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बेगम हजरत महल पार्क में लकड़ियों के जलाए जाने से हरे पौधों पर है खतरा

7 वर्ष पहले
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लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में जलाई जा रही हैं लकड़ियां (तस्वीर में)
  • क्या कहते हैं एनआरबीआई के वैज्ञानिक
  • जिम्मेदारियों से बचते हैं अधिकारी
लखनऊ. राजधानी के मशहूर बेगम हजरत महल पार्क में पेड़ों को नीचे ही सूखी लकड़ियां और कूड़े जलाए जा रहे हैं। इसको लेकर नगर निगम के आयुक्त मौखिक शिकायत की बात तो करते हैं, लेकिन वह यह भी कहते हैं कि इस पार्क का काम लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) देखता है। बाकी पार्कों में भी यही हालात है। कार्रवाई क्यों नहीं हुई इसका जवाब उनके पास नहीं है। वह कहते हैं कि इसको लेकर माली और जिम्मेदार लोगों को सख्त निर्देश भी दिया गया है। इस तरह की लापरवाही आगे भी सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी।

पेड़-पौधों के पास आग लगा देने से उनके सूखने का खतरा बढ़ जाता है। इससे आसपास के पौधों को भी नुकसान होता है। इस जानकारी के बाद भी राजधानी के पार्कों में सूखी लकड़ियां जलाई जाती हैं और प्रशासन कार्रवाई करना, तो दूर शिकायत भी सुनने के लिए तैयार नहीं होता है। यही वजह है कि पार्कों में आए दिन पेड़-पौधे सूख रहे हैं और प्रशासन उदासीन है।
क्या कहते हैं एनआरबीआई के वैज्ञानिक
राजधानी की नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) की वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. कमला कुलश्रेष्ठ बताती हैं कि इससे पार्क के छायादार पेड़ों को नुकसान होता है। उनके सूखने का खतरा बढ़ जाता है। इस तरह से पेड़ के नीचे आग लगाने से उन्हें भी दर्द होता है। इसे हम सुन नहीं सकते, केवल कुछ दिन बाद पेड़ को सूखते हुए देख सकते हैं। इससे हादसा भी हो सकता है। समय पर आग नहीं बुझाए जाने पर कहीं भी पकड़ सकती है। यही नहीं, इससे पार्क में मौजूद पेड़ पौधों की सेहत और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
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