फोटो: राजभवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल राम नाईक।
लखनऊ. 'सर, यहां बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। बिजली नहीं है। हैंडपंप नहीं होने से पीने का पानी भी नहीं मिलता। पढ़ाई के दौरान टॉयलेट लगी हो, तो बाहर जाना पड़ता है। पढ़ाने के लिए टीचर हमेशा नहीं आते। एक ही रूम में एक साथ कई क्लास चलते हैं। यह कहना है कस्बों में रहने वाले और सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का। सोमवार को बच्चों ने यूपी के राज्यपाल राम नाईक को प्राइमरी स्कूलों की हकीकत दिखाई।
सोमवार को राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में राम नाईक ने कस्बों में रहने वाले बच्चों से मुलाकात की। स्वयं सेवी संस्था विज्ञान फाउंडेशन ने इसका आयोजन किया। इसमें शहर भर के कस्बों में रहने वाले स्कूली बच्चे शामिल हुए। इस दौरान राज्यपाल ने उनसे बात की। साथ ही स्कूलों में पढ़ाई के दौरान होने वाली उनकी परेशानियों को भी सुना।
स्कूलों में नहीं है सुविधाएं
बच्चों ने राज्यपाल राम नाईक को बताया कि उनके स्कूलों में कई दिक्कतें हैं। उनके बैठने के लिए कुर्सी-मेज नहीं है। चटाई पर बैठकर वह पढ़ाई करते हैं। स्कूल में पीने के पानी का कोई साधन नहीं है। टॉयलेट की कोई व्यवस्था नहीं होने से उन्हें मजबूरन बाहर जाना पड़ता है। बच्चों की इन शिकायतों को सुनकर राज्यपाल हैरान रह गए।
पीएम और सीएम का नाम नहीं बता पाए बच्चे
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने बच्चों के ज्ञान को परखने की भी कोशिश की। उन्होंने बच्चों से पीएम और सीएम का नाम पुछा। दोनों में से किसी का भी नाम बच्चे नहीं बता पाए। यही नहीं, राज्यपाल ने अपना कार्यक्षेत्र भी बच्चों से पूछा, लेकिन वह निराश ही हुए।
आगे की स्लाइड में पढ़िए, राज्यपाल ने प्राइमरी स्कूलों की बदहाली के बारे में क्या कहा...