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बगास पावर प्‍लांट की बढ़ी दरों के खिलाफ पुनर्विचार प्रत्‍यावेदन दाखिल

6 वर्ष पहले
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लखनऊ. नियामक आयोग द्वारा हाल ही में जारी कैप्टीव एवं रिन्यूवेल नियामावली (सीआरई रेगूलेशन-2014) पर उपभोक्‍ता परिषद ने पुनर्विचार प्रत्‍यावेदन दाखिल किया है। इसी नियामावली के तहत बगास बेस पावर प्लांटों की 5 सालों की दरें तय की गईं थी। प्रत्‍यावेदन में बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी के प्रस्‍ताव को वापस लेने की मांग की गई है। परिषद ने अधिनियम, 2003 की धारा 94 एफ और आयोग बिजनेस रेगूलेशन की धारा 150 के तहत प्रत्यावेदन दाखिल किया है।
पावर कॉरपोरेशन ने भी बढ़ी दरों को कम करने के लिए आवेदन किया है। बताते चलें, आयोग द्वारा कुछ दिन पहले बगास बेस पावर प्लांटो की नई दरें जारी की गई थीं। इनमें 6.02 प्रति यूनिट प्रस्तावित बिजली को आयोग द्वारा 5.65 रुपए प्रति यूनिट तय किया गया था। वर्तमान में इसकी दर 4.96 रुपए प्रति यूनिट है। परिषद का आरोप है कि प्रदेश की गन्ना लॉबी के दबाव में पावर कॉरपोरेशन ने सुनवाई में व्यापक विरोध नहीं किया।
परिषद का कहना है कि पावर कॉरपोरेशन अब जो पुनर्विचार याचिका दाखिल कर मुद्दे उठा रहा है। यदि यह कदम दरें तय होते समय उठाया गया होता तो आज बगास बेस पावर प्लांटों की दरें बढ़ती ही नहीं। प्राविधानों के अनुसार फयूल की प्राईज का सही आंकलन करने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया जाए।
परिषद की मांग है कि रेगूलेशन के तहत बगास बेस पावर प्लांटों की दरें विडिंग रूट से तय कराई जाएं। साथ ही स्टेशन हीट रेट के संबंध में आयोग द्वारा तय मानकों पर पुनर्विचार किया जाए। बिना थर्ड पार्टी ऑडिट कराए दरों को प्रोविजनल ही माना जाए।
फोटो: पावर प्‍लांट।