फाइल फोटोः राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी फैजाबाद।
लखनऊ. राज्य विश्वविद्यालयों को मिलने वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को लेकर नई गाइड लाइन जारी की गई है। इसके तहत एक ही सत्र में किसी विश्वविद्यालय के एक ही विभाग को यह दर्जा दिया जाएगा। इसके लिए यदि दो विश्वविदयालयों की ओर से एक ही विभाग के लिए प्रस्ताव पाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में उत्कृष्ट प्रस्ताव पर ही परिषद अपनी मुहर लगाएगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा उन्हीं विभागों को दिया जाएगा, जो नियमित कोर्स का संचालन करते हों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्वीकृत फंडिंग संस्था सीएसआईआर, डीएसटी जैसे संस्थानों से दो वर्ष तक अनुदान मिला हो।
नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों के भेजे गए वही प्रस्ताव मान्य होंगे, जिनके संचालन से शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार और नवीन रिसर्च को बढ़ावा देने के योग्य हो। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए भेजे जाने वाले प्रस्तावों में 50 फीसदी लाभ साइंस के लिए रखा गया है। एक विश्वविद्यालय एक सत्र में केवल दो ही विभागों को चिन्हित कर प्रस्ताव भेज सकेंगे, जिन विभागों को शासन की ओर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा मिलने के बाद विभाग अपनी लैब बना सकेंगे। इस लैब के जरिए नवीन शोधों के लिए विभागों के ऊपर निर्भर है कि वे आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की भी मदद ले सकते हैं।
रिसर्च के लिए विभाग कर सकेंगे डिग्री कॉलेजों को गाइड
चिन्हित एरिया में रिसर्च एवं शैक्षिक गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से डिग्री कॉलेजों का मार्गदर्शन कर सकेंगे। इन शोधों में वे शामिल किए जाएंगे, जिनके पूरा होने पर समाज या फिर देश का हित निहित हो। विभागों की तरफ से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव का मूल्यांकन यूनिवर्सिटी स्तर पर ही किया जाएगा।
इसके लिए यूनिवर्सिटी के कुलपति की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित होगी, जिसमें सम्बन्धित विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष, रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी शामिल होंगे। कमेटी इन प्रस्तावों पर गौर करने के बाद ही शासन को अनुमोदन के लिए प्रस्ताव भेज सकेगी। यूनिवर्सिटी स्तर पर 31 मई तक उच्च शिक्षा परिषद को प्रस्ताव उपलब्ध कराना अनिवार्य है, जबकि इन प्रस्तावों का उच्च शिक्षा परिषद के मू्ल्यांकन करने के बाद 30 जून तक शासन को भेजा जाएगा।
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