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बेनी की नजर में ब्राह्मण बुद्धिमान, पिछड़ी जाति है मूर्ख

8 वर्ष पहले
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लखनऊ. बड़बोले बेनी प्रसाद वर्मा ने एक बार फिर विवादित बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है। यूपी में वोट के लिए ब्राह्मणों रिझाने में लगी बसपा और सपा की कोशिशों के बीच पत्रकारों से बातचीत में बेनी ने कहा कि ब्राह्मण को ब्रह्म का ज्ञान होता है। बैकवर्ड मूर्ख होता है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण को बहुत ज्यादा ज्ञान होता है, वहीं जो बैकवर्ड होता है उसका ज्ञान कम होता है।
केंद्रीय मंत्री वर्मा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ब्राहमण सम्मेलन आयोजित कर अपनी लोहिया विचारधारा से भटक गई है। वहीं उन्होंने सपा और भाजपा पर गठजोड का आरोप लगाते हुए बताया कि 1990 में अयोध्या कांड के समय मस्जिद गिर जानी थी, क्योंकि मुलायम और आडवाणी में बात हुई थी लेकिन कुछ अफसरों को नहीं पता था, लिहाजा गोली चली और मस्जिद बचा ली गई। इसके बाद 2003 में सपा सरकार बनवाने और नरेंद्र मोदी को चुनाव जीतना भी सपा और भाजपा के गठजोड का ही नतीजा था।
बेनी ने कहा कि समाजवादी पार्टी यह दावा करती है कि वह राम मनोहर लोहिया की विचारधार पर चलती है लेकिन उसके काम कुछ और ही साबित करते दिख रहे हैं। लोहिया ने जाति तोडो, समाज जोडो का नारा दिया था लेकिन ब्राहमण सम्मेलन आयोजित कर समाजवादी पार्टी वास्तव में जातिवाद को बढावा दे रही है। इससे पता चलता है कि सपा इस समय दिशाहीन हो गई है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी अपनी विचारधारा से दूर चली गई, वह न तो राज्य न ही देष का विकास कर सकती है।
बेनी ने आरोप लगाया कि ये भाजपा और सपा की मिलीभगत ही थी कि सपा ने गोधरा हादसे के बाद गुजरात में मुस्लिम प्रत्याशियों को खडा किया, जिस कारण से नरेंद्र मोदी को आसान जीत हासिल हुई। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने 1990 के अक्टूबर में लालकृष्ण आडवाणी से बात की थी और बाबरी मस्जिद गिर जानी थी लेकिन कुछ अफसरों को इस वार्तालाप की जानकारी नहीं थी, जिनमें एसएसपी फैजाबाद भी शामिल थे। लिहाजा उन्होंने फायरिंग के आदेश दिए और मस्जिद बचा ली। वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में केंद्रीय फोर्स की केवल एक कंपनी ही तैनात कराई थी और बाकी अन्य कंपनियों को दूसरे जिलों में भेज दिया था। यही नहीं बेनी ने कहा कि 2 नवम्बर 1990 को कारसेवकों पर हुई फायरिंग भी पूरी तरह से प्री प्लांड थी क्योंकि इसमें भाजपा और सपा के राजनीतिक हित थे।
कांग्रेस के प्रांतीय प्रवक्ता वीरेन्द्र मदान ने यहां एक बयान में कहा, 'लोहिया ने सारी जिंदगी जातिविहीन समाज बनाने पर जोर दिया था। लेकिन, उनके आदर्शों, सिद्धांतों तथा विचारों पर चलने का दावा करने वाली सपा द्वारा ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित किए जाने से लोहिया की आत्मा रो रही होगी।' उन्होंने कहा कि लोहिया 'जाति तोड़ो आंदोलन' आयोजित करने पर जोर देते थे लेकि न सपा की कथनी और क रनी का फर्क इसी तथ्य से उभरकर सामने आ जाता है कि यह पार्टी सत्ता के मद में अंधी है।
लोहिया के सिद्धांतों को खुलेआम दरकिनार करके जातिवादी सम्मेलनों का आयोजन कर रही है। मदान ने आरोप लगाया कि यह उत्तर प्रदेश का दुर्भाग्य है कि सपा और बहुजन समाज पार्टी बसपा आपसी राजनीतिक प्रतिस्पद्र्धा के चलते समाज को बांट रही हैं। प्रदेश का सत्तारूढ़ दल जो नीतियां अपना रहा है, उनसे समाज में विभाजनकारी शक्तियां हावी हो जाएंगी और सूबे का विकास रसातल में चला जाएगा। गौरतलब है कि आगामी लोक सभा चुनाव में ब्रामण मतदाताओं को अपने पालने में लाने के मक सद से बसपा द्बारा ब्राह्मण सम्मेलनों की श्रृखला शुरू किए जाने के बाद सपा ने भी इस समुदाय को लुभाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके तहत उसने रविवार को परशुराम जयन्ती पर लखनऊ में ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित किया था।
जब-जब खोला मुंह, तब-तब हुआ बवाल, आगे पढिए बेनी विवादित बयान....