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ये संडे को संवारते हैं शहर की सूरत, कोई इंजीनियर तो कई MNC में करता है जॉब

पिछले 20 सप्ताह से पोस्टर हटाकर दीवारों और खंभों को साफ कर रहे हैं। 'क्योंकि शहर है आपका' से राजधानी के करीब 600 वॉलेंटियर्स जुड़े हुए हैं।

Dainik Bhaskar

Aug 02, 2015, 04:33 PM IST
दीवारों से पोस्टर हटाते वॉलेंटियर्स। दीवारों से पोस्टर हटाते वॉलेंटियर्स।
लखनऊ. नवाबों की नगरी में भी क्लब कल्चर कम नहीं है। शनिवार को देर रात तक पार्टी करना और फिर संडे को देर से जागना अब आदत में शुमार हो चुका है, लेकिन इस शहर में कुछ ऐसे भी युवा हैं, जिनका शौक अपने शहर की तस्वीर बदलना है। वो चाहते हैं कि सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि उनके शहर का हर कोना भी चमकना चाहिए। लखनऊ के ये युवा संडे को जल्दी उठते हैं और दोपहर तक शहर की गंदगी साफ करते हैं। पिछले 20 हफ्तों से ये पोस्टर हटाकर दीवारों और खंभों को साफ कर रहे हैं।
क्योंकि शहर है आपका
ये एनजीओ लखनऊ सोसाइटी का इनिसिएटिव है 'क्योंकि शहर है आपका'। इससे राजधानी के करीब 600 वॉलेंटियर्स जुड़े हुए हैं। कोई डॉक्टर है तो कोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर। कुछ तो एमएनसी में भी काम करते हैं। साथ ही कई स्टूडेंट्स भी अब इस मिशन का हिस्सा बन चुके हैं। सब मिलकर हर संडे लखनऊ के दाग-धब्बे साफ करते हैं। हर रविवार एक ग्रुप किसी एक स्पॉट की दीवारों को साफ करता है। सफाई के बाद दाग मिटाने के लिए वहां पेंटिंग भी करते हैं।
नया है सफाई का फॉर्मूला
ऐसा नहीं है कि किसी जगह की सफाई कर दी तो अब वहां गंदगी नहीं होगी। अगले ही दिन वहां फिर से पोस्टर चिपका दिए जाते हैं, लेकिन जोशीले युवाओं का ये ग्रुप 'तू डाल-डाल तो मैं पात-पात' की तर्ज पर काम करता है। ये फिर जाकर पोस्टर्स हटा देते हैं। ग्रुप ये काम तब तक करता है, जब तक उनकी जीत नहीं हो जाती।
ऐसे सुधारता है ये ग्रुप
पोस्टर्स हटाने से पहले इनकी फोटोग्राफी कर ली जाती है। इसे ग्रुप के फेसबुक पेज पर अपलोड कर दिया जाता है। इसे नाम दिया जाता है 'सिटी इडियट्स'। इसके बाद शुरू होता है फोन पर फोन का सिलसिला। ग्रुप के मेंबर पोस्टर पर दिए गए नंबर पर फोन करते हैं। एक के बाद एक सभी फोन करके बताते हैं कि वे किस तरह शहर को गंदा कर रहे हैं और आगे से ऐसा न करें। इस तरह एक आदमी के पास सैकड़ों फोन कॉल्स पहुंच जाती हैं और शर्मिंदा होकर वो खुद की पोस्टर्स लगवाना छोड़ देता है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्या है इन युवाओं की सोच...
हर संडे शहर में किसी स्थान पर इसी तरह जुटे होते हैं ये युवा। हर संडे शहर में किसी स्थान पर इसी तरह जुटे होते हैं ये युवा।
आखिर आराम की बजाय क्यों करते हैं काम 
'क्योंकि शहर है आपका' इनिसिएटिव से जुड़े जयदीप पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर हैं। सप्ताह भर काम करने के बाद आखिर संडे को आराम क्यों नहीं करते? दीवारों को साफ करके क्या मिलता है? इन सवालों पर मुस्कुराते हुए कहते हैं,'देश और समाज की सेवा करनी चाहिए चाहे किसी भी रूप में करें। आराम में क्या रखा है। हम तो सप्ताह भर एक्साइटमेंट से संडे का इंतजार करते हैं।' 
 
शहर हमारा है, केयर करेगा कौन ?
मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े सौमित्र और एमसीए स्टूडेंट आकांक्षा कहती हैं,' आखिर ये शहर हमारा है। हम इसकी केयर नहीं करेंगे तो कोई बाहर से इसकी देखभाल करने नहीं आएगा। हम किसी दूसरे के भरोसे क्यों रहेें। हम आगे बढ़ेंगे तो दूसरे लोग भी साथ आएंगे। हर दिन कारवां बढ़ रहा है।'
 
आरटीआई का जवाब नहीं 
ग्रुप के हेड शमीम आरजू ने बताया कि ये काम वैसे तो नगर निगम का है, लेकिन शायद उन्हें इसकी परवाह नहीं। नगर निगम दावे अधिक करता है और काम कम। एक आरटीआई आवेदन के जरिए ये पूछा गया था कि अभी तक उन्होंने एक साल में कितने ऐसे लोगों पर कार्रवाई की और कितना चालान काटा। दो महीने बीत जाने के बाद भी आरटीआई का जवाब नहीं मिला है। dainikbhaskar.com ने इस संबंध में बात करने के लिए नगर आयुक्त उदय राज सिंह को कई बार फोन किया, लेकिन उन्हें शायद फोन उठाने की भी फुर्सत नहीं थी। 
 
इन जगहों पर की सफाई
ये लोग अब तक चारबाग, हजरतगंज, मिठाई वाला चौराहा, चिड़ियाघर, पॉलीटेक्निक चौराहा, हुसड़िया चौराहा, ऊर्जा भवन जैसी तमाम महत्वपूर्ण जगहों को चमका चुके हैं।  
 
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्या है नियम...
 
cleaning campaign of youths in lucknow on sunday kyunki sehar hai aapka
गैर कानूनी है बिना अनुमति पोस्टर चिपकाना
दीवारों, सड़कों, फ्लाइओवर या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर या प्रचार सामग्री चिपकाना गैर कानूनी है। इसके लिए नगर निगम से अनुमति लेनी होती है। साथ ही निश्चित राशि का भुगतान भी करना होता है। नगर-निगम प्रचार के लिए कुछ स्थान निर्धारित करता है, जहां पोस्टर या बैनर लगाए जा सकते हैं। बिना अनुमति पोस्टर लगाने पर जुर्माना किया जाता है।
देखिए कैसी बदली दीवार की रंगत वॉलेंटियर्स के पहुंचने के बाद। देखिए कैसी बदली दीवार की रंगत वॉलेंटियर्स के पहुंचने के बाद।
दीवार को रंगते वॉलेंटियर्स। दीवार को रंगते वॉलेंटियर्स।
फ्लाइओवर के खंभे को मिल गया नया रूप। फ्लाइओवर के खंभे को मिल गया नया रूप।
कहीं भी नहीं छोड़ते पोस्टर्स। कहीं भी नहीं छोड़ते पोस्टर्स।
बारीकी से काम करते हैं ये वॉलेंटियर्स। बारीकी से काम करते हैं ये वॉलेंटियर्स।
'क्योंकि शहर है आपका' ग्रुप के वॉलेंटियर्स। 'क्योंकि शहर है आपका' ग्रुप के वॉलेंटियर्स।
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दीवारों से पोस्टर हटाते वॉलेंटियर्स।दीवारों से पोस्टर हटाते वॉलेंटियर्स।
हर संडे शहर में किसी स्थान पर इसी तरह जुटे होते हैं ये युवा।हर संडे शहर में किसी स्थान पर इसी तरह जुटे होते हैं ये युवा।
cleaning campaign of youths in lucknow on sunday kyunki sehar hai aapka
देखिए कैसी बदली दीवार की रंगत वॉलेंटियर्स के पहुंचने के बाद।देखिए कैसी बदली दीवार की रंगत वॉलेंटियर्स के पहुंचने के बाद।
दीवार को रंगते वॉलेंटियर्स।दीवार को रंगते वॉलेंटियर्स।
फ्लाइओवर के खंभे को मिल गया नया रूप।फ्लाइओवर के खंभे को मिल गया नया रूप।
कहीं भी नहीं छोड़ते पोस्टर्स।कहीं भी नहीं छोड़ते पोस्टर्स।
बारीकी से काम करते हैं ये वॉलेंटियर्स।बारीकी से काम करते हैं ये वॉलेंटियर्स।
'क्योंकि शहर है आपका' ग्रुप के वॉलेंटियर्स।'क्योंकि शहर है आपका' ग्रुप के वॉलेंटियर्स।
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