तस्वीर में: अहियागंज इलाके में पतली गली, जिसमें पटाखों का गोदाम और दुकान है। (इनसेट में दुकान)
लखनऊ. बीते 20 सितंबर को सिसिंडी में हुए हादसे के बाद भले ही अफसर पटाखा फैक्ट्री और गोदामों के सुरक्षा मानक और उनकी मॉनिटरिंग के बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन हकीकत इससे अलग है। आज भी पटाखा बिक्री और गोदामों के लिए मशहूर अहियागंज बाजार में तबाही मचाने भर का सामान मौजूद है। लेकिन, अफसर इससे बेपरवाह शायद किसी अगले हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
हादसे के बाद एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए 15 दुकानदारों को नोटिस भी भिजवाया है। लेकिन, विशेषज्ञों की मानें तो यह कार्रवाई दिखावे से ज्यादा कुछ नहीं है। अब भी शहर में पटाखे के कई ऐसे गोदाम हैं, जो की आबादी के बीचों-बीच हैं। वहां होने वाले मामूली सा हादसा भी बहुत बड़े नुकसान का कारण बन सकता है। वहीं नियमानुसार, आबादी वाले क्षेत्रों में इस तरह के विस्फोटक पदार्थों को नहीं रखा जा सकता है। हालांकि सिसेंडी की पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट के बाद जिलाधिकारी राज शेखर ने कहा था की जिले में पटाखा फैक्ट्री और गोदामों के सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी, लेकिन ये सिर्फ आदेश तक ही सीमित रह गया।
ऐसी गलियां की जहां रिक्शा भी नहीं पहुंच पाए
वजीरगंज स्थित पटाखा की प्रसिद्ध बाजार अहियागंज में ऐसी-ऐसी जगह गोदाम बना रखे हैं, जहां रिक्शा भी आसानी से नहीं पहुंच सकता है। ये इलाके लोगों से भरे पड़े रहते हैं और वहां तिल रखने भर की भी जगह नहीं होती है। यदि ऐसी जगह पर कोई हादसा हो जाए तो होने वाले नुकसान का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। साथ ही आपात स्थित में वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी नहीं पहुंच सकती हैं।
दहशत के साए में रहते हैं लोग
पटाखा गोदाम के बगल में रह रहे कौशल पांडेय ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उनके गोदाम पर अक्सर सामान आता-जाता रहता हैं। लेकिन, जब से सिसेंडी का हादसा हुआ है, तब से उनका पूरा परिवार दहशत में है। गोदाम के दूसरी तरफ रह रहे नितिन अग्रवाल का कहना है कि यहां पर कितना माल रखा गया है शायद प्रशासन भी नहीं जानता है। उन्होंने बताया कि जब से डीएम ने निगरानी करने की बात कही है तब से तसल्ली है कि शायद इस गोदाम पर भी प्रशासन की नजर पड़े।
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