प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ. यूपी का खुफिया विभाग लगातार फेल साबित हो जा रहा है। एक के बाद एक घटनाओं ने खुफिया विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चाहे उपचुनाव से एक दिन पहले बिजनौर में ब्लास्ट का मामला हो या फिर मेरठ से आईएसआई एजेंट की गिरफ्तारी हो या फिर सहारनपुर में आईएम के आतंकी एजाज की गिरफ्तारी हो। सब जगह यूपी की खुफिया एजेंसी फेल साबित हुई है।
खुफिया एजेंसियों का फेल होने का सिलसिला यही से नहीं शुरू हुआ बल्कि एक के बाद एक हो रही सांप्रदायिक झड़प भी खुफिया एजेंसियों की असफलता की कहानी खुद बा खुद बयां कर रही हैं। यूपी के शीर्ष पदों पर बैठे पुलिस के उच्चाधिकारी भी अब इस बात को मान रहे हैं कि कहीं न कहीं कोई कमी जरूर है। इससे साबित होता है कि खुफिया तंत्र एक दम कमजोर साबित होता जा रहा है।
वारदात होने के बाद मिलती है जानकारी
सूबे में एक के बाद एक घटनाएं सामने आ रही हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मानते हैं कि विभाग के फेल होने का कारण आराम तलब पसंद अफसर अब सिर्फ तकनीक पर निर्भर हो गए हैं। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि पहले खुफिया विभाग के लोग सार्वजनिक स्थलों पर जाकर लोगों से मिलते थे सूचनाएं इकठ्ठा करते थे। इसलिए वह सफल हुआ करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। यही वजह है कि जब वारदात हो जाती है तब उन्हें पता चलता है।
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