
संतों को राजनीति में दखल के लिए किया प्रेरित
अशोक सिंघल वीएचपी के जरिए संत समाज को एक मंच पर लेकर आए और उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। उन साधुओं से मिलकर अशोक सिंघल ने बताया था, "संतों को राजनीति में दखल देना चाहिए। हिंदुओं का धार्मिक अधिकार छीनने की कोशिश हो रही है, उसका मुकाबला करना चाहिए।" सिंघल ने कहा था, "हिंदुओं को उनके ही राम मंदिर में पूजा नहीं करने दिया जाता है। इसके लिए संत समाज को एकजुट होकर सरकार पर दबाव डालना चाहिए। यह बात हिंदू जनमानस तक फैलानी चाहिए, जिससे जब भी राजनेता हिंदू जनता के पास वोट मांगने जाएं, तो उन्हें हिंदू हितों के बारे में जवाब देना पड़े।"
राम मंदिर का निर्माण ही एकमात्र लक्ष्य
कई बार अपने भाषणों में सिंघल ने दावा किया था कि इस देश में राम मंदिर का निर्माण कराना ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। राम जन्मभूमि पर राम का मंदिर बने, इसके लिए वीएचपी ने पूरी दुनिया के हिंदुओं से आर्थिक मदद ली है। मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम भी कई साल से चल रहा है।
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