लखनऊ. बदायूं कांड मामले में एक नया मोड़ सामने आ गया है। मुख्य गवाह बाबुराम उर्फ़ नजरू लाई डिटेक्टर टेस्ट में फेल हो गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई को इस टेस्ट की रिपोर्ट मिल गई है। ऐसे में अब एक बार फिर मामला उलझ गया है। सीबीआई को रिपोर्ट से पता चला है कि उसके बयान में काफी विरोधाभास है। दूसरी ओर, नजरू का
मोबाइल फोन भी सीबीआई ने बरामद कर लिया है और उसे जांच के लिए भेजा गया है।
बताते चलें कि पूछताछ के दौरान नजरू ने शुरू से ही अपने पास मोबाइल फ़ोन होने से इनकार किया है। वहीं, अब सीबीआई की जांच की सूई उसकी मोबाइल पर टिक गई है। बदायूं कांड में पकड़े गए पांचों आरोपितों में से पप्पू यादव ने बयान में कहा था कि दोनों लड़कियां नजरू के साथ चली गई थी। बताते चलें कि बदायूं के कटरा सआदतगंज गांव में 28 मई को हुई दो बहनों की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी।
सभी आरोपियों का हुआ था लाई डिटेक्टर टेस्ट
जानकारी हो कि सीबीआई ने मामले का खुलासा करने के लिए सभी आरोपियों सहित पीड़ित परिवार का भी लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाया था। इसके बाद सीबीआई ने खुलासा किया था कि पीड़ित परिजनों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार ने उस समय कहा था कि उनका तो सब कुछ उजड़ गया है, वह किसी भी परीक्षा से गुजरने को तैयार हैं। उनका कहना था जो कुछ करना है कर लो, लेकिन इंसाफ चाहिए।
पीड़ित परिजनों ने नजरू को दिए थे एक लाख रुपए
बदायूं कांड के बाद मौके पर भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा था। तब उसने पीड़ित परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए दिए थे। इसमें से परिजनों ने एक लाख रुपए नजरू को दिए थे। इसका खुलासा होने पर सीबीआई नजरू को संदेह से देख रही थी। वहीं, पीड़ित परिवार का कहना था कि जिसने उनकी मदद की उसको रुपए दिए क्या गलत किया।
आगे पढ़िए क्या होता है लाई डिटेक्टर टेस्ट…