लखनऊ. राजधानी की खस्ताहाल हो चुकी ऑनलाइन बिलिंग व्यवस्था को सुधारने के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने एक बार फिर कवायद करनी शुरू कर दी है। इसके लिए पहले चरण में दस किलोवाट के ऊपर के उपभोक्ताओं के मीटरों में आटो मीटर रीडर लगाया जाएगा। अगर यह योजना कारगर साबित हुई तो दूसरे चरण में पांच किलोवाट के उपभोक्ताओं के घरों में लगे मीटरों में आटो मीटर रीडर लगाकर नई बिलिंग व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था से जहां उपभोक्ताओं को मीटर में आए दिन आने वाली गड़बड़ी का प्रतिदिन का पता चलेगा। वहीं, लेसा इंजीनियरों को मीटर रीडिंग के लिए उपभोक्ताओं के घरों पर दस्तक नहीं देना पड़ेगा। जानकारों की मानें तो, यह नई तकनीकी कारगर हो जाने से बिजली उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी।
क्या है आटो मीटर रीडर
लेसा के अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार वर्मा बताते हैं कि यह छोटा सा डिवाइस है जो मीटर में फिट होगा। इसमें सिम (मोडम) लगेगा। जिसका कनेक्शन डेटा सर्वर और डीएलएम सिस्टम से होगा। एएमआर की कीमत एक हजार से 1600 रुपए तक आएगी। इसकी मानीटिरिंग एचसीएल कंपनी के एक्सपर्ट करेंगे। एएमआर रोजाना मीटर रीडिंग के संदेश सर्वर रूम को पहुंचाएगा। जहां रीडिंग के संदेश के आधार पर महीने के अंत में रात 12 बजे बिल बनाकर सिस्टम पर अपलोड कर दिया जाएगा।
पंद्रह हजार से ज्यादा उपभोक्ता उठाएंगे फायदा
राजधानी में ऐसे बिजली उपभोक्ताओं की संख्या तकरीबन पंद्रह हजार के आसपास होगी। मीटर के इस तकनीकी से लैस होने पर लेसा इंजीनियर और एजेंसी कर्मियों को मीटर रीडिंग के लिए घर-घर दस्तक नहीं देनी होगी। मीटर से छेड़छाड़ और बिजली चोरी पर भी अंकुश लगेगा। इसके अलावा उपभोक्ताओं को बिजली की सही खपत का पता लगाने के लिए एमआरआई( मीटर रीडिंग इस्टूमेन्ट) नहीं करानी रहेगी। एमआरआई से उन्हें 24 घंटे के दौरान बिजली खपत का संदेश मिल जाएगा।
फोटो: मीटर रीडिंग नोट करता लेसा कर्मचारी।