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संचार-व्यवस्था सुधारने के लिए अब फील्ड वर्क करेंगे बीएसएनएल के अफसर

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. देश की दूरसंचार-व्यवस्था संभालने वाले बीएसएनएल पर भी मोदी फैक्टर का असर दिखना शुरू हो गया है। एसी कमरों में आराम करने वाले विभाग के अधिकारी अब हर महीने के दो दिन संबंधित जिलों में रहेंगे। इस दौरान संचार-व्यवस्था की जांच करेंगे। जांज के बाद उसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने को कहा गया है। मुख्यालय से सभी मंडलों अधिकारियों की संयुक्त रिपोर्ट महीने के अंत में दूरसंचार मंत्रालय को भेजी जाएगी।
उत्तर प्रदेश पूर्वी परिमंडल में आने वाले जिलों में मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता किस तरह की है? टेलिफोन और ब्रॉडबैंड सेवाओं की क्या हालत है? नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (नोफेन) प्रोजक्ट का कार्य किस स्तर पर चल रहा है? इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए अब बीएसएनएल के आईटीएस अधिकारी अपने फिल्ड में उतरेंगे। इस दौरान वह संबंधित जिले की सेवाओं की रिपोर्ट सीजीएम के माध्यम से सीधे संचार मंत्री को सौपेंगे।
संचार मंत्रालय ने जारी किए आदेश
वरिष्ठ आईटीएस अधिकारियों का फील्ड प्रवास उपर से आए आदेश के कारण हो रहा है। यह आदेश सभी सर्किलों को सीधे संचार मंत्रालय से जारी हुआ है। इसमें कहा गया है कि सर्किल मुख्यालय में तैनात सभी वरिष्ठ अधिकारी हर महीने दो दिन तक जिले में रहकर बीएसएनएल सेवाओं की गुणवत्ता की जांच करेंगे और इसकी रिपोर्ट संचार मंत्रालय को भेजेंगे।
आंकड़ेबाजी के खेल से नहीं चलेगा काम
मोदी की पहली तीन प्राथमिकताओं में शामिल होने के कारण बीएसएनएल का महत्व बढ़ने लगा है। पीएम की प्राथमिकता को देखते हुए केंद्रीय संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बीएसएनएल प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह बीएसएनएल की सभी सेवाओं की डेली, साप्ताहिक, मासिक रिपोर्ट तैयार करें। बीएसएनएल को संभालने वाले आईटीएस (इंडियन टेलीकॉम सर्विस) अफसरों को अहसास हो गया है कि अब आकंड़ेबाजी नहीं चलगी। यही कारण है कि खस्ताहाल नेटवर्क को सुधारने के लिए अफसर फील्ड में जा रहे हैं।
डीजीएम और जीएम स्तर के अधिकारी भी उतरे मैदान में
सीजीएम सुनील परिहार ने बताया कि सभी आला अधिकारियों ने गुणवत्ता जांचने का चार्ट जारी कर दिया है। अब संबंधित अधिकारी जिलों में जाकर सेवाओं की समीक्षा करेंगे। हर महीने इसकी रिपोर्ट संचार मंत्रालय को देने को कहा गया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर।