फाइल फोटो: इन पांचों आतंकियों की तलाश में विभिन्न जांच एजेंसियां पिछले ग्यारह दिनों से जुटी हैं।
बिजनौर. बिजनौर से फरार आतंकी तेलंगाना के बैंक डकैती में शामिल हो सकते हैं। इस बात का कयास खुद तेलंगाना पुलिस लगा रही है। इस तथ्य की पुष्टि के लिए तेलंगाना पुलिस ने यूपी पुलिस से सीसीटीवी फुटेज मांगी है। तेलंगाना पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज मांगे जाने की पुष्टि आईजी लॉ एंड आर्डर ए सतीश गणेश ने की है।
पश्चिम बंगाल के वर्दमान जिले में हुए विस्फोट के बाद जांच के लिए पहुंची एनआईए की टीम ने पहले ही संदेह जाहिर किया था कि खंडवा जेल से एक अक्तूबर 2013 की रात फरार हुए आतंकियों ने तेलंगाना केकरीमनगर में फरवरी 2014 में स्टेट बैंक में डकैती डाली थी। इसमें लूटी गई रकम का इस्तेमाल बिजनौर और वर्दवान में बम बनाने के लिए किया जा रहा था। दोनों ही जगह बम बनाते हुए विस्फोट हुआ था। इसमें एक आतंकी घायल भी हुआ था।
आईएसआई से फंडिंग बंद होने के बाद शुरू की लूटपाट
बिजनौर से फरार आतंकियों के बैंक डकैती में शामिल होने के संदेह ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। सिमी आईएम के आतंकियों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से फंडिंग मिलनी बंद हो गई है। इसके चलते आतंकियों ने अपना अलग सेल बना लिया है और उसका नाम दिया है 'माल-ए-गनीमत।' इसका मतलब जिहाद के लिए लोगों से पैसा इकट्ठा करना है। इसी के जरिए वे यहां लूट-डकैती को अंजाम देकर रकम इकट्ठा करते थे।
पटना ब्लास्ट के लिए 'माल-ए-गनीमत' से आया था पैसा
पटना ब्लास्ट के मामले में रांची से पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि उन्हें पटना में मोदी की रैली के दौरान बम ब्लास्ट करने के लिए पांच लाख रुपए मिले थे। यह पैसा उन्हें भोपाल में हुई मन्नपुरम गोल्ड से ढाई करोड़ की लूटी रकम से मिला था। आतंकियों को यह पैसा खंडवा जेल से फरार आतंकी अबू फैसल ने उन्हें दिया था।
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