लखनऊ. मायावती सरकार में हुए कथित लैकफेड घोटाले में सालों से जेल में बंद चार पूर्व मंत्रियों सहित सात अभियुक्तों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया। कोर्ट ने पाया कि इन सातों के खिलाफ की गई विवेचना दबाव और लापरवाही में की गई थी।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष जज लल्लू सिंह ने इसी केस के सात अन्य आरोपितों को दोषी सिद्ध किया है। कोर्ट ने इन्हें सजा के बिंदु पर सुनने के लिए 11 फरवरी को जेल से तलब किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने गवाही के दौरान 14 अन्य इंजीनियरों को भी लैकफेड घोटाले में प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए उन्हें विचारण के लिए तलब कर लिया है।
कौन-कौन बरी हुआ
कोर्ट से बरी होने वाले पूर्व मंत्रियेां में बाबू सिंह कुशवाहा, बादशाह सिंह, रंगनाथ मिश्रा और चंद्रदेव राम यादव शामिल हैं। इसके अलावा रिटायर्ड आईएएस अधिकारी रामबोध मौर्या सहित प्रवीण सिंह और दीपक दवे को भी कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
कौन-कौन पाए गए दोषी
दोषी पाए गए आरोपितों में गोविंद शरण श्रीवास्तव, अनिल कुमार अग्रवाल, संजय कुमार, अजय देाहरे, डीके साहू, पंकज त्रिपाठी और बीपी. सिंह शामिल हैं। कोर्ट ने इनके खिलाफ घोटाले में लिप्त होने के पर्याप्त सबूत पाए हैं। इन्हें दो दिन बाद सजा सुनाई जाएगी।
14 इंजिनियर बनाए गए अभियुक्त
ट्रॉयल के दौरान रिकॉर्ड गवाहों से कोर्ट को घोटाले में 14 इंजीनियरों की संलिप्तता के सबूत मिले हैं। इन्हें विवेचना में अभियुक्त नहीं बनाया गया था। ये इंजीनियर राम किशोर मिश्र, राजेश कुमार सिंह, मनेाज कुमार तिवारी, रविंदर पाल सिंह, प्रमोद कुमार सिंह, सत्येंद्र बहादुर सिंह, प्रभात कुमार बाजपेई, अवधेश कुमार, प्रणय कुमार त्रिपाठी,
सुशील कुमार ओझा, ओमकार सिंह, नीरज सिंह, धर्मेंद्र कुमार त्रिपाठी और सिद्धनाथ राय शामिल हैं। अब इनके खिलाफ भी केस चलेगा।
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