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पहले से ज्‍यादा फायदेमंद होगी तुलसी, सीमैप ने खोज नि‍काला जीनोम सि‍क्‍वेंस

जीनोम सीक्‍वेंस की पहचान के बाद अब तुलसी के औषधीय गुणों को बढ़ाने में मदद मि‍लेगी।

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2015, 08:00 AM IST
तुलसी। तुलसी।
लखनऊ. धार्मि‍क ग्रंथों से लेकर घर के आंगन में पाई जाने वाली तुलसी अब आंगन तक ही सीमि‍त नहीं रही। वेदों में वि‍ष्‍णुप्रि‍या के नाम से पहचाने जाने वाली तुलसी का पूरे वि‍श्‍व में पहली बार केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्‍थान (सीएसआईआर) लखनऊ ने जीनोम सीक्‍वेंस खोज निकला है। जीनोम सीक्‍वेंस की पहचान के बाद अब तुलसी के औषधीय गुणों को बढ़ाने में मदद मि‍लेगी। सीमैप की इस खोज के लि‍ए केंद्रीय मानव संसाधन वि‍कास मंत्री स्‍मृति ईरानी ने भी बधाई दी है।
तुलसी को प्राकृतिक औषधियों की जननी माना जाता है। इसे हर रूप में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध आदि औषधीय परंपराओं में उपयोग किया जाता रहा है। यह श्‍वासनली की सूजन, दमा, मलेरिया, डायरिया, चर्म रोग, गठिया, आंखों के रोगों, बुखार आदि के लिए रामबाण है। इसे कैंसररोधी, मधुमेहरोधी, दर्द निवारक आदि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
तुलसी के जीनोम सीक्‍वेंस को लेकर सीमैप के नि‍देशक डॉ. अनि‍ल कुमार त्रि‍पाठी और बायो साइंटि‍स्‍ट डॉ. अजीत कुमार शासनी के निर्देशन में जीनोटाइपि‍क ऑर्गनाइजेशन बेंगलुरु के सहयोग से चली तीन साल तक की रि‍सर्च के बाद यह सफलता हासि‍ल हुई है। रि‍सर्च के दौरान तुलसी प्‍लांट के पौधे से 53,480 जींस की खोज हुई है। इनमें 22,270 जींस यूनि‍क हैं। कुछ जींस ऐसे भी हैं जि‍नके कॉम्‍बिनेशन से बायोकेमि‍कल बनाए जा सकते हैं।
जीनोम सीक्‍वेंस से औषधीय गुणों को बढ़ाने का मि‍लेगा रास्‍ता
जीनोम सीक्‍वेंस की खोज को लेकर संस्‍थान के नि‍देशक डॉ. अनि‍ल कुमार त्रि‍पाठी ने बताया कि केमि‍कल सि‍न्‍थेसि‍स के जरि‍ए औषधीय उत्‍पादन को बढ़ाने में मदद मि‍लेगी। उन्‍होंने कहा कि इसके जरि‍ए कम्‍पाउंड बनाने की प्रक्रि‍या का पता लगाया जा सकता है। साथ ही कौन सी वैरायटी में कौन सा जीन सहायक है, इसकी जानकारी मि‍ल सकेगी। इसमें डीनए कोड बुक का पता लगाया जा सकता है। क्‍योंकि जीनोम वातावरण के आधार पर काम करता है। इसके जरि‍ए ट्रांसजेनि‍क परि‍वर्तन में भी सहायता मि‍लेगी। वहीं, पौधे के औषधीय गुण को बढ़ाने में भी मदद मि‍लेगी।
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लखनऊ स्थित सीमैप। लखनऊ स्थित सीमैप।
मेडि‍शनल प्रॉपर्टीज को बढ़ाने में मि‍लेगी मदद
 
साइंटि‍स्‍ट डॉ. अजीत कुमार शासनी ने बताया कि तुलसी में दो कम्‍पाउंड फि‍नायल प्रोपेनाइड्स और टर्पेनाइड्स पाए जाते हैं, जि‍नमें औषधीय गुण शामि‍ल होते हैं। जीनोम सि‍क्‍वेंस के द्वारा अब वो रास्‍ते खुले हैं, जि‍नसे हम यह पता कर सकते हैं कि कौन से ऐसे जीन हैं जो पौधे में औषधीय गुण को पैदा करते हैं। इन कम्‍पाउण्‍ड में मॉलेक्‍यूल पाए जाते हैं, जि‍नसे जींस के कॉम्‍बिनेशन से भी नए बायोकेमि‍कल बना सकते हैं। यह बीमारि‍यों के इलाज में मददगार साबि‍त होंगे।
 
इसके अलावा जीन की स्‍टडी पूरी होने के बाद मेडि‍शनल प्रॉपर्टीज के जरि‍ए बीमारि‍यों को दूर करने के लि‍ए औषधीय गुणों को बढ़ा-घटा सकते हैं। उन्‍होंने बताया कि इसके माध्‍यम से बायोथिंसेसि‍स के बीच कौन से ऐसे मॉलेक्‍यूल हैं, जि‍नकी अभी तक हम पहचान नहीं कर सके हैं, उनको जींस के जरि‍ए जान सकते हैं।
 
केमि‍कल सि‍न्‍थ्रोसि‍स को समझने में मि‍लेगी मदद
 
रि‍सर्च की टीम में शामि‍ल 10 सदस्‍यों में से एक शुभ्रा रस्‍तोगी ने बताया कि अभी तक राइस, टमाटर, चने के जीनोम सीक्‍वेंस को हासि‍ल करने में सफलता मि‍ली थी। तुलसी को लेकर इस तरह की रि‍सर्च पहली बार की गई है। उन्‍होंने कहा कि तुलसी के अलग-अलग प्रकार हैं। जीनोम सीक्‍वेंस हासि‍ल होने के बाद कौन सी वैरायटी में कौन सा जींस काम कर रहा है, इसकी जानकारी मि‍ल सकेगी।
 
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खांसी-जुकाम में तुलसी है सबसे फायदेमंद। खांसी-जुकाम में तुलसी है सबसे फायदेमंद।
तुलसी के प्रकार
 
तुलसी एक (ऑसीमम सैक्टम), एक द्वी बीजपत्रीय और शाकीय, औषधीय पौधा होता है। यह झाड़ी के रूप में उगता है और एक से तीन फुट ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां बैगनी आभा वाली हल्के रोएं से ढकी होती हैं। पत्तियां एक से दो इंच लंबी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं। तुलसी के पौधे गर्मी और बारिश के मौसम में अधि‍क हरे भरे रहते हैं।
 
वहीं, जाड़े में इसकी कमी देखने को मि‍लती है, इसलि‍ए ठंढे देशों में तुलसी नहीं होती है। तुलसी की कई प्रजाति‍यां होती हैं। इनमें ऑसीमम अमेरिकन (काली तुलसी), ऑसीमम वेसिलिकम (मरुआ तुलसी), ऑसीमम वेसिलिकम मिनिमम, आसीमम ग्रेटिसिकम (राम तुलसी/वन तुलसी), ऑसीमम किलिमण्डचेरिकम (कपूर तुलसी) प्रमुख रूप से हैं।
 
ऑसीमम सैक्‍टम को माना जाता है पवि‍त्र
 
इनमें ऑसीमम सैक्‍टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है। इसकी भी दो प्रजातियां होती हैं। इनमें श्री तुलसी जिसकी पत्तियां हरी होती हैं और कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियां निलाभ-कुछ बैगनी रंग की होती हैं। श्री तुलसी के पत्र और शाखाएं सफेद होते हैं, जबकि कृष्ण तुलसी के पत्रादि कृष्ण रंग के होते हैं। गुण, धर्म की दृष्टि से काली तुलसी को ही श्रेष्ठ माना गया है।
 
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वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार शासनी, सीमैप के निदेशक एके त्रिपाठी ने खोजा है तुलसी का जीनोम सि‍क्‍वेंस। वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार शासनी, सीमैप के निदेशक एके त्रिपाठी ने खोजा है तुलसी का जीनोम सि‍क्‍वेंस।
तुलसी में पाए जाते हैं कई केमि‍कल कम्‍पाउंड
 
तुलसी में अनेक जैव सक्रिय रसायन पाए जाते हैं, जिनमें ट्रैनिन, सैवोनिन, ग्लाइकोसाइड और एल्केलाइड्स प्रमुख हैं। अभी भी पूरी तरह से इनका विश्लेषण नहीं हो सका है, लेकि‍न जीनोम सीक्‍वेंस की खोज के बाद यह रास्‍ता आसान हो गया है। इसके तेल में करीब 71 फीसदी यूजीनॉल, बीस फीसदी यूजीनॉल मिथाइल ईथर और तीन फीसदी कार्वाकोल होता है।
 
श्री तुलसी में श्यामा की अपेक्षा कुछ अधिक तेल होता है। इस तेल का सापेक्षिक घनत्व भी कुछ अधिक होता है। तेल के अतिरिक्त पत्रों में करीब 83 मिलीग्राम फीसदी विटामिन सी और 2.5 मिलीग्राम फीसदी कैरोटीन होता है। तुलसी के बीजों में हरे पीले रंग का तेल करीब 17.8 फीसदी की मात्रा में पाया जाता है।
 
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श्‍वास संबंधी बीमारी में तुलसी है फायदेमंद। श्‍वास संबंधी बीमारी में तुलसी है फायदेमंद।
तुलसी का औषधीय महत्‍व
 
भारतीय संस्कृति में तुलसी को पूजनीय माना जाता है, धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ तुलसी औषधीय गुणों से भी भरपूर है। आयुर्वेद में तो तुलसी को उसके औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व दिया गया है। तुलसी ऐसी औषधि है, जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है। इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खांसी, दंत रोग और श्वास संबंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है।
 
यह एंटीकैंसर, एंटीबायोटि‍क, एनॉलजेसि‍क, एंटीफंगल, एंटीमाइक्रोबायॅल, हेप्‍टोप्रोटेक्‍टि‍व, कॉर्डि‍योप्रोटेक्‍टि‍व, क्रोनि‍क फीवर, स्‍कीन डि‍जीज, अस्‍थमा, मलेरि‍या, डायरि‍या, अर्थराइटि‍स, ब्रोन्‍कि‍यल जैसी बीमारि‍यों को दूर करने के काम में आती है।
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तुलसी।तुलसी।
लखनऊ स्थित सीमैप।लखनऊ स्थित सीमैप।
खांसी-जुकाम में तुलसी है सबसे फायदेमंद।खांसी-जुकाम में तुलसी है सबसे फायदेमंद।
वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार शासनी, सीमैप के निदेशक एके त्रिपाठी ने खोजा है तुलसी का जीनोम सि‍क्‍वेंस।वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार शासनी, सीमैप के निदेशक एके त्रिपाठी ने खोजा है तुलसी का जीनोम सि‍क्‍वेंस।
श्‍वास संबंधी बीमारी में तुलसी है फायदेमंद।श्‍वास संबंधी बीमारी में तुलसी है फायदेमंद।
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