लखनऊ. पांच लाख या उससे अधिक का वार्षिक कारोबार करने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई के लिए वाणिज्यकर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे अपंजीकृत व्यापारियों की पहचान के लिए विभाग के हर क्षेत्र के खंड अधिकारियों को कमिश्नर एम.के. नारायण ने निर्देश जारी किए हैं। एक बार चिन्हित होने के बाद कारोबारियों पर साढ़े 36.5 हजार रुपए प्रतिवर्ष के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।
हाल के दिनों में खंड अधिकारियों की शह पर चल रहे अपंजीकृत करोबार के कई मामले सामने आए थे। जिसके बाद कमिश्नर वाणिज्यकर एम.के नारायण ने मुख्यालय में हुई मासिक समीक्षा बैठक में बिना पंजीकरण के कारोबार करने वालों की पहचान के निर्देश दिए। निर्देश में यह भी है कि ऐसे कारोबारियों को चिन्हित कर 36.5 हजार रुपए प्रतिवर्ष के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएग। इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गोमती नगर, चिनहट और इंदिरा नगर में आवासीय क्षेत्रों का विस्तार हो रहा है। इन क्षेत्रों में बिल्डिंग मटेरियल और फैब्रिकेटिंग का काम काफी तेजी से चल रहा है। हर महीने निर्माण सामग्री से जुड़े व्यापारी कम से कम 80 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक की बिक्री कर रहे हैं। इसके बाद भी इन कारोबारियों ने अपना वार्षिक कारोबार कम दिखाकर पंजीकरण नहीं कराया है। खंड अधिकारी पंजीकरण करवाने की जगह पंजीकरण से बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस मामले में एडिशनल कमिश्नर डा. बुद्धेशमणि ने ज्वाइंट और डिप्टी कमिश्नरों को भी निर्देशित कर दिया है।
तो इसलिए उठा रहे हैं कारोबारी फायदा
वाणिज्यकर विभाग के नियमों में लोहा, दाल, धान, सीमेन्ट और पान-मसाला को संवेदनशील वस्तुओं की श्रेणी में रखा गया है। इन वस्तुओं की फैक्ट्री या ट्रेडिंग फर्मों के पंजीकरण के लिए आवेदन आने पर व्यापार स्थल का बिना भौतिक सत्यापन किए पंजीकरण नंबर नहीं जारी किया जाता है। ऐसे में असंवेदनशील श्रेणी में आने वाली वस्तुओं का पंजीकरण व्यापार स्थल की जांच के बिना भी हो जाता है। पहले व्यापारी को टिन नंबर आवंटित होता था और बाद में जांच होती है। स्थानीय अधिकारियों की मदद से व्यापारी संवेदनशील वस्तुओं को बिना रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से बेच रहे हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर।