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बलरामपुर अस्पताल में सिरैमिक इंप्‍लांट से हुई पहली सर्जरी

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. बदलती जीवनशैली के बीच दि‍नचर्या के कामों में आ रहे बदलाव की वजह से बुजुर्गों की बीमारि‍यां अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेने लगी हैं। रिहुमेटाईड पॉली अर्थराइटिस से पीड़ित युवती जो चलने-फिरने में असफल थी उसे बलरामपुर अस्‍पताल के हड्डी रोग वि‍भाग ने सिरैमिक इंप्‍लांट से ऑपरेशन कर ठीक कर दिया है।

राजधानी निवासी उपमा प्रजापति बीते कई दिनों से रिहुमेटाईड पॉली अर्थराइटिस बीमारी से परेशान थी। उसके शरीर का हर अंग प्रभावि‍त था। लेकिन बायां कूल्‍हा ज्यादा प्रभावित होने के कारण उसे चलने-फिरने और अन्य दैनिक क्रियाएं करने में काफी परेशानी होती थी। ऐसे में उसका कूल्हा प्रत्यारोपण करना जरुरी था। कूल्हा प्रत्यारोपण करने के बाद अब वह पूरी तरह से स्‍वस्‍थ है। ऑपरेशन के बाद युवती को अस्‍पताल के डीलक्‍स वार्ड में 112 नंबर बेड पर भर्ती कराया गया है। डॉ. एनएन त्रिपाठी के मुताबि‍क, यह रोग अभी तक 60 वर्ष की उम्र वाले लोगों को ही होता था।

सिरैमिक इंप्‍लांट से हुई सर्जरी

बलरामपुर अस्पताल में सिरैमिक ऑन पॉली एथिलील नाम के इंप्‍लांट से होने वाली यह पहली सर्जरी है। अभी तक सीमेंट से बने इंप्‍लांट का प्रयोग होता था। जिनकी आयु काफी कम होती थी। सर्जरी के संबंध में डॉ. एनएन त्रिपाठी ने बताया कि, रिहुमेटाईड पॉली अर्थराइटिस की बीमारी एक ऑटो इमेन्‍यू डिजीज है। जो शरीर में प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण लोगों को अपनी चपेट में ले रही है।

क्यों होती है रिहुमेटाईड पॉली अर्थराइटिस

जब हड्डियों के जोड़ों में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन आ जाती है। इस रोग से जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है। इसे गठिया रोग कहते हैं। पॉली अर्थराइटिस भी इसी का एक प्रकार है। चोकर युक्त आटे की रोटी और छिलके वाली मूंग की दाल का सेवन करने से इस रोग से बचा जा सकता है। इस रोग से बचने के लिए हरी सब्जियों का सेवन भी महत्‍वपूर्ण है।

फाइल फोटो।