लखनऊ. यूपी उपचुनावों में मिली करारी हार के बाद बीजेपी में लगातार मंथन जारी है। प्रभारियों की बैठक और विधानमंडल दल की बैठक के बाद मंगलवार को राज्य पदाधिकारियों की बैठक हुई। मंथन में उपचुनावों में हुई हार का कारण तलाशा गया। ऐसे में बीजेपी यूपी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा यह रूटीन बैठक है।
दरअसल, इस बयान के इतर अगर देखा जाए तो यह रूटीन बैठक नहीं है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने उपचुनावों में हुई हार की रिपोर्ट राज्य के जिम्मेदार पदाधिकारियों से मांगी है। उपचुनाव में चारों खाने चित होने के बाद से लक्ष्मीकांत वाजपेयी और यूपी महामंत्री सुनील बंसल हाशिये पर आ गए हैं। यही वजह है कि अपने चहेते पदाधिकारियों को अब ये नेता सहेजने में लगे हुए हैं क्योंकि जल्द से जल्द केंद्रीय नेतृत्व को समीक्षा रिपोर्ट सौंपनी है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्रीय नेतृत्व कड़े कदम उठा सकता है।
साल 2012 की अपेक्षा मिले ज्यादा वोट
यूपी उपचुनाव में बीजेपी भले ही हार हो गई हो लेकिन अच्छी खबर ये है कि जिन सीटों पर वो हारी है उसे साल 2012 विधानसभा चुनावों की अपेक्षा अधिक वोट मिले हैं। बीजेपी यूपी अध्यक्ष स्वयं को बचाने के लिए इसी बात को आधार बनाने की सोच रहे हैं। सूत्रों की मानें तो, बीजेपी यूपी अध्यक्ष केंद्रीय नेतृत्व के सामने यह प्रस्ताव रखेंगे कि 'यदि उपचुनाव में बसपा भी रहती तो तो शायद करारी हार न मिली होती।' ऐसे में बसपा का पूरा वोट सपा को ट्रांसफर हो गया।
बीजेपी का लक्ष्य 2017 विधानसभा चुनाव
सूत्रों की मानें तो, बीजेपी का लक्ष्य साल 2017 में यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को जीतना है। ऐसे में उपचुनाव में मिली करारी हार का कारण केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष सही से पेश करना होगा। लक्ष्मीकांत वाजपेयी की मानें तो भीतरीघात और ध्रुवीकरण के कारण ये हार मिली है। देखना ये है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए किसे अहम जिममेदारी मिलेगी?
फोटो: राज्य के पदाधिकारियों के साथ बैठक करते हुए यूपी बीजेपी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी।