लखनऊ. कोर्ट ब्लास्ट के आरोपियों की रिहाई के मामले में काफी समय से प्रयास कर रही यूपी सरकार को आज बाराबंकी कोर्ट ने तगड़ा झटका दिया है। वाराणसी, लखनऊ, फैजाबाद में ब्लास्ट के आरोपी तारिक कासमी और खालिद के ऊपर से मुकदमा वापस लेने की यूपी सरकार की याचिका को कोर्ट ने खारिज किया। अदालत ने कहा कि इन पर गंभीर आरोप लगे हैं, इसलिए केस वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता। न्यायालय में ट्रायल के बाद अगर ये निर्दोष हैं तो बरी होंगे।
उन पर से केस वापसी मामले में बाराबंकी कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां ने कहा है कि यूपी सरकार मामले में ऊपरी अदालत में अपील करेगी। उन्होंने कहा कि बेगुनाहों को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।
दरअसल उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव न्याय विभाग की तरफ से बाराबंकी डीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया था कि तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद के खिलाफ मामला न्याय के हिसाब उचित नहीं होगा, इसलिए इसे वापस लेने की अपील कोर्ट में की जाए। इसी क्रम आज अपर जिला शासकीय अधिवक्ता की तरफ से बाराबंकी की स्पेशल सेशन जज (एससी, एसटी) कल्पना मिश्रा की कोर्ट में केस वापसी की अपील की गई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में चार्जशीट हो चुकी है और ट्रायल अंतिम दौर में है, इसलिए इस समय मामले को वापस लेना जनहित और न्यायहित में उचित नहीं है। ट्रायल पूरा हो जाने पर अगर ये निर्दोष हैं तो अपने आप बरी हो जाएंगे।
तारिक और खालिद पर बाराबंकी में शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम के मामले चल रहे हैं। 23 नवंबर 2007 में लखनऊ, फैजाबाद और बनारस की कचहरी में हुए धमाकों के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने देश के अलग-अलग हिस्से से तारिक कासमी, खालिद मुजाहिद, आफताब आलम, मो. अख्तर और सज्जादुर्रहमान वानी को गिरफ्तार किया। तारिक और खालिद को एसटीएफ ने 22 दिसंबर, 2007 को बाराबंकी रेलवे स्टेशन से भारी मात्रा में विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया।
तारिक पर फैजाबाद और लखनऊ में हुए विस्फोट का मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में तारिक कासमी को गोरखपुर में हुए विस्फोट के षड्यंत्र का आरोपी बनाया गया। तारिक की गिरफ्तारी को लेकर तुरंत ही सवालिया निशान खड़े हो गए थे। एसटीएफ पर आरोप लगा कि 12 दिसंबर 2007 को ही तारिक को आजमगढ़ जिले के उसके पैतृक आवास से उठा लिया गया। 14 तारीख को ही तारिक की गुमशुदगी की तहरीर भी आजमगढ़ के सरायमीर थाने में दी गयी। इससे एसटीएफ द्वारा तारिक की गिरफ्तारी सवालों के घेरे में आ गई।
'अखिलेश सरकार की खुल गई पोल'
आतंकी बम विस्फोट के आरोप में जेल में बंद तारिक का समी और अन्य के मामले को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वापस लिये जाने की याचिका को बाराबंकी कोर्ट द्वारा खारिज किये जाने के निर्णय का भाजपा ने स्वागत किया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ लक्ष्मीकांत बाजपे ई ने कहा कि कोर्ट के निर्णय के बाद अखिलेश सरकार की पोल खुल गयी है कि वह किस तरह आतंकवादियों व अपराधियों को पनाह देने वाली सरकार है।
तभी भाजपा ने पहले ही इसका कड़ा विरोध किया था लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा पार कर चुकी सपा सरकार ने तमाम विरोधों के बावजूद आतंकवादियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी और बाराबंकी जिला प्रशासन को इस सम्बंध में निर्देश भी जारी कर दिया था। बाजपेई ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार बाराबंकी के डीएम और एसपी ने भी शुरुआत में मामले को वापस न लेने की राय शासन को भेजी थी। लेकिन सरकार ने जिला प्रशासन की बात को भी नजरअंदाज कर दिया था।