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न्‍यायाधीशों ने कहा- प्रभावशाली अंतरराष्‍ट्रीय कानून से ही वि‍श्‍व में शांति संभव

7 वर्ष पहले
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फोटो: विश्व एकता के लि‍ए मार्च नि‍कालते अंतरराष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन में शामि‍ल लोग।
लखनऊ. शनि‍वार को लखनऊ में आयोजित विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 15वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामि‍ल चार देशों के पूर्व राष्ट्रपतियों और 60 देशों के मुख्य न्यायाधीश और कानूनवि‍दों ने कहा कि‍ प्रभावशाली अंतरराष्‍ट्रीय कानून से ही वि‍श्‍व में शांति और वि‍कास संभव है। इस दौरान सम्‍मेलन में उपस्‍थि‍त सभी अति‍थि‍यों ने बच्चों के सुंदर और सुरक्षित भविष्य के लिए प्रभावशाली अंतरराष्‍ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था के माध्यम से विश्व को एकताबद्ध करने की जोरदार मांग की। इसके बाद यहां मौजूद सभी न्यायविदों, कानूनविदों और विश्व शांति‍ के समर्थकों ने एक विशाल ‘विश्व एकता मार्च’ नि‍कालकर विश्व के ढाई अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य का अलख जगाया।
लखनऊ के सिटी मॉन्‍टेसरी स्कूल (सीएमएस) में इस सम्‍मेलन का शुभारंभ भारत सरकार के राज्‍यमंत्री मुख्य अतिथि मुख्तार अब्बास नकवी ने दीप प्रज्‍ज्‍वलि‍त कर कि‍या। इस दौरान उन्‍होंने कहा कि‍ दुनिया तमाम वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है। स्थापित सामाजिक व्यवस्थाओं पर आतंकवाद का खतरा मडरा रहा है। ऐसे में भारतीय संविधान और खासकर अनुच्छेद 51 दुनिया को नई राह दिखा सकता है। भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की नीति पूरी दुनिया को यह अहसास कराती है कि भारत केवल सबसे बड़ा प्रजातंत्र ही नहीं बल्कि सबसे बड़ी प्रजातांत्रि‍क सोच का देश है। इसी देश में अंतरराष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन की शुरुआत हुई और यही देश विश्व के सभी देशों को ‘विश्व एकता’ के मुकाम पर पहुंचाएगा।
वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रोमानिया के पूर्व राष्ट्रपति एमिल कान्सटेंटिंजू ने कहा कि बच्चों के अधिकारों को लेकर जो आवाज पूरे विश्व में बुलंद की गई है, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि विश्व में अराजकता, आतंकवाद और अन्य अपराधों की रोकथाम के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था बेहद जरूरी है।
समस्याओं का मानवीय अधिकारों पर सीधा प्रभाव
न्यायमूर्ति कार्ल अशोक सिंह, चांसलर ऑफ ज्यूडिशियरी, गुयाना ने कहा कि विश्वव्यापी समस्याएं जैसे आतंकवाद, युद्ध, शोषण, जल और पर्यावरण की अन्य समस्याओं का मानवीय अधिकारों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा भी ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखा, प्रदूषण आदि‍ ऐसी समस्याएं हैं जिनका समाधान सामूहिक प्रयास से ही संभव है। उन्‍होंने कहा कि‍ हम सभी की यह जिम्मेदारी बनती है कि हम आने वाली पीढ़ि‍यों को एक स्वच्छ समाज दें जिसमें वे स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकें। 15 साल से यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। आज हम लोगों को मिलकर कदम उठाने पड़ेंगे।
आगे पढ़ि‍ए सम्मेलन की रिसेप्शन कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एपी मिश्रा ने की एक विश्व संसद बनाने की अपील